मूंग की ये किस्म लगाएंगे तो होगी बंपर कमाई, कम समय में देगी शानदार पैदावार

Last Updated:September 12, 2026, 17:58 IST
मूंग की वेरायटी एमएच-1142 की खेती के साथ किसान इसका विकल्प हो सकता है. इससे किसान अच्छा और गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करके भी फायदा कमा सकते हैं. किसान खुद बीज तैयार कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं. जरूरत पड़ने पर दूसरे किसानों को भी अच्छा बीज उपलब्ध करा सकते हैं. इस किस्म से अच्छी पैदावार के लिए बीज की बुवाई से पहले उपचार करना, सही मात्रा में खाद और उर्वरक डालना, समय-समय पर पानी देना और फसल को कीट व रोगों से बचाना जरूरी है. इन बातों का ध्यान रखकर किसान एमएच-1142 से बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा हासिल कर सकते हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र भीलवाड़ा की ओर से सुवाणा पंचायत समिति के पोण्डरास गांव में मूंग फसल पर फील्ड डे आयोजित किया गया. कार्यक्रम में किसानों को मूंग की उन्नत किस्म एमएच-1142 के प्रदर्शन के माध्यम से बेहतर उत्पादन तकनीक और बीज उत्पादन के बारे में जानकारी दी गई. दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत गांव के 37 किसानों के खेतों में इस किस्म के प्रदर्शन किए गए. प्रत्येक किसान को 6 किलोग्राम बीज के साथ जैव उर्वरक एवं कीटनाशक उपलब्ध कराए गए.
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी. एम. यादव ने बताया कि एमएच-1142 किस्म की उत्पादन क्षमता बाकी किस्मों की तुलना में अधिक है. ये पकने में भी बहुत कम समय लेती है. कम समय में फसल तैयार होने से किसान अगली फसल की बुवाई समय पर कर सकते हैं. इस किस्म में पीला मोजेक वायरस जैसी बीमारी भी कम पाई गई है. इसलिए ये फसल की सुरक्षा और उत्पादन दोनों के लिहाज से यह किसानों के लिए लिए अच्छ विकल्प बन सकती है.
किसान खुद गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार कर सकेंगे. आसपास के अन्य किसानों को भी बेहतर किस्म का बीज उपलब्ध हो सकेगी. किसानों से खेती की लागत घटाने के साथ उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है. उन्होंने बीज उपचार, उन्नत किस्मों का चयन, खाद एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा फसल चक्र जैसी नीति अपनाने की अपील की हैं. कृषि विज्ञान केंद्र भी मूंग की इस किस्म के लिए एडवाइस दे रहा है.
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किसानों को प्राकृतिक खेती की उपयोगी तकनीकों की जानकारी भी दी गई. डॉ. यादव ने बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत एवं नीमास्त्र तैयार करने की विधि समझाते हुए इनके उपयोग के बारे में बताया. किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की बुवाई के लिए प्रेरित किया. इस बार एमएच-1142 के प्रदर्शन वाले खेतों में 16 से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मूंग प्रोडक्शन होने की संभावना है.
मूंग की किस्म एमएच-1142 किसानों के लिए कम समय में अच्छी पैदावार देने वाली किस्म मानी जाती है. इसके पकने का समय कम होने से किसान समय पर अगली फसल की बुवाई कर सकते हैं. बेहतर उत्पादन क्षमता के कारण यह किसानों की आय बढ़ाने में कारगर साबित हो सकती है.
एमएच-1142 की खेती के साथ गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है. किसान खुद से बीज तैयार कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं और दूसरे किसानों को भी उन्नत बीज उपलब्ध करा सकते हैं. बीजोपचार, संतुलित खाद-उर्वरक उपयोग, उचित जल प्रबंधन और समय पर कीट-रोग नियंत्रण जैसी तकनीकों को अपनाकर इस किस्म से बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है.
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September 12, 2026, 17:57 IST



