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अल्जाइमर के शुरुआती 7 संकेतों को करेंगे नजरअंदाज तो बुढ़ापे पर होगा डिमेंशिया का वार

Last Updated:September 21, 2026, 19:13 IST

7 Early Sign of Alzheimer: क्या आप भी चीजों को कहीं रखकर भूल जाते हैं. यदि ऐसा है तो अभी से आपको सतर्क होने की जरूरत है क्योंकि इससे आपको अल्जाइमर की बीमारी हो सकती है. वैसे तो यह बीमारी 50 साल के बाद ही होती है लेकिन आजकल 35-40 साल के युवाओं में भी इसके कुछ लक्षण देखे जा रहे हैं. यह बीमारी बेहद दुखदायी है, इसलिए शुरुआत से ही इसके प्रति अलर्ट रहना बहुत जरूरी है. यहां हम ऐसे 7 शुरुआती संकेतों के बारे में बता रहे हैं जो आगे चलकर अल्जाइमर का कारण बन सकते हैं.युवाओं में भी क्यों बढ़ने लगा है अल्जाइमर का खतरा, शुरुआती 7 संकेतों को जानें Zoomअल्जाइमर के शुरुआती संकेत.

7 Early sign of Alzheimer: अधिकांश लोग अल्जाइमर के बारे में नहीं जानते हैं. कुछ लोगों में इसके लक्षण शुरुआत से ही दिखने लगता है लेकिन इसके बारे में पता नहीं रहता. उदाहरण के लिए घर में कुछ चीजों को आप रखकर आसानी से भूल जाते हैं. आपको पता नहीं रहता कि इसे मैंने कहा रखा है. इसी तरह कुछ लोग ऐसे होते हैं कि जो बार-बार एक ही सवाल को पूछते रहते हैं. फिर जो बातचीत किसी के साथ होती है, उनमें अधिकांश बातों को वह भूल चुका होता है. वहीं किसी व्यक्ति को गहराई से सोचने की क्षमता कम हो जाती है. कुछ लोग डिप्रेशन में रहते हैं, कुछ लोगों का मूड स्विंग रहता है, कुछ लोगों में हमेशा भ्रम रहता है. ये सारे लक्षण अल्जाइमर की है लेकिन इसे लोग आम दिनचर्या समझ लेते हैं. पर बाद में जाकर यही अल्जाइमर और फिर डिमेंशिया के रूप में शरीर को ग्रहण लगाने लगता है. इसलिए अल्जाइमर क्या है और इसके लक्षणों को जानना जरूरी है.

क्या है अल्जाइमरअल्ज़ाइमर रोग को हम सामान्य भाषा में भूलने की बीमारी कह सकते हैं. मायो क्लीनिक के मुताबिक जब मस्तिष्क में एमाइलॉयड प्लाक और न्यूरोफाइब्रिलरी टेंगल्स के रूप कचरा जमा होने लगता है तब यह अल्जाइमर की बीमारी शुरू होती है. यह एक प्रकार का प्रोटीन है लेकिन यह प्रोटीन अच्छा नहीं है. यह धीरे-धीरे ब्रेन की कोशिकाएं नष्ट करने लगता है जिसकी वजह से दिमाग का आकार सिकुड़ जाता है. अल्ज़ाइमर का अब तक कोई सटीक इलाज नहीं है. जब अल्जाइमर बीमारी ज्यादा गंभीर होने लगती है तब दिमाग का फंक्शन कमजोर होने लगता है. इससे डिहाइड्रेशन, कुपोषण या इंफेक्शन जैसी जटिलताएं हो सकती हैं. आखिर में इससे मौत भी हो सकती है. हालांकि इतना भी निराश नहीं हुआ जा सकता है. दवाओं के ज़रिए इसके लक्षणों में सुधार किया जा सकता है और सोचने-समझने की क्षमता में कमी को धीमा किया जा सकता है. इसलिए शुरुआती दौर में इसे दिखाना बहुत जरूरी है ताकि समय पर हस्तक्षेप किया जा सके.

