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मदार औषधीय है लेकिन जहरीला भी, जानिए इसके इस्तेमाल में क्यों जरूरी है विशेषज्ञ की सलाह

Last Updated:August 30, 2026, 05:35 IST

गांवों में आसानी से मिलने वाला मदार यानी आक का पौधा आयुर्वेद में अपने पारंपरिक औषधीय उपयोग के लिए जाना जाता है. इसके पत्ते, फूल और जड़ का इस्तेमाल कई आयुर्वेदिक तैयारियों में किया जाता है. हालांकि मदार का दूधिया रस विषैला होता है, इसलिए इसके किसी भी हिस्से का प्रयोग विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए.

गोंडा. गांव-देहात में आसानी से मिलने वाला मदार (आक) का पौधा औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. यह पौधा खेतों की मेड़, बंजर जमीन और सड़कों के किनारे भी उग जाता है. आयुर्वेद में इसके पत्ते, फूल, जड़ और छाल का उपयोग कई पारंपरिक उपचारों में किया जाता है. हालांकि इसका दूधिया रस विषैला होता है, इसलिए इसका प्रयोग हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.

गांवों में आसानी से मिलता है मदार: मदार एक जंगली पौधा है, जिसे अलग-अलग क्षेत्रों में आक या अकौआ भी कहा जाता है. यह बिना ज्यादा देखभाल के भी उग जाता है और वर्षों तक जीवित रहता है. धार्मिक महत्व के साथ-साथ आयुर्वेद में भी इसकी खास पहचान है.

आयुर्वेद में क्यों माना जाता है खास?: लोकल 18 से बातचीत में वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि मदार के अलग-अलग भागों का उपयोग पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है. इसके पत्ते दर्द और सूजन में, फूल कुछ औषधीय योगों में और जड़ कई आयुर्वेदिक तैयारियों का हिस्सा मानी जाती है.

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जोड़ों के दर्द और सूजन में उपयोग: वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि आयुर्वेदिक परंपरा में मदार के पत्तों को हल्का गर्म करके प्रभावित स्थान पर बांधने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि इससे दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है. इसका प्रयोग केवल विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए.

त्वचा संबंधी समस्याओं में भी होता है प्रयोग: आयुर्वेद में मदार की छाल, पत्ते और अन्य भागों का उपयोग कुछ पारंपरिक उपचारों में त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता है. वैद्य बताते हैं कि इसका प्रयोग केवल सही विधि और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. मदार का दूधिया रस विषैला होता है, इसलिए इसे सीधे त्वचा पर लगाने से जलन, खुजली या एलर्जी हो सकती है. बिना चिकित्सकीय सलाह इसके उपयोग से बचना चाहिए.

पाचन और श्वसन संबंधी औषधियों में भूमिका: वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के अनुसार मदार की जड़ और फूल का उपयोग कई पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है. आयुर्वेद में इन्हें पाचन क्रिया को संतुलित करने और श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए तैयार की जाने वाली कुछ औषधियों में शामिल किया जाता है. हालांकि इसका सेवन स्वयं नहीं करना चाहिए, क्योंकि गलत मात्रा या गलत तरीके से उपयोग नुकसानदायक हो सकता है. हमेशा योग्य वैद्य की सलाह लेना जरूरी है.

मदार का दूधिया रस है विषैला: मदार का सबसे संवेदनशील हिस्सा इसका सफेद दूधिया रस है. यह आंखों या त्वचा के संपर्क में आने पर जलन और नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए इसे कभी भी बिना जानकारी के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

विशेषज्ञ की सलाह है जरूरी: वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति का कहना है कि मदार एक औषधीय पौधा जरूर है, लेकिन इसका गलत उपयोग नुकसानदायक हो सकता है. किसी भी बीमारी के इलाज के लिए इसका सेवन या प्रयोग करने से पहले योग्य वैद्य या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें.

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August 30, 2026, 05:35 IST

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