दूध निकालते ही पशु को बैठने न दें, 30 मिनट की ये सावधानी बचाएगी थनैला रोग से, जानिए आसान टिप्स

Last Updated:August 22, 2026, 09:01 IST
बरसात में पशुशाला में नमी और गंदगी बढ़ने से दुधारू पशुओं में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. थनैला रोग यानी मैस्टाइटिस ऐसी ही समस्या है, जो गाय और भैंस के थनों को प्रभावित कर सकती है. पशु चिकित्सक के मुताबिक दूध निकालने के बाद करीब आधे घंटे तक पशु को बैठने से रोकना और साफ-सफाई रखना बीमारी से बचाव में मददगार हो सकता है.
सुल्तानपुर: बरसात के मौसम में दुधारू पशुओं की सेहत को लेकर पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. नमी और गंदगी के कारण कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इनमें थनैला रोग यानी मैस्टाइटिस भी प्रमुख समस्या है. यह बीमारी पशु के थनों को प्रभावित करती है और समय पर ध्यान न देने पर दूध उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.
पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. दिवाकर कुमार ने बताया कि थनैला रोग से बचाव के लिए दूध निकालने के बाद की सावधानी बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि दूध निकालते समय पशु के थन का छेद कुछ समय के लिए खुला रहता है. अगर पशु तुरंत गंदी या नम जमीन पर बैठ जाता है, तो आसपास मौजूद कीटाणु थन के रास्ते अंदर प्रवेश कर सकते हैं. इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.
डॉ. दिवाकर कुमार ने बताया कि दूध निकालने के बाद गाय या भैंस को करीब 30 मिनट तक बैठने से रोकना चाहिए. इस दौरान पशु को हरा चारा या दूसरा आहार दिया जा सकता है, ताकि वह खड़ा होकर चारा खाता रहे. इससे दूध निकालने के तुरंत बाद गंदी जमीन के संपर्क में आने की संभावना कम हो सकती है. पशुपालकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दूध निकालने की जगह साफ और सूखी हो. गोबर, गंदा पानी और कीचड़ जमा होने पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है.
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थनैला रोग होने पर पशु के थन में सूजन, गर्माहट, लालिमा या दर्द दिखाई दे सकता है. दूध की सामान्य बनावट में भी बदलाव नजर आ सकता है. दूध में थक्के या अन्य असामान्य पदार्थ दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण दिखने पर पशुपालक खुद से दवा देने के बजाय पशु चिकित्सक से जांच कराएं. बीमारी की पुष्टि होने के बाद विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही उपचार कराया जाना चाहिए.
पशुओं के बैठने वाली जगह की नियमित सफाई जरूरी है. फर्श पर गंदगी, गोबर और पानी जमा न होने दें. जरूरत के अनुसार पशुशाला की सफाई और सैनिटाइजेशन करें. चूने या अन्य स्वीकृत कीटाणुनाशक का इस्तेमाल स्थानीय पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार किया जा सकता है.
दूध निकालने से पहले और बाद में हाथ, बर्तन और थनों की स्वच्छता का भी ध्यान रखना चाहिए. थनों की देखभाल के लिए किसी भी डिप या दवा का इस्तेमाल पशु चिकित्सक की सलाह से करना बेहतर है.
बरसात में पशुशाला को सूखा और साफ रखने के साथ दूध निकालने के बाद करीब आधे घंटे तक पशु को खड़ा रखना थनैला रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है. नियमित निगरानी और समय पर पशु चिकित्सक की सलाह लेने से दुधारू पशुओं को संक्रमण से बचाने में मदद मिलेगी.
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August 22, 2026, 09:01 IST



