दिल्ली में पकड़े गए कैंसर इंजेक्शन निकले नकली, अब बीकानेर कनेक्शन पर बड़ा सवाल

जयपुर. दिल्ली में ब्लैक मार्केट से पकड़े गए कैंसर के इंजेक्शन नकली पाए जाने के बाद अब जांच का फोकस राजस्थान के बीकानेर कैंसर अस्पताल पर भी पहुंच गया है. सवाल यह है कि दिल्ली में मिले इंजेक्शन आखिर कहां से आए. क्या इनका कोई कनेक्शन बीकानेर के सरकारी कैंसर अस्पताल से है या फिर अस्पताल से जुड़े इंजेक्शन किसी दूसरे तरीके से ब्लैक मार्केट तक पहुंचे. इस सवाल पर राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी RMCL के अधिकारी भी अभी कोई साफ जवाब नहीं दे पा रहे हैं.
RMCL के सीएमडी पुखराज सेन ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और दिल्ली पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि माफिया के पास ये इंजेक्शन कहां से आए. हालांकि अब तक की जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि दिल्ली में ब्लैक में पकड़े गए इंजेक्शन नकली थे.
जर्मनी की लैब रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंताइस पूरे मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि दिल्ली में पकड़े गए सैंपल की जर्मनी की लैब में जांच कराई गई. जांच रिपोर्ट के मुताबिक इंजेक्शन में कैंसर से लड़ने वाला मूल एक्टिव इंग्रीडिएंट नहीं मिला. रिपोर्ट में पानी और बैक्टीरिया मिलने की बात सामने आई. आरोप है कि खाली वायल में पानी और बैक्टीरिया भरकर नकली दवा तैयार की जाती थी. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मरीजों के लिए यह मामला बेहद चिंताजनक है. ऐसी बीमारी में दवा की गुणवत्ता सीधे मरीज के इलाज से जुड़ी होती है. अब सवाल यह है कि नकली इंजेक्शन का यह नेटवर्क कितना बड़ा है और ये दवाएं किन-किन मरीजों तक पहुंचीं.
बीकानेर से दिल्ली गए या इंजेक्शन से निकाली गई दवा
बीकानेर के सरकारी कैंसर अस्पताल से कथित तौर पर करीब एक लाख रुपए कीमत के कैंसर इंजेक्शन गायब किए जाने का मामला पहले से जांच के घेरे में है. अब दिल्ली में उसी मामले से जुड़े बैच नंबर वाले इंजेक्शन नकली मिलने के बाद शक और गहरा गया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बीकानेर कैंसर अस्पताल से इंजेक्शन दिल्ली तक पहुंचे थे. या फिर अस्पताल से जुड़े इंजेक्शन में से असली दवा निकालकर उसे कहीं और ब्लैक में बेचा गया और बाद में खाली वायल में पानी और अन्य सामग्री भरकर नकली इंजेक्शन तैयार किए गए. इन सवालों पर फिलहाल कोई अंतिम जवाब नहीं है.
अस्पताल तक सप्लाई हुए इंजेक्शनपुखराज सेन ने न्यूज18 इंडिया से बातचीत में कहा कि RMCL अपनी तरफ से जांच कर रहा है. प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि कंपनी से खरीदे गए इंजेक्शन RMCL ने सुरक्षित तरीके से अस्पतालों तक सप्लाई किए थे. वहीं बीकानेर कैंसर अस्पताल की ओर से भी RMCL को बताया गया है कि उनकी तरफ से भेजे गए इंजेक्शन मरीजों को लगाए गए.
