‘पर्याप्त स्टॉक है विपक्ष कालाबाजारी करा रहा’, राजस्थान में खाद पर घमासान; किसान कतार में, नरेश मीणा का जयपुर कूच

जयपुर. राजस्थान में रबी सीजन की शुरुआत के साथ खाद का मुद्दा गरमा गया है. एक तरफ धौलपुर समेत कुछ जिलों में किसान डीएपी और यूरिया के लिए घंटों कतार में खड़े नजर आ रहे हैं. किसान खाद नहीं मिलने और कुछ जगहों पर कालाबाजारी के आरोप लगा रहे हैं. दूसरी तरफ सरकार और बीजेपी का कहना है कि प्रदेश में खाद का पर्याप्त स्टॉक है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि खाद की कमी नहीं है और सरकार किसानों तक खाद पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है. इसी बीच किसान नेता नरेश मीणा खाद की मांग को लेकर जयपुर कूच कर रहे हैं. यानी इस समय राजस्थान में खाद को लेकर दो तस्वीरें सामने हैं. सरकारी आंकड़ों में स्टॉक मौजूद है, जबकि कई जगह किसान वितरण में परेशानी और कतार की बात कर रहे हैं.
धौलपुर में खाद की दुकान के बाहर किसानों की लंबी कतारें लगी हैं. किसान सुबह से डीएपी खाद लेने के लिए इंतजार कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि कोई सुबह पांच बजे ही कतार में आ गया तो कोई सात बजे से खड़ा है. कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो लगातार दूसरे और तीसरे दिन खाद लेने के लिए समिति पहुंच रहे हैं. किसानों के सामने परेशानी यह है कि बुवाई और खेती के दूसरे काम के लिए खाद चाहिए, लेकिन समय पर कट्टा नहीं मिल पा रहा.
किसानों ने बताई जमीनी हकीकतएक किसान राजू का आरोप है कि समिति के सामने का गेट बंद करके पीछे के दरवाजे से खाद देने का काम किया जा रहा है. वहीं किसान लीलाधर त्यागी ने बताया कि वह सुबह सात बजे से कतार में लगे हैं. उनका कहना है कि किसान पहले खड़े रहते हैं, फिर बैठ जाते हैं, लेकिन दोपहर तक भी खाद नहीं मिलती. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कतार में खड़े किसानों की परेशानी सामने आई है.
बारां में सड़क पर उतरे किसान
डीएपी और यूरिया को लेकर परेशानी की बात सिर्फ धौलपुर तक सीमित नहीं है. बारां में भी खाद को लेकर किसानों का गुस्सा सामने आया और किसानों ने सड़क जाम किया. इसी मुद्दे को लेकर किसान नेता नरेश मीणा भी आंदोलन कर रहे हैं. वह किसानों और अपने समर्थकों के साथ कोटा से जयपुर की ओर कूच कर रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, वह पैदल जयपुर के लिए निकले थे, लेकिन पैरों में छाले पड़ने के बाद ठेले पर भी सफर करते नजर आए. नरेश मीणा की इस यात्रा को लेकर प्रशासन भी उनसे बातचीत और समझाइश की कोशिश कर रहा है. उनका आंदोलन खाद की उपलब्धता और किसानों को डीएपी देने की मांग से जुड़ा है.
टीना डाबी और नरेश मीणा की बातचीत भी चर्चा में
नरेश मीणा के जयपुर कूच के बीच टोंक जिला कलेक्टर टीना डाबी का उनसे फोन पर बातचीत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत में कलेक्टर ने नरेश मीणा से किसानों को समझाने की अपील की. उन्होंने कहा कि जिले में खाद की कमी नहीं है और सप्लाई ठीक करवाई जाएगी. बातचीत में डीएपी को तय कीमत पर बिना किसी अतिरिक्त सामान के उपलब्ध कराने की बात भी सामने आई. यह बातचीत इसलिए भी चर्चा में आ गई, क्योंकि खाद के मुद्दे पर किसान आंदोलन और सरकार के दावे आमने-सामने हैं.
