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Sushant Sinha Desh Ki Pathshala: ज्ञानेश कुमार तो बहाना, राहुल की पॉलिटिक्स को है निपटाना… क्या है केजरीवाल-अखिलेश का सीक्रेट प्लान?

ज्ञानेश कुमार का नाम आज सड़क पर है. धरना है, मार्च है, हंगामा है. कॉकरोच पार्टी नया मोर्चा खोले हुए है. केजरीवाल की टीम जंतर मंतर पर थी. कांग्रेस सफेद ड्रेस में थी. लेकिन सवाल ये है कि क्या ज्ञानेश कुमार बहाना हैं. निशाना चुनाव आयुक्त नहीं है. निशाना नरेंद्र मोदी की राजनीति को घेरकर राहुल गांधी की राजनीति बचाना है. कल गांधी जयंती पर यही खेल दिल्ली और मुंबई में खेला गया, लेकिन पुलिस ने बिना इजाजत का तमाशा नहीं चलने दिया और आज सुबह नया ऐलान आ गया.

कॉकरोच वालों ने घोषणा कर दी कि अगर इस्तीफा नहीं मिला तो 10 अक्टूबर को फिर जंतर मंतर पर प्रदर्शन करेंगे. यानी कल फेल हुए, आज तारीख आगे बढ़ा दी. उधर यूपी में अखिलेश यादव कांग्रेस को उसकी हैसियत याद दिला रहे हैं. कांग्रेस 150 सीटें मांग रही है. लेकिन समाजवादी पार्टी वाले कह रहे हैं 150 तो दूर, 50 सीट देना भी बड़ी बात है. मतलब सड़क पर इंडी वाले एकजुटता दिखा रहे हैं, लेकिन टेबल पर सीटों की लड़ाई दिख रही है.

इंडी वाले, कांग्रेस पार्टी, केजरीवाल, कॉकरोच पार्टी… कल ये लोग जंतर मंतर को तीन महीने पुराने फॉर्मूले पर दोहराना चाहते थे. इजाजत नहीं थी. नई दिल्ली में धारा 163 थी. दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार मैदान पर थे और जिस-जिस ने हल्ला मचाया, सबको बस में भरा गया.

उधर लेफ्ट छात्र संगठन से जुड़े लोग भी जंतर मंतर पर जाने की कोशिश करने लगे. पिछली बार लेफ्ट के छात्र संगठनों ने ही जंतर मंतर पर पूरा माहौल बनाया था, लेकिन इस बार जब लेफ्ट छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने हल्ला काटने की कोशिश की तो पुलिस ने उनके प्लान को सफल नहीं होने दिया. जिसने भी जंतर मंतर पहुंचकर वहां प्रदर्शन की जिद की, पुलिस ने उसे टांगकर बस में भर दिया और रवाना कर दिया है. छात्र नेता नेहा बोरा ने जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस से भिड़ने की कोशिश तो कि लेकिन दिल्ली पुलिस ने किसी को बवाल काटने नहीं दिया है.

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर में हुए प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने 3-3 FIR दर्ज की है. दो FIR दिल्ली के सांसद मार्ग थाने में दर्ज की गई है, जबकि दूसरी एक FIR क्नॉट प्लेस थाने में दर्ज हुई है.

दिल्ली में इंडी वाले टांगे गए तो शिवाजी पार्क में घबराहट में भाषण दिखी. मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन शुरू हुआ. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अभिजीत दीपके ने डीसीपी की तुलना जनरल डायर से कर दी. मंच ज्ञानेश के इस्तीफे का था, लेकिन दीपके प्रधानमंत्री पर घटिया-घटिया बातें कर रहे थे.

यानी देखिए दिल्ली की तरह मुंबई पुलिस ने भी मार्च की इजाजत नहीं दी थी, लेकिन फिर भी प्रदर्शन हुए. यानी जब दिल्ली में कॉकचोच वालों का पैंतरा नहीं चला तो वो मुंबई पहुंच गए. लेकिन अब शिवाजी पार्क के प्रदर्शन पर एक और सवाल खड़ा हो गया है. इस सबके बीच सवाल नाबालिग बच्चों को लेकर है.

आरोप है कि एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाया गया और भड़काऊ नारे लगे. ये भी आरोप है कि बच्चों को प्रदर्शन में लाने की बात पहले से ग्रुप चैट में हुई थी, ताकि नाबालिग को पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए ढाल बनाया जाए. शिकायत सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद ने दाखिल की थी. शिकायत में सोशल मीडिया के फोटो और वीडियो का हवाला दिया गया.

