भीलवाड़ा के गुरला का अमरूद क्यों है इतना खास? L-49 की खेती से किसानों को मिल रहा बढ़िया मुनाफा

Last Updated:August 26, 2026, 06:57 IST
Bhilwara Guava Farming: भीलवाड़ा जिले का गुरला कस्बा अपने स्वादिष्ट अमरूदों की खेती के लिए खास पहचान बना रहा है. यहां की बलुई दोमट मिट्टी में 50 से 60 हेक्टेयर क्षेत्र में मुख्य रूप से L-49 किस्म के अमरूद उगाए जा रहे हैं. अमरूद की खेती से किसान प्रति हेक्टेयर 50 से 60 हजार रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं. स्थानीय बिक्री के अलावा यहां का अमरूद जयपुर, उदयपुर और दिल्ली की मंडियों तक भेजा जा रहा है.
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Bhilwara: भीलवाड़ा जिले का गुरला कस्बा इन दिनों अपने स्वादिष्ट और गुणवत्तापूर्ण अमरूदों की खेती के लिए विशेष पहचान बना चुका है. यहां के किसान पारंपरिक फसलों के स्थान पर अब अमरूद की बागवानी को प्राथमिकता दे रहे हैं. अनुकूल जलवायु और उपजाऊ मिट्टी के कारण गुरला में अमरूद की बंपर पैदावार हो रही है. खेतों में तैयार होने वाले यह अमरूद अपने अनूठे स्वाद के कारण बाजार में काफी पसंद किए जाते हैं. यही वजह है कि गुरला से अमरूद आसपास के जिलों के साथ-साथ पूरे राजस्थान और पड़ोसी राज्यों में भी सप्लाई किए जा रहे हैं.
भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान विशेषज्ञ डॉक्टर शंकर सिंह राठौड़ के अनुसार गुरला का अमरूद अपनी विशिष्ट गुणवत्ता के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है. गुरला की बलुई दोमट मिट्टी अमरूद के पौधों के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है. वर्तमान में गुरला कस्बे के लगभग 50 से 60 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अमरूद की खेती की जा रही है. किसान मुख्य रूप से अमरूद की प्रसिद्ध ‘L-49’ (लखनऊ-49/सरदार अमरूद) किस्म की बुवाई करते हैं, जिससे फल की गुणवत्ता और मिठास दोनों बेहतरीन रहती है.
प्रति हेक्टेयर 50 से 60 हजार रुपये तक की आमदनीअमरूद की खेती से किसानों को मिलने वाला मुनाफा बाजार की मांग और आपूर्ति की दरों पर निर्भर करता है. इसके बावजूद सामान्य तौर पर एक किसान प्रति हेक्टेयर 50,000 से 60,000 रुपये का शुद्ध लाभ आसानी से अर्जित कर लेता है. गुरला के छोटे और सीमांत किसान अपने उत्पाद को स्थानीय बाजारों में बेचना अधिक पसंद करते हैं, जबकि बड़े किसान अपने माल को जयपुर, उदयपुर और दिल्ली की बड़ी फल मंडियों में भेजकर बेहतर दाम हासिल कर रहे हैं.
क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को मिला संबलकम पानी और सामान्य रखरखाव में तैयार होने वाली यह फसल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. पारंपरिक फसलों की तुलना में अमरूद की खेती किसानों को स्थिर और अधिक आय प्रदान कर रही है, जिससे अन्य किसान भी बागवानी की ओर प्रेरित हो रहे हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan
First Published :
August 26, 2026, 06:57 IST



