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दुनिया का वो लेफ्ट आर्म पेसर, जिसने 140 साल में पहली बार किया ये कारनामा, सदियों तक याद रखा जाएगा नाम

Last Updated:August 23, 2026, 21:19 IST

Shoriful Islam Create history: बांग्लादेश के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज शोरिफुल इस्लाम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैके टेस्ट में इतिहास रच दिया है. उन्होंने पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी में कहर बरपाते हुए मात्र 48 रन देकर 7 विकेट झटके. इस घातक प्रदर्शन के दम पर वह पिछले 140 वर्षों में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट पारी में सात विकेट लेने वाले दुनिया के पहले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज बन गए हैं.

मैके टेस्ट की पहली पारी में जब बांग्लादेशी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई, तब बाएं हाथ के 25 वर्षीय तेज गेंदबाज शोरिफुल इस्लाम (Shoriful Islam) ने संकटमोचन की भूमिका निभाई. उन्होंने निचले क्रम में जुझारू बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 14 रन बनाए और टीम के लिए सर्वोच्च स्कोरर रहे. इसके बाद गेंदबाजी में उन्होंने जो कहर बरपाया, उसने मैच का नक्शा ही बदल दिया.

बल्लेबाजी में योगदान देने के बाद शोरफुल ने अपनी गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की नींद उड़ा दी. उन्होंने अपनी सटीक लाइन-लेंथ और स्विंग से कंगारू बल्लेबाजों को क्रीज पर टिकने का मौका नहीं दिया. उनके इस कातिलाना स्पेल की बदौलत पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम अपनी पहली पारी में मात्र 210 रनों पर ढेर हो गई.

शोरिफुल इस्लाम ने इस पारी में बेहद किफायती और घातक गेंदबाजी का नजारा पेश किया. उन्होंने महज़ 15 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें 3 मेडन ओवर शामिल रहे. उन्होंने मात्र 48 रन खर्च करते हुए ऑस्ट्रेलिया के 7 प्रमुख बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई. यह उनके टेस्ट करियर का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है.

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इस सात विकेट के हॉल के साथ ही शोरिफुल इस्लाम ने टेस्ट क्रिकेट के 140 साल पुराने इतिहास को पलट दिया है. वह पिछले 140 वर्षों में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट पारी में सात विकेट लेने वाले दुनिया के पहले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज बन गए हैं. उनसे पहले यह कारनामा उन्नीसवीं सदी में इंग्लैंड के गेंदबाजों ने किया था.

इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट पारी में सात विकेट लेने वाले आखिरी बाएं हाथ के तेज गेंदबाज इंग्लैंड के डिक बार्लो थे. डिक बार्लो ने 5 जुलाई से 7 जुलाई 1886 के बीच मैनचेस्टर टेस्ट की दूसरी पारी में 44 रन देकर 7 विकेट लिए थे. इसके अलावा उन्होंने जनवरी 1883 में सिडनी टेस्ट की दूसरी पारी में भी 40 रन देकर 7 विकेट झटके थे. शोरिफुल इस्लाम से पहले टॉम एम्मेट ने भी 1879 में मेलबर्न टेस्ट में यह उपलब्धि हासिल की थी. इस तरह शोरफुल इतिहास के मात्र चौथे बाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं जिन्होंने कंगारुओं के खिलाफ पारी में 7 विकेट चटकाए हैं.

यदि बाएं हाथ के स्पिनर्स को भी शामिल कर लिया जाए, तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट पारी में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर हेडली वेरीटी के नाम है, जिन्होंने 1934 के लॉर्ड्स टेस्ट में 43 रन देकर 8 विकेट लिए थे. हालांकि, तेज गेंदबाजों की श्रेणी में शोरिफुल इस्लाम का यह प्रदर्शन मील का पत्थर साबित हुआ है, क्योंकि आधुनिक युग में तेज गेंदबाजों के लिए ऐसा करना बेहद दुर्लभ माना जाता है.

यह सात विकेटों का स्पेल केवल विदेशी जमीन पर रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास में भी स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. शोरिफुल इस्लाम बांग्लादेश के पहले ऐसे तेज गेंदबाज बन गए हैं जिन्होंने किसी भी अंतरराष्ट्रीय मैच (टेस्ट, वनडे या टी20) की एक पारी में 7 विकेट हासिल किए हैं.

बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास में इससे पहले यदि किसी गेंदबाज ने अंतरराष्ट्रीय मैच की एक पारी में 7 या उससे अधिक विकेट लिए थे, तो वे सभी स्पिन गेंदबाज थे. शोरफुल से पहले देश के लिए केवल चार स्पिनर्स ही यह जादुई आंकड़ा छू पाए थे. शोरफुल ने तेज गेंदबाजी में यह मुकाम हासिल कर एक नया बैंचमार्क स्थापित किया है.ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच मैके के ग्रेट बैरियर रीफ एरिना में खेला गया यह दूसरा टेस्ट मैच अपनी अनूठी परिस्थितियों और रोमांच के लिए हमेशा याद रखा जाएगा. मुकाबला केवल दो दिनों के भीतर समाप्त हो गया, जिसमें पिचों के मिज़ार और गेंदबाजों के दबदबे ने महफ़िल लूट ली. इस छोटी अवधि के मैच में भी शोरफुल ने अपनी छाप अमिट छोड़ दी.

पंचगढ़ से ताल्लुक रखने वाले 25 वर्षीय शोरिफुल इस्लाम का यह प्रदर्शन बांग्लादेशी क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य की गवाही देता है. पारंपरिक रूप से स्पिन गेंदबाजी पर निर्भर रहने वाले देश से एक बाएं हाथ के तेज गेंदबाज का उठ खड़ा होना और दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में शुमार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐसा ऐतिहासिक कारनामा करना, यह साबित करता है कि अब बांग्लादेशी पेस अटैक विश्व स्तर पर अपनी धमक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है. पंचगढ़ के खेतों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करने वाले इस गेंदबाज का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. खेती-किसानी से जुड़े एक साधारण परिवार में जन्मे शोरफुल के शुरुआती दिन बेहद संघर्षपूर्ण रहे, जहां परिवार धान और मूंगफली की फसल पर निर्भर था. बुनियादी सुविधाओं और ट्रेनिंग के अभाव के बावजूद उनके क्रिकेट के प्रति जुनून ने कभी हार नहीं मानी. उनके जीवन का असली टर्निंग पॉइंट तब आया, जब कोच आलमगीर कबीर ने उनकी गेंदबाजी की चमक को पहचाना और उन्हें दिनाजपुर से राजशाही अकादमी ले गए, जहां से उनके सपनों को नई उड़ान मिली.

First Published :

August 23, 2026, 21:16 IST

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