पुष्कर मेले में बदले रजिस्ट्रेशन के नियम, 5 से कम घोड़े लाने पर सीधे मिलेगा प्लॉट; जियो टैगिंग भी खत्म

Last Updated:November 01, 2026, 13:34 IST
Pushkar Animal Fair 2026 updates: अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेले में पशुपालकों की सुविधा के लिए प्रशासन ने ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण प्रणाली शुरू की है. पांच से कम घोड़े रखने वाले छोटे अश्वपालकों को सीधे ऑफलाइन प्लॉट मिलेंगे, जबकि पांच से अधिक घोड़ों के लिए सरकारी अस्पताल का हेल्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य है. प्रक्रिया से जियो टैगिंग की बाध्यता हटा दी गई है और पोर्टल पर 1 MB साइज तक की फोटो अपलोड कर आसान सत्यापन कराया जा सकता है. भैंस वंश व अन्य पशुओं के ठहराव के लिए आरक्षित स्थान तय किए गए हैं.
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अजमेर: राजस्थान के अजमेर जिले के विश्व प्रसिद्ध पुष्कर क्षेत्र में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेले में इस बार प्रशासन द्वारा अभूतपूर्व बदलाव किए गए हैं. मेले में भाग लेने आने वाले देश-विदेश के पशुपालकों और व्यापारियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक और सरल व्यवस्थाएं लागू की गई हैं. इस वर्ष घोड़ों के पंजीकरण से लेकर मेला प्रांगण में प्लॉट आवंटन तक की पूरी प्रक्रिया को पहले की तुलना में बेहद सुगम और पारदर्शी बनाया गया है. प्रशासन की ओर से पशुपालकों की सुविधा हेतु एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया गया है, ताकि किसी को भी अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के चक्कर न काटने पड़ें.
मेला अधिकारी डॉक्टर नवीन परिहार ने व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मेले में भाग लेने वाले ऐसे छोटे अश्वपालक, जिनके पास पांच से कम घोड़े हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की जटिल या लंबी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं है. ऐसे पशुपालकों को मेला क्षेत्र में पहुंचते ही सीधे ऑफलाइन माध्यम से तुरंत प्लॉट आवंटित कर दिए जाएंगे. यह विशेष कदम मुख्य रूप से छोटे और सीमांत पशुपालकों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा, भ्रम या अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े और वे बिना किसी परेशानी के मेले में अपने पशुओं को ठहरा सकें.
हेल्थ सर्टिफिकेट और जियो टैगिंग नियमों में रियायतडॉ. नवीन परिहार ने आगे स्पष्ट किया कि जिन अश्वपालकों के पास पांच या उससे अधिक घोड़े हैं, उनके लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र यानी हेल्थ सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है. पशुपालक अपने नजदीकी किसी भी सरकारी पशु चिकित्सा अस्पताल में जाकर वहां के योग्य डॉक्टरों से यह प्रमाण पत्र आसानी से बनवा सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण सुधार यह किया गया है कि पहले लागू की गई जियो टैगिंग की अनिवार्यता को अब पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है. इससे प्रशासनिक और कागजी औपचारिकताएं न्यूनतम हो गई हैं. पशुपालक अपने घोड़ों की संख्या के अनुपात में डॉक्टर से सर्टिफिकेट बनवाकर पोर्टल पर आसानी से अपलोड कर सकते हैं.
ऑनलाइन पोर्टल सत्यापन प्रक्रिया और सहायताडिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण करते समय पशुपालकों को अपने पशु की एक स्पष्ट फोटो अपलोड करनी होती है, जिसकी अधिकतम फाइल साइज एक एमबी तक स्वीकार की जाती है. फोटो और हेल्थ सर्टिफिकेट अपलोड होते ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है. इसके बाद विभाग की एक विशेष तकनीकी टीम द्वारा फोन के माध्यम से डेटा का सत्यापन किया जाता है. यदि फॉर्म में दर्ज की गई सभी जानकारियां सही पाई जाती हैं, तो उसे तत्काल स्वीकृत कर लिया जाता है. किसी भी त्रुटि या कमी की स्थिति में टीम द्वारा फोन पर तुरंत सही मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है.
भैंस वंश एवं अन्य पशुओं के लिए विशेष ठहराव व्यवस्थामेला प्रशासन ने भैंस वंश और अन्य प्रजातियों के पशुओं के लिए भी विशेष और सुदृढ़ प्रबंध किए हैं. इन पशुओं को मेले में लाने वाले पशुपालकों के लिए किसी भी लंबी ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया की बाध्यता नहीं रखी गई है. उनके सुगम ठहराव के लिए मेला परिसर में एक विस्तृत और उपयुक्त स्थान को पूरी तरह से आरक्षित कर दिया गया है. इस दूरदर्शी व्यवस्था से पशुपालकों को अपने पशुओं को ठहराने में कोई असुविधा नहीं होगी और पूरा अंतरराष्ट्रीय मेला सुचारू रूप से संचालित होगा.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Ajmer,Ajmer,Rajasthan
First Published :
November 01, 2026, 13:34 IST