कांग्रेस का आरोप- सरकार चुनाव में व्यस्तखाद संकट को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस का आरोप है कि रबी सीजन में किसान खाद के लिए परेशान हो रहे हैं, लेकिन सरकार खाद की व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय पंचायत चुनाव की तैयारियों में लगी हुई है. कांग्रेस नेता प्रताप खाचरियावास ने भी खाद की कमी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. दूसरी तरफ बीजेपी ने खाद के संकट को लेकर विपक्ष पर ही आरोप लगाए हैं. बीजेपी का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक फायदा लेने के लिए खाद का कृत्रिम संकट पैदा करवा रहा है और कालाबाजारी को बढ़ावा दिया जा रहा है.
बीजेपी अध्यक्ष बोले- खाद का पर्याप्त स्टॉक
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि राजस्थान में खाद का पर्याप्त स्टॉक है. उन्होंने कहा कि खाद की कमी नहीं है और सरकार इसकी कमी होने भी नहीं देगी. सप्लाई को लेकर पूरा इंतजाम किए जा रहे हैं. सरकार ने भी अब खाद की उपलब्धता और वितरण पर निगरानी बढ़ा दी है. 6 अक्टूबर को हुई राज्य स्तरीय बैठक में अधिकारियों ने रबी सीजन के दौरान किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराने और जमाखोरी व कालाबाजारी रोकने पर जोर दिया. सरकार के मुताबिक प्रदेश में 3.73 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.04 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 95 हजार मीट्रिक टन एनपीके और 2.09 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक उपलब्ध है.
राजस्थान में खाद की किल्लत
फिर कतार क्यों लग रही है?यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है. सरकार के पास स्टॉक होने के दावे के बावजूद किसान कई जगह खाद के लिए कतार में क्यों खड़े हैं. एक वजह सप्लाई और मांग के बीच अंतर को बताया जा रहा है. रबी सीजन में डीएपी की मांग तेजी से बढ़ती है. वहीं भारत डीएपी और उसके कच्चे माल की जरूरत का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूरा करता है. ऐसे में बाहर की सप्लाई में बदलाव का असर घरेलू बाजार तक पहुंच सकता है. इसके अलावा किसानों की बढ़ती खाद जरूरत और जिलों तक समय पर वितरण भी अहम है. केंद्र सरकार के आंकड़ों में भी देश में रबी सीजन से पहले डीएपी का स्टॉक पिछले साल से अधिक बताया गया है, लेकिन राज्यों और जिलों में वास्तविक वितरण की स्थिति अलग-अलग हो सकती है.
टोकन से लेकर सीमित कट्टों तक व्यवस्थाकालाबाजारी रोकने और कतार कम करने के लिए कुछ जिलों में टोकन व्यवस्था शुरू की गई है. किसानों को आधार कार्ड के आधार पर सीमित मात्रा में खाद देने की व्यवस्था भी की जा रही है. कुछ जगह एक किसान को एक से तीन कट्टे तक देने की बात सामने आई है. इस व्यवस्था का मकीसद यह है कि खाद ज्यादा किसानों तक पहुंचे और कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खाद लेकर उसका गलत इस्तेमाल न कर सके.
पंचायत चुनाव के बीच खाद क्यों बना बड़ा मुद्दा?राजस्थान में पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो चुका है. ऐसे में खाद का मुद्दा सरकार और बीजेपी के लिए भी संवेदनशील हो गया है. निकाय चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव अगली बड़ी राजनीतिक परीक्षा है. ऐसे समय में अगर खाद की कतारें और किसानों का गुस्सा बढ़ता है तो यह चुनावी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन सकता है. पंचायत चुनाव सीधे-सीधे गांव और वहां के वोटरों से सामंजस्य का मामला होता है. दूसरी तरफ बीजेपी यह बताने की कोशिश कर रही है कि प्रदेश में खाद का स्टॉक पर्याप्त है और परेशानी को वितरण व्यवस्था के स्तर पर दूर किया जा रहा है. यही वजह है कि सरकार एक तरफ सप्लाई बढ़ाने और वितरण ठीक करने पर जोर दे रही है, तो दूसरी तरफ नरेश मीणा के जयपुर कूच को रोकने और बातचीत के जरिए मामला शांत करने की कोशिश भी हो रही है.