जिसपर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया. संज्ञान मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत लिया गया है. मामले की सुनवाई NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने की.

अब आयोग ने मुंबई पुलिस कमिश्नर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सोशल मीडिया एक्स के शिकायत अधिकारी और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस दिया है. संबंधित एजेंसियों से 7 दिन में एक्शन रिपोर्ट मांगी गई है. उधर बिना अनुमति आंदोलन करने के मामले में मुंबई पुलिस ने CJP वालों के खिलाफ FIR दर्ज की है.

कल फेल होने के बाद आज तारीख आगे बढ़ गई है. कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने रात ऐलान किया. ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते तो देश भर से लोग 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पहुंचेंगे. उन्होंने इसे जंतर मंतर 2.0 और चलो दिल्ली कहा… भाषा भले ही शांति की है, लेकिन तारीख दबाव की है. कल इजाजत नहीं मिली थी. आज नई इजाजत मांगे बिना अगली तारीख चस्पां कर दी गई.

उधर नेहा बोरा ने शनिवार दोपहर एक बजे जंतर मंतर पर फिर जुटने को कहा है. यानी हिरासत के अगले दिन भी वही जगह चुनी जबकि पुलिस कल कह चुकी है थी. धारा 163 लगी है और आज भी इजाजत का सवाल वही रहेगा और इसके बीच बीच चुनाव आयोग का एक फैसला भी है.

जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां विशेष अभियान का आदेश है. जिनका नाम सूची से बाहर हुआ वे फॉर्म 6 भर सकते हैंय पहली बार वोट डालने वाले युवा जुड़ेंगे। BLO हफ्ते में 20 से 25 घर जाएंगे….एक महीने का टारगेट.

चुनाव आयोग कह रहा है कि नाम जोड़ने का दरवाजा खुला हुआ है, लेकिन इंडी और कॉकरोज वाले सड़क पर नाम काटे जाने को लेकर बवाल कर रहे हैं. सड़क पर विपक्षी नेता एक मंच पर हैं, लेकिन वोटों के लेकर इनके बीच ही दरार है. कांग्रेस कह रही है कि गठबंधन में कांग्रेस 50 प्रतिशत की हकदार है. 150 से कम सीट पर नहीं लड़ेंगे, लेकिन समाजवादी पार्टी इन्हें 50 सीट के लायक भी नहीं समझती है. यूपी में विधानसभा की 403 सीट है और खबर है कि अखिलेश यादव ने एक बैठक में 350 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है.

2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 37 सीटों पर जीती थी, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें. और अब अखिलेश यादव ने कांग्रेस को उसकी हैसियत याद दिला दी है. और असली खेल यही है. ज्ञानेश कुमार पर सड़क इसलिए गरम है क्योंकि राहुल गांधी को एक मुद्दा चाहिए. लेकिन यूपी के चुनाव में अखिलेश यादव ने उन्हें आइना दिखा दिया है. पीएम मोदी के नाम पर इंडी वाले सड़क पर जितना ड्रामा करें, सीटों पर बिखरी हुई है.

अब तीनों तस्वीरों को एक साथ जोड़िए. जंतर-मंतर पर बिना इजाजत के कॉकरोज और केजरीवाल वालों ने तमाशा करने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली पुलिस ने सबको भगा दिया. दबाव बढ़ाने के लिए कॉकरोज वालों ने तामाश की तारीफ 10 अक्टबूर तक बढ़ा दी. मुंबई में कॉकरोच वाले तो ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने पहुंचे थे, लेकिन प्रधानमंत्री पर बरस गए. लेकिन असली खेल तो यूपी में चल रहा है, जहां समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को उसकी औकात याद दिला दी है.

और अब देखिए इन तीनों खबरों के सेंटर में कहीं भी ज्ञानेश कुमार नहीं है. ज्ञानेश कुमार के नाम पर कॉकरोच और इंडी वाले प्रधानमंत्री मोदी को घेरने में लगे हैं. तमाशे की अगली तारीख 10 अक्टूबर को तय हुई है, लेकिन अक्टूबर में यूपी की बैठक बताएगी कि इन ड्रामे के सहारे इंडी वाले लोगों को जोड़ पाते हैं कि खुद ही बिखर जाएंगे.

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