मां बनने की प्लानिंग कर रही हैं तो पहले कराएं ये जांच, डॉक्टर ने बताया क्यों है जरूरी

फरीदाबाद: महिलाओं में होने वाली कई स्वास्थ्य समस्याओं के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. पीरियड्स में तेज दर्द, अनियमित ब्लीडिंग, बार-बार यूरिन इन्फेक्शन और लगातार थकान जैसी परेशानियां शरीर में किसी बीमारी का संकेत हो सकती हैं. कई बार कम उम्र में शुरू होने वाली बीमारियों का पता वर्षों बाद चलता है. ऐसे में समय रहते लक्षणों को पहचानना और जरूरी जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण है. महिलाओं की सेहत से जुड़े इन सवालों को लेकर Local18 ने फरीदाबाद के RG हॉस्पिटल की वुमन हेल्थ स्पेशलिस्ट और ऑब्स्टेट्रिशियन-गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. पलक दीवान से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान कैसे रख सकती हैं.
डॉ. पलक दीवान बताती हैं कि महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉएड्स और एडेनोमायोसिस जैसी समस्याएं कम उम्र में भी शुरू हो सकती हैं. इनके शुरुआती लक्षणों में पीरियड्स का अनियमित होना, अत्यधिक दर्द, संबंध बनाने के दौरान परेशानी और असामान्य ब्लीडिंग शामिल हैं. यदि दर्द के कारण रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाए या बिस्तर से उठना संभव न हो, तो इसे सामान्य पीरियड्स पेन समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
डॉ. पलक दीवान बताती हैं कि देश में लगभग 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं और कई को अपनी थकान की असली वजह का पता भी नहीं होता. गर्भावस्था में खून की कमी से कम वजन वाले बच्चे का जन्म, डिलीवरी के बाद अधिक ब्लीडिंग और शिशु तक पर्याप्त रक्त पहुंचने में परेशानी हो सकती है. वहीं, मां को भी कमजोरी रहती है. एनीमिया का असर अंडों के विकास पर पड़ता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं.
तनाव और नींद की कमी भी बनती है परेशानी
डॉ. पलक बताती हैं कि काम का दबाव, देर रात तक जागना और पर्याप्त नींद नहीं लेना महिलाओं के हार्मोन और अंडों के विकास को प्रभावित करता है. कॉर्पोरेट क्षेत्र में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली महिलाओं में भी यह समस्या देखने को मिलती है. हालांकि, हर बार अनियमित पीरियड्स का कारण PCOS या हार्मोनल असंतुलन नहीं होता.
गर्भधारण से पहले कराएं जरूरी जांच
डॉ. पलक बताती हैं कि गर्भावस्था की योजना बनाने से कम से कम तीन महीने पहले CBC, हीमोग्लोबिन, थैलेसीमिया, थायरॉयड, शुगर और रुबेला की जांच करानी चाहिए. इसके साथ रोजाना 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड लेने की सलाह दी जाती है. इससे बच्चे में दिमाग और रीढ़ की हड्डी से जुड़े न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का खतरा कम करने में मदद मिलती है. संतुलित खानपान और रोजाना व्यायाम भी जरूरी हैं.
बार-बार यूरिन इन्फेक्शन होने पर रहें सतर्क
डॉ. पलक बताती हैं कि बार-बार UTI होने के पीछे कम पानी पीना, डायबिटीज, किडनी या ब्लैडर में पथरी और मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन की कमी जैसे कारण हो सकते हैं. संबंध बनाने के बाद होने वाले संक्रमण को हनीमून सिस्टाइटिस कहा जाता है. साल में तीन या छह महीने में दो बार से अधिक संक्रमण होना रिकरंट UTI की श्रेणी में आता है. इससे बचने के लिए पर्याप्त पानी पीना, संबंध बनाने के बाद पेशाब करना और निजी अंगों की साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए. सफाई करते समय हमेशा आगे से पीछे की ओर पोंछना चाहिए. अधिक मीठा, तला-भुना खाना और जरूरत से ज्यादा कॉफी पीने से भी बचना चाहिए. सही समय पर जांच और उम्र के अनुसार उपचार से संक्रमण की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.



