बरेली के शिक्षक अमित चौधरी गणित विषय को आसान बनाने के लिए 17 साल किया काम, 11 राज्यों में किये मैथमेटिक्स शो, जानें

Last Updated:September 10, 2026, 08:36 IST
बरेली के गणित शिक्षक अमित चौधरी ने अपनी जिंदगी के लिए खुद की सरकार और संविधान बनाया. उन्होंने गणित को आसान बनाने के लिए 17 साल काम किया और देश के 11 राज्यों में मैथमेटिक्स शो किए. अमित के मुताबिक, सरकार बनने के करीब दो साल बाद जब उन्हें लगा कि कई काम समय पर नहीं हो रहे हैं और गलतियां हो रही हैं. तो उन्होंने अपनी सरकार का संविधान बनाया. इसमें नियम, धाराएं, पुरस्कार और सजा तक निर्धारित की गईं. वह कहते हैं कि उनके लिए उनकी सरकार ही रामायण, भगवद्गीता और गुरुवाणी की तरह पूजनीय है.
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बरेली: आमतौर पर सरकार, संविधान और कायदे-कानून की बात किसी देश या राज्य के संदर्भ में होती है. लेकिन बरेली में गणित शिक्षक अमित चौधरी की कहानी कुछ अलग है. उन्होंने अपनी जिंदगी को बेहतर तरीके से चलाने के लिए खुद की एक सरकार बनाई और उसके लिए बाकायदा संविधान, नियम, कायदे-कानून, पुरस्कार और सजा तक तय कर दी. यही नहीं, गणित को आसान बनाने की उनकी कोशिशों ने उन्हें देशभर में अलग पहचान दिलाई.
पहले होतीं थी समान्य ज्ञान प्रतियोगिता
अमित चौधरी को बच्चे अमित सर या अमित चौधरी मैथमेटिक्स टीचर के नाम से जानते हैं. वह बताते हैं कि जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ते थे. उस समय स्कूलों में यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो क्या होता. जैसे विषयों पर निबंध प्रतियोगिताएं होती थीं. इसी विचार ने उनके मन में अपनी सरकार बनाने का जुनून पैदा किया. फिल्मों में मुहूर्त और सरकारों की योजनाओं से प्रेरणा लेकर उन्होंने अपनी खुद की Government of Amit Choudhary ARMPकी स्थापना की. अमित के मुताबिक, सरकार बनने के करीब दो साल बाद जब उन्हें लगा कि कई काम समय पर नहीं हो रहे हैं और गलतियां हो रही हैं. तो उन्होंने अपनी सरकार का संविधान बनाया. इसमें नियम, धाराएं, पुरस्कार और सजा तक निर्धारित की गईं. वह कहते हैं कि उनके लिए उनकी सरकार ही रामायण, भगवद्गीता और गुरुवाणी की तरह पूजनीय है.
गणित पर किया काम
अमित चौधरी की पहचान सिर्फ उनके अनोखे प्रयोग तक सीमित नहीं है. गणित को आसान बनाने के लिए उन्होंने एब्सट्रैक्ट, एप्लाइड और वैदिक गणित को जोड़कर एक अलग सिस्टम पर काम किया. उनका कहना है.कि गणित कठिन नहीं है. जरूरत सिर्फ अलग-अलग टॉपिक्स के बीच कनेक्टिविटी समझने की है. ट्रिगोनोमेट्री, कोऑर्डिनेट, कैलकुलस, अलजेब्रा और प्रोबेबिलिटी जैसे विषयों को एक साथ जोड़ने के इस प्रयोग पर उन्होंने करीब 17 साल तक काम किया. इसके बाद उन्होंने देश के 11 राज्यों में हजारों मैथमेटिक्स शो के जरिए बच्चों और शिक्षकों को गणित को आसान तरीके से समझाने का प्रयास किया.
अमित चौधरी की दूसरी किताब मैथमेटिको भी चर्चा में रही. उनके मुताबिक, इसका विमोचन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों हुआ. भारतीय डाक विभाग ने भी उनके काम को देखते हुए ‘माय स्टैम्प’ योजना के तहत उनके नाम पर दो डाक टिकट जारी किए.
About the AuthorRajneesh Kumar Yadav
Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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Bareilly,Uttar Pradesh
First Published :
September 10, 2026, 08:36 IST