पुलिस और ड्रग कंट्रोलर की जांच से खुलेगा राजजब पुखराज सेन से पूछा गया कि अगर RMCL के बैच नंबर वाले इंजेक्शन दिल्ली में नकली रूप में बिकते हुए मिले हैं तो यह मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है और इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी. इस पर सेन ने कहा कि RMCL अपने स्तर पर जांच कर रहा है. बाकी तस्वीर दिल्ली पुलिस और ड्रग कंट्रोलर की जांच के बाद ही साफ होगी. यानी RMCL की जांच फिलहाल इस बात की पुष्टि कर रही है कि कंपनी से अस्पताल तक सप्लाई सुरक्षित तरीके से पहुंची और अस्पताल का दावा है कि इंजेक्शन मरीजों को लगाए गए. लेकिन दिल्ली में पकड़े गए नकली इंजेक्शन का स्रोत क्या है, इस पर अभी भी बड़ा सवाल बना हुआ है.
फरीदाबाद के डॉक्टर पर फर्जी दवाएं बेचने का आरोप
दिल्ली पुलिस की जांच में इस मामले में 39 वर्षीय डॉ. मनीष शर्मा को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक आरोपी मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर का रहने वाला है और हाल के समय में फरीदाबाद में रह रहा था. उसने रूस से MBBS की पढ़ाई की थी और भारत लौटने के बाद मेडिकल प्रैक्टिस के लिए जरूरी परीक्षा पास नहीं कर सका. पुलिस के अनुसार बाद में उसने फरीदाबाद में HK Polyclinic और HK Pharmaceuticals के नाम से कारोबार शुरू किया. आरोप है कि वह IndiaMART के जरिए कैंसर की दवाओं के खरीदारों तक पहुंचता था और महंगी दवाओं में ज्यादा मुनाफे के लिए कथित तौर पर तस्करी की गई, नकली या मिलावटी दवाएं मरीजों को बेचता था.
क्राइम ब्रांट को मिली गुप्त सूचना21 अप्रैल 2026 को क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिलने के बाद सुखदेव विहार इलाके में जाल बिछाया गया था. पुलिस के मुताबिक आरोपी Honda City कार से वहां पहुंचा, जिसके बाद उसे पकड़ लिया गया. उसके पास से ICLUSIG के 4 पैकेट, Human Albumin Solution 20 प्रतिशत की 4 शीशियां और Janssen Biotech की DARZALEX दवा के 2 बॉक्स बरामद किए गए. पुलिस के अनुसार ICLUSIG भारत में बिक्री के लिए मंजूर नहीं है. वहीं Albumin और DARZALEX की बरामद दवाओं के तुर्की से अवैध तरीके से भारत लाए जाने का भी आरोप है.
अब असली सवाल, नकली इंजेक्शन का नेटवर्क कहां तकदिल्ली में नकली कैंसर इंजेक्शन मिलने की पुष्टि के बाद जांच अब सिर्फ एक आरोपी या एक जगह तक सीमित नहीं रह सकती. बीकानेर के कैंसर अस्पताल से कथित तौर पर गायब इंजेक्शन, दिल्ली में मिले नकली वायल, बैच नंबर का कनेक्शन और ब्लैक मार्केट में महंगी कैंसर दवाओं की सप्लाई, इन सभी कड़ियों को जोड़कर जांच करनी होगी. फिलहाल RMCL के सीएमडी पुखराज सेन भी यह साफ नहीं कर पा रहे हैं कि नकली इंजेक्शन माफिया तक पहुंचे कैसे. अस्पताल से दिल्ली तक सप्लाई हुई या असली दवा निकालकर वायल को नकली तरीके से भरा गया, इसका जवाब अभी जांच के पास है.
पुलिस खोलेगी सारा भेदअब दिल्ली पुलिस और ड्रग कंट्रोलर की जांच ही तय करेगी कि बीकानेर कैंसर अस्पताल और दिल्ली में पकड़े गए नकली इंजेक्शन के बीच वास्तव में कोई सीधा संबंध है या नहीं. लेकिन इतना जरूर है कि कैंसर मरीजों से जुड़ा यह मामला अब सिर्फ दवा चोरी का नहीं रहा. नकली इंजेक्शन में एक्टिव दवा की जगह पानी और बैक्टीरिया मिलने के दावे के बाद मरीजों की सुरक्षा और सरकारी दवा सप्लाई सिस्टम, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.



