बहराइच में ड्रोन उड़ाकर भीष्म पितामह बचा रहे किसानों की फसल, खर्चा 400 रूपये प्रति एकड़, जाने पूरी प्रक्रिया

Last Updated:September 14, 2026, 16:35 IST
बहराइच जिले के किसान अब अपनी फसलों में पारंपरिक तरीकों के बजाय ड्रोन तकनीक से दवाओं का छिड़काव करा रहे हैं। इससे न केवल समय की भारी बचत हो रही है, बल्कि फसलों को होने वाले नुकसान और खेती की लागत में भी बड़ी कमी देखने को मिल रही है. किसान भाई इफको के माध्यम से खेतों में ड्रोन संचालित करा सकते है. ड्रोन ऑपरेटर भीष्म पितामह ने बताया कि ड्रोन से छिड़काव की दर महज़ ₹400 प्रति एकड़ है. जहां हाथ या पारंपरिक मशीनों से छिड़काव करने में काफी वक्त और मेहनत लगती थी, वहीं ड्रोन से 1 एकड़ खेत में छिड़काव मात्र 4 से 5 मिनट में पूरा हो जाता है.
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बहराइच: बदलते दौर के साथ कृषि क्षेत्र में आधुनिक और डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है. बहराइच जिले के किसान अब अपनी फसलों में पारंपरिक तरीकों के बजाय ड्रोन तकनीक से दवाओं का छिड़काव करा रहे हैं। इससे न केवल समय की भारी बचत हो रही है, बल्कि फसलों को होने वाले नुकसान और खेती की लागत में भी बड़ी कमी देखने को मिल रही है.
मात्र ₹400 प्रति एकड़ में छिड़काव, समय की भी भारी बचत
किसान भाई इफको के माध्यम से खेतों में ड्रोन संचालित करा सकते है. ड्रोन ऑपरेटर भीष्म पितामह ने बताया कि ड्रोन से छिड़काव की दर महज़ ₹400 प्रति एकड़ है. जहां हाथ या पारंपरिक मशीनों से छिड़काव करने में काफी वक्त और मेहनत लगती थी, वहीं ड्रोन से 1 एकड़ खेत में छिड़काव मात्र 4 से 5 मिनट में पूरा हो जाता है. पूरे घोल को तैयार करने और छिड़काव की प्रक्रिया में कुल 10 से 15 मिनट का ही समय लगता है.
फसलों और मिट्टी दोनों के लिए फायदेमंद
ड्रोन से छिड़काव के मुख्य फायदों पर बात करते हुए उन्होंने बताया, जब किसान हाथ से छिड़काव करने खेत में उतरते हैं तो पैरों से पौधे टूट जाते हैं. ड्रोन हवा में उड़कर काम करता है, जिससे पौधे पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं. ड्रोन के बेहद बारीक फुहारों की वजह से दवा सीधी और सटीक रूप से फसलों पर गिरती है. इससे दवा की खपत आधी रह जाती है. वर्तमान में धान की गर्भावस्था के दौरान फसलों को रोगमुक्त रखने के लिए नैनो यूरिया, पोटाश 0-50-30 और बोरॉन का छिड़काव किया जा रहा है. अत्यधिक यूरिया से फसलों के अत्यधिक हरे होने पर रोग लगने का खतरा रहता है, जिससे नैनो यूरिया का छिड़काव बचाव करता है. मिट्टी की गुणवत्ता, खेतों में पैदल न जाने से मिट्टी का दबना और खराब होना रुकता है.
तकनीकी क्षमता और बारिश में सावधानी
ड्रोन में 10 लीटर की टंकी लगी होती है, जो 1 एकड़ क्षेत्र के लिए पर्याप्त है। ड्रोन की एक बैटरी की चार्जिंग से लगभग 3 टंकी यानी 3 एकड़ खेत में छिड़काव किया जा सकता है. मौसम की स्थिति पर ऑपरेटर ने स्पष्ट किया कि वाटरप्रूफ मोटर होने के कारण हल्की बूँदाबाँदी में भी ड्रोन काम करता है, लेकिन भारी बारिश में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसी खाद के बहने की आशंका रहती है. इन खादों के बेहतर असर के लिए छिड़काव के बाद कम से कम 3 से 4 घंटे सूखा मौसम चाहिए होता है. अगर आप बहराइच जिले के नानपारा, महसी, कैसरगंज और गोंडा सीमा से सटे इलाकों के किसान इफको के किसी भी नजदीकी केंद्र से संपर्क करके अपने खेतों में ड्रोन छिड़काव के लिए आसानी से सेवा प्राप्त कर सकते हैं.
About the AuthorRajneesh Kumar Yadav
Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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Bahraich,Uttar Pradesh
First Published :
September 14, 2026, 16:35 IST



