ढोलक-चंग की ताल पर थिरकते हैं रेगिस्तान के जहाज, मोती-गजराज के अनोखे डांस ने लूटी महफिल

Last Updated:October 04, 2026, 12:15 IST
Beri Camel Fair Sikar: सीकर जिले के बेरी गांव में आयोजित पशु मेला पशुओं की खरीद-फरोख्त के साथ-साथ लोक परंपरा और ऊंट-घोड़ी नृत्य के लिए चर्चा में है. यहां राजस्थानी लोकगीतों की धुन पर मोती, गजराज और बादल जैसे प्रशिक्षित ऊंट जब लयबद्ध अंदाज में थिरकते हैं तो दर्शक दंग रह जाते हैं. महीनों के कठिन अभ्यास के बाद तैयार किए गए ये ऊंट अपने प्रशिक्षकों के इशारों पर शानदार करतब दिखाते हैं. दिनभर चलने वाले पशु व्यापार के बाद शाम को आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम और नृत्य प्रतियोगिताएं मेले का मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं.
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Sikar: राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती शेखावाटी अपनी अनूठी परंपराओं और रंगों के लिए दुनिया भर में पहचानी जाती है. इन दिनों सीकर जिले के बेरी गांव में चल रहा वार्षिक पशु मेला पूरे परवान पर है. यह मेला सिर्फ पशुओं के क्रय-विक्रय का पारंपरिक केंद्र ही नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और पीढ़ियों पुरानी कला का एक अद्भुत मंच भी बन चुका है. मेले में जब रेगिस्तान का जहाज कहे जाने वाले ऊंट और शानदार नस्ल की घोड़ियां राजस्थानी लोकगीतों की मधुर धुनों पर थिरकती हैं, तो वहां मौजूद हर शख्स दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जाता है. सुंदर आभूषणों, घुंघरुओं और रंग-बिरंगे कपड़ों से सजे-धजे ऊंटों की लयबद्ध चाल देखने के लिए न केवल राजस्थान, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में लोग बेरी पहुंच रहे हैं.
बेरी के इस पशु मेले में आयोजित होने वाली ऊंट और घोड़ी नृत्य प्रतियोगिता इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बनी हुई है. इसमें अलग-अलग क्षेत्रों से आए पशुपालक अपने विशेष रूप से प्रशिक्षित ऊंटों और घोड़ियों के साथ हिस्सा लेते हैं. जैसे ही लाउडस्पीकर पर पारंपरिक चंग और ढोलक के साथ राजस्थानी लोकगीत गूंजते हैं, वैसे ही ये ऊंट अपने ट्रेनर के इशारे पर ताल से ताल मिलाकर कदम बढ़ाने लगते हैं. कभी ये ऊंट अपनी गर्दन को संगीत की धुन पर मटकाते हैं, तो कभी आगे-पीछे घूमकर हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं. पशुपालक और इन बेजुबानों के बीच का यह अनूठा तालमेल इतना सधा हुआ और अचूक होता है कि पूरा मेला मैदान दर्शकों की तालियों और उत्साह भरी सीटियों से गूंज उठता है.
मोती और गजराज जैसे प्रसिद्ध ऊंटों का जलवाइस वर्ष की प्रतियोगिता में कई नामी और मशहूर ऊंट आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इनमें विशेष रूप से मोती और गजराज नाम के ऊंट शामिल हैं, जो अपने शानदार डांस और करतबों के लिए पूरे इलाके में जाने जाते हैं. इनके अलावा हंसराज, नान्या, राजा, हंस, तूफान, टाइगर और बादल जैसे कई अन्य प्रशिक्षित ऊंट भी अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. मेले में रोजाना शाम ढलते ही करतब और नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जहां ये सभी ऊंट एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करते हैं.
प्रस्तुति के पीछे महीनों का कड़ा अभ्यास और समर्पणपशुपालकों का कहना है कि ऊंटों और घोड़ियों का यह मनमोहक नृत्य कोई रातों-रात तैयार नहीं होता है. इसके पीछे कई महीनों की अथक मेहनत, नियमित रियाज और गहरा समर्पण छुपा होता है. पशुपालक हर दिन घंटों अभ्यास कराकर अपने ऊंटों को खास संकेतों और इशारों को समझना सिखाते हैं. इसी निरंतर प्रशिक्षण का परिणाम होता है कि भरे मेले और तेज संगीत के बीच भी ये पशु बिना किसी घबराहट के बिल्कुल सटीक तालमेल के साथ प्रस्तुति देते हैं.
पशुओं की खरीद-फरोख्त और सांस्कृतिक संध्या की धूमनृत्य प्रतियोगिता के साथ-साथ मेले में ऊंट, घोड़े और अन्य मवेशियों की जमकर खरीद-फरोख्त भी जारी है. दूर-दराज से आए व्यापारी और ग्रामीण पशुपालक दिनभर मोलभाव करते दिखाई देते हैं. वहीं दिनभर की व्यापारिक चहल-पहल के बाद शाम होते ही पूरा मेला लोक संस्कृति के रंगों में रंग जाता है. देर रात तक चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां, पारंपरिक गीत और देहाती संगीत मेले में आए लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sikar,Sikar,Rajasthan
First Published :
October 04, 2026, 12:15 IST