अल्जाइमर के लक्षण

कमजोर याददाश्त : भूलने की बीमारी या याददाश्त में कमी की समस्या कभी-भी किसी को हो सकती है लेकिन अगर यह लगातार जारी रहे तो समझना चाहिए कि यह अल्जाइमर की बीमारी है. इसमें धीरे-धीरे व्यक्ति के घर व काम करने की क्षमता को प्रभावित होती है. इस बीमारी से पीड़ित लोग अक्सर एक ही बात या सवाल को बार-बार दोहराते हैं, पुरानी बातचीत, अपॉइंटमेंट या कार्यक्रमों को भूल जाते हैं. चीजों को बिना किसी मतलब के अजीब जगहों पर रखकर खो देते हैं. इसके अलावा वे अपने जाने-पहचाने रास्तों में भटक जाते हैं, परिवार के सदस्यों के नाम और रोजमर्रा की चीजों को भूलने लगते हैं. यहां तक कि बातचीत के दौरान सही शब्द ढूंढने या अपनी बात व्यक्त करने में कठिनाई महसूस करते हैं.
सोचने-समझने में कठिनाई : अल्जाइमर रोग के कारण कंस्ट्रेशन बनाए रखने और सोचने-समझने में समस्या आती है. खासकर संख्याओं जैसी चीजों को समझने में. एक समय में एक से अधिक काम करना बेहद कठिन हो जाता है. पैसे को मैनेज करना, बैंक खातों का हिसाब रखना और समय पर बिलों का भुगतान करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है. धीरे-धीरे अल्जाइमर से पीड़ित लोग संख्याओं को पहचानना भी बंद कर देते हैं.
निर्णय लेने की क्षमता पर प्रभाव : जो लोग अल्जाइमर बीमारी के मरीज हैं, वे समझदारी भरे फैसले लेने और सही निर्णय करने की क्षमता को धीरे-धीरे खोने लगते हैं. इससे पीड़ित लोग समाज में आम चलन से दूर हो सकते हैं और मौसम के विपरीत कपड़े पहन सकते हैं. उनके लिए रोजमर्रा की समस्याओं को हल करना मुश्किल हो जाता है. उदाहरण के लिए, चूल्हे पर खाना जलने जैसी स्थिति से कैसे निपटना है या गाड़ी चलाते समय क्या फैसला लेना है, यह समझना उनके लिए कठिन हो जाता है.
पसंदीदा काम भी भूल जाते : अल्जाइमर से पीड़ित लोग नियमित गतिविधियों को पूरा करने में असफल होने लगते हैं. निश्चित क्रम में कोई बी काम पूरे नहीं कर पाते हैं. उन्हें यह भी नहीं पता रहता है कि उनका पसंदीदा खेल क्या है और खाना में उन्हें क्या पसंद है. जैसे-जैसे अल्जाइमर की बीमारी बढ़ती है, लोग कपड़े पहनने और नहाने जैसे बुनियादी काम भी भूल जाते हैं.
मूड स्विंग करना: जो लोग अल्जाइमर से पीड़ित होते हैं उनका मूड हमेशा स्विंग करते रहता है. इनके व्यवहार में भी परिवर्तन आने लगते हैं. इससे डिप्रेशन, किस चीज में रुचि कम होना, लोगों से दूरी बनाना, मूड में बार-बार बदलाव आना और दूसरों पर अविश्वास जैसे लक्षण दिखने लगते हैं.
गुस्सा और आक्रमकता: ऐसे लोग कभी-कभी बहुत ज्यादा गुस्सा करते हैं और आक्रामक भी हो जाते हैं. हालांकि अक्सर ऐसा नहीं होता है. ऐसे लोग कभी बहुत शांत भी हो जाते हैं और उन्हें किसी चीज से मतलब नहीं रहता. आप कुछ पूछेंगे भी तो उनका ध्यान आपकी तरफ नहीं रहेगा.
नींद के पैटर्न में बदलाव: जिन लोगों को अल्जाइमर है उनकी नींद के पैटर्न में भारी बदलाव आने लगता है. वे नियमित अंतराल से न तो सोते हैं न तो जागते हैं. कभी 3 बजे रात से ही जगे रहेंगे तो कभी पूरा दिन सोए रहेंगे. ऐसे लोगों में बिना वजह इधर-उधर भटकने की प्रवृत्ति दिख सकती है. वे सामाजिक संकोच या नियंत्रण से मुक्त हो जाते हैं. ऐसे लोग अक्सर भ्रम का शिकार भी हो सकते हैं, जैसे कि यह मान लेना कि उनकी कोई चीज चोरी हो गई है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता.

लक्षण दिखने पर क्या करेंशुरुआत में छोटे-छोटे लक्षण दिखते हैं. लेकिन इन्हीं छोटे-छोटे लक्षणों के बाद आपको सतर्क होने की जरूरत है. इसलिए अगर लगातार ऐसे लक्षण आपके साथ है तो तुरंत डॉक्टर से दिखाएं. शुरुआत में अल्जाइमर को नियंत्रित किया जा सकता है.

About the AuthorLakshmi Narayan

मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…

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September 21, 2026, 19:13 IST

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