राजस्थान में नया रेल कॉरिडोर, रेवाड़ी-जयपुर के बीच 191 KM लाइन, डीपीआर-सर्वे को मिली मंजूरी

जयपुर. राजस्थान में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और औद्योगिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी परियोजना आगे बढ़ी है. हरियाणा के रेवाड़ी से राजस्थान के नीमराणा, बहरोड़ और कोटपूतली होते हुए जयपुर तक 191 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने की तैयारी है. रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना की डीपीआर और फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दे दी है. इससे दिल्ली-जयपुर रेल मार्ग को एक नया वैकल्पिक कॉरिडोर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
यह परियोजना राजस्थान के परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने के साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों, व्यापारिक गतिविधियों और यात्री आवागमन को नई गति दे सकती है. जयपुर ग्रामीण से भाजपा सांसद राव राजेंद्र सिंह ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर इस परियोजना की प्रगति पर चर्चा की है. हालांकि, फिलहाल डीपीआर और सर्वे को मंजूरी मिली है. नई रेल लाइन के निर्माण की अंतिम स्वीकृति, बजट और काम शुरू होने की समयसीमा को लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.
रेवाड़ी से जयपुर तक बनेगा नया रेल कॉरिडोर
प्रस्तावित रेल लाइन हरियाणा के रेवाड़ी जंक्शन से शुरू होकर राजस्थान के शाहजहांपुर, नीमराणा, बहरोड़, कोटपूतली, पावटा-प्रागपुरा और शाहपुरा होते हुए जयपुर तक पहुंचेगी. करीब 191 किलोमीटर लंबा यह रेल मार्ग उन क्षेत्रों को सीधे रेलवे नेटवर्क से जोड़ने में मदद करेगा, जहां अभी सीधी रेल कनेक्टिविटी सीमित है. वर्तमान में दिल्ली और जयपुर के बीच रेल यातायात का बड़ा हिस्सा अलवर-बांदीकुई मार्ग से गुजरता है. इस रूट पर ट्रेनों का दबाव अधिक होने के कारण यातायात संचालन प्रभावित होता है. नया कॉरिडोर बनने से ट्रेनों के संचालन के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा और मौजूदा रेल लाइन पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.
दिल्ली-जयपुर सफर में 1 से 1.5 घंटे तक बच सकता है समय
नई रेल लाइन का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली, गुरुग्राम, रेवाड़ी और जयपुर के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को मिलने की उम्मीद है. प्रस्तावित सीधे मार्ग से दिल्ली-जयपुर के बीच यात्रा समय में करीब 1 से 1.5 घंटे की बचत होने का दावा किया जा रहा है. हालांकि, वास्तविक समय की बचत रेल लाइन के निर्माण, ट्रेनों की गति, ठहराव और संचालन योजना तय होने के बाद स्पष्ट होगी. इस कॉरिडोर से राजधानी और तेजस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों को भी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकता है. इससे दिल्ली से जयपुर और आगे अहमदाबाद तथा मुंबई की दिशा में जाने वाली ट्रेनों के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है.
नीमराणा और कोटपूतली के उद्योगों को मिलेगा फायदा
यह परियोजना केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं है. राजस्थान के औद्योगिक विकास के लिहाज से भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नीमराणा दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, जहां जापानी और अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियां काम कर रही हैं. सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने से माल परिवहन के विकल्प बढ़ सकते हैं और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है. कोटपूतली क्षेत्र के सीमेंट उद्योग और आसपास के औद्योगिक केंद्रों को भी रेल नेटवर्क से जुड़ने का लाभ मिलने की उम्मीद है. कच्चे माल और तैयार उत्पादों की ढुलाई के लिए रेल परिवहन का विकल्प मिलने से सड़क मार्ग पर निर्भरता कम हो सकती है. इससे राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है.
कितनी होगी परियोजना की लागत?
191 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन की कुल लागत अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है. रेलवे बोर्ड ने फिलहाल डीपीआर और फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दी है. परियोजना की विस्तृत लागत का आकलन डीपीआर में किया जाएगा. रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना के फाइनल लोकेशन सर्वे और डीपीआर तैयार करने के लिए 5.73 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है. डीपीआर पूरी होने और परियोजना को निर्माण की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद बजट और समयसीमा स्पष्ट हो सकेगी.
जयपुर ग्रामीण के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मिलेगी मजबूती
नई रेल लाइन के साथ जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के अन्य रेलवे स्टेशनों और यात्री सुविधाओं के विकास पर भी चर्चा हुई है. किशनगढ़-रेनवाल स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित करने, बधाल स्टेशन के पुनर्विकास और नरैना तथा सांभरलेक स्टेशनों पर प्रमुख ट्रेनों के ठहराव जैसे प्रस्ताव भी सामने आए हैं. रेवाड़ी-जयपुर रेल कॉरिडोर राजस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना बन सकता है. इससे दिल्ली-जयपुर रेल कनेक्टिविटी को नया विकल्प मिलेगा, औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी और जयपुर ग्रामीण सहित आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है.



