भरतपुर के ठेई और बिरावई बने ‘भिंडी वाले गांव’: 2000 बीघा में खेती कर लाखों कमा रहे किसान, युवाओं की भी बढ़ी हिस्सेदारी

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भरतपुर के दो गांव बने ‘भिंडी वाले गांव’, खेती कर लाखों कमा रहे किसान
Last Updated:October 17, 2026, 14:41 IST
Bharatpur Bhindi Farming News: भरतपुर जिले के ठेई और बिरावई गांव अब ‘भिंडी वाले गांव’ के नाम से पहचाने जाने लगे हैं. करीब 20 साल पहले उत्तर प्रदेश के एक रिश्तेदार द्वारा शुरू की गई भिंडी की खेती आज 2000 बीघा से अधिक ज़मीन पर हो रही है. यहाँ के किसान भिंडी बेचकर लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. इस खेती में गांव के युवा भी रोजगार के रूप में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं. कम समय में बेहतर मुनाफे को देखकर आसपास के अन्य गांवों के किसान भी पारंपरिक खेती छोड़कर भिंडी की खेती अपना रहे हैं.
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भरतपुर के दो गांव बने ‘भिंडी वाले गांव’, 2000 बीघा में खेती कर लाखों कमा रहे किसान
भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर जिले में उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे दो गांव इन दिनों पूरे क्षेत्र में अपनी एक खास और अलग पहचान बना रहे हैं. कभी केवल पारंपरिक खेती के लिए पहचाने जाने वाले ठेई और बिरावई गांव की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है. इन गांवों के खेतों में जहाँ तक नज़र दौड़ाएं, वहाँ केवल भिंडी की लहलहाती फसल ही दिखाई देती है. आज इन दोनों गांवों में करीब 2000 बीघा से अधिक ज़मीन पर बड़े पैमाने पर भिंडी की व्यावसायिक खेती की जा रही है, जिससे यहाँ के किसान हर साल लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं.
इन गांवों में भिंडी की खेती की शुरुआत की कहानी बेहद दिलचस्प है. लगभग 20 साल पहले उत्तर प्रदेश से एक किसान अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ ठेई गांव आया था. उसने यहाँ पहली बार भिंडी और गेंदे के फूलों की खेती शुरू की. जब स्थानीय ग्रामीणों ने उसके खेत में शानदार फसल देखी, तो उन्होंने खेती की इस नई तकनीक और तरीके को समझने में गहरी रुचि दिखाई. उस किसान से प्रेरणा लेकर गांव के दो लोगों ने प्रयोग के तौर पर भिंडी बोई. पहली ही फसल में जब किसानों को उम्मीद से बेहतर मुनाफा मिला, तो देखते ही देखते यह प्रयोग पूरे गांव में फैल गया और आज भिंडी यहाँ की मुख्य फसल बन चुकी है.
युवाओं की सक्रिय भागीदारी और रोजगार का साधनखास बात यह है कि इस खेती में गांव के युवा भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. खेत की जुताई और तैयारी से लेकर फसल की नियमित देखभाल तथा भिंडी की समय पर तुड़ाई तक, युवा दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. युवाओं का मानना है कि भिंडी की खेती में पारंपरिक फसलों की तुलना में मेहनत जरूर अधिक है, लेकिन यदि बाज़ार में उचित भाव मिले, तो यह कम समय में आमदनी और स्वरोजगार का एक बेहतरीन जरिया साबित होती है.
‘भिंडी वाले गांव’ के नाम से मिली पहचान और आसपास प्रेरणाकरीब दो दशक पहले महज़ दो किसानों से शुरू हुआ यह सफर आज पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुका है. आसपास के इलाकों में ठेई और बिरावई गांव अब ‘भिंडी वाले गांव’ के नाम से मशहूर हो चुके हैं. यहाँ पैदा होने वाली ताज़ा भिंडी को राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आसपास के बड़े बाज़ारों में बेचा जाता है. इन गांवों की सफलता और बंपर मुनाफे को देखकर आसपास के अन्य गांवों के किसान भी अब भिंडी की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan
First Published :
October 17, 2026, 14:41 IST



