राजस्थान के 13 जिलों की 53 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित, किसानों को कितना मुआवजा मिलेगा और क्लेम के लिए क्या करना होगा?

पाली. राजस्थान में इस बार मानसून की बेरुखी और भूजल स्तर में भारी गिरावट को देखते हुए भजनलाल सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने प्रदेश के 13 जिलों की 53 तहसीलों को गंभीर और मध्यम सूखाग्रस्त (डॉट अफेक्टेड) घोषित किया है. इसमें पाली जिले की सुमेरपुर और सिरोही जिले की शिवगंज जैसी प्रमुख तहसीलों को ‘गंभीर सूखाग्रस्त’ श्रेणी में रखा गया है.
इस घोषणा से आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग तथा राजस्थान सरकार की किसान कल्याण योजनाओं के तहत प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता, फसल बीमा क्लेम और कृषि आदान-अनुदान मिलने का रास्ता साफ हो गया है. इस घोषणा के बाद से ग्रामीण इलाकों में खेती और पशुपालन पर निर्भर परिवारों के लिए एक नई उम्मीद जगी है, लेकिन साथ ही किसानों के मन में सवाल भी है कि आखिर उन्हें इसका लाभ कैसे मिलेगा और उन्हें आगे क्या करना होगा?
मानसून में 25 से 30% तक की गिरावट: फसलों पर भारी असरकेंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI) की ऑब्जर्वेटरी रिकॉर्ड्स के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान और जोधपुर-पाली क्षेत्र में इस मानसून सीजन में मात्र 258 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि यहाँ का दीर्घकालिक औसत लगभग 350 से 400 मिमी रहता है. इस तरह बारिश में करीब 25% से 30% की बड़ी कमी दर्ज की गई है.अगस्त के शुरुआती दौर के बाद पूरा महीना सूखा बीतने के कारण मिट्टी की नमी घट गई और खरीफ फसलों (मूंग, बाजरा, ग्वार आदि) को व्यापक नुकसान हुआ. इसके बाद जलाशयों और भूजल स्तर के घटने से स्थितियां हाइड्रोलॉजिकल सूखे में बदल गईं.
सरकार से क्या-क्या मिलेगी सरकारी राहत?सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद राज्य सरकार और आपदा राहत कोष (SDRF) के तहत किसानों को राहत प्रदान किया जाता है.
कृषि आदान-अनुदान: 33% या उससे अधिक फसल नुकसान पर किसानों को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सीधा मुआवजा डीबीटी (DBT) के माध्यम से बैंक खाते में दिया जाता है.
फसल बीमा क्लेम : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ‘मिड-सीजन एडवर्सिटी’ (मध्य-सत्र प्रतिकूलता) और ‘लोकल कैलामिटी’ के प्रावधानों के तहत बीमा कंपनियों से दावा राशि स्वीकृत कराई जाती है.
लगान व ऋण स्थगन/पुनर्गठन: सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भू-राजस्व (लगान) वसूली स्थगित कर दी जाती है तथा अल्पकालिक कृषि ऋणों को मध्यकालिक ऋणों में बदला (Re-structure) जाता है.
पशुधन संरक्षण व चारा डिपो: पशुपालकों के लिए रियायती दरों पर चारा डिपो और पेयजल परिवहन की व्यवस्था की जाती है.
किसान आगे क्या करें? पूरा क्लेम एवं राहत प्रोसेस
स्टेप 1: गिरदावरी रिपोर्ट पर नजर रखेंराजस्व विभाग (पटवारी एवं तहसीलदार) द्वारा खेतों का मौका मुआयना करके ‘विशेष गिरदावरी’ की जाती है. किसान अपने क्षेत्र के पटवारी से संपर्क कर यह सुनिश्चित करें कि उनकी फसल खराबे का सही आकलन गिरदावरी रिपोर्ट में दर्ज हो चुका है.
स्टेप 2: फसल बीमा कंपनी-पोर्टल पर सूचना दर्ज कराएं (यदि बीमा कराया है)जिन किसानों ने खरीफ फसल का बीमा कराया था, वे फसल कटाई/नुकसान के 72 घंटे के भीतर ‘Crop Insurance App’ या टोल-फ्री नंबर पर अथवा अपनी बैंक शाखा/कृषि अधिकारी को लिखित सूचना दें.सूखाग्रस्त घोषणा के आधार पर बीमा कंपनी राजस्व विभाग के ‘क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट्स’ (CCE) और गिरदावरी डेटा के आधार पर क्लेम राशि तय करती है.
स्टेप 3: जन-आधार और बैंक खाता अपडेट रखेंराजस्थान सरकार की वित्तीय सहायता का भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में होता है. सुनिश्चित करें कि आपका जन-आधार कार्ड चालू हो और उससे जुड़ा बैंक खाता एक्टिव तथा आधार से लिंक (dbt enable) हो.
स्टेप 4: ई-मित्र के माध्यम से आवेदन-सत्यापनराहत कोष (SDRF) के तहत मुआवजे के लिए जिला प्रशासन द्वारा पोर्टल खोलने पर किसान अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर अपने भूमि विवरण (खाता-खसरा संख्या) और गिरदावरी के आधार पर पंजीकरण/सत्यापन करवाएं.
आगामी रबी सीजन के लिए कंटिजेंसी प्लान और सलाहबारिश और जल संसाधनों की कमी को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने रबी सीजन के लिए आकस्मिक योजना अपनाने की सलाह दी है.
कम पानी वाली फसलों का चयन: अधिक पानी की खपत वाली फसलों जैसे गेहूं (जिसमें 5-6 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है) या मूंगफली के स्थान पर चना, सरसो, तारामीरा या जौ जैसी कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की बुवाई करें.
उन्नत व शुष्क-सहनशील किस्में: कम अवधि में पकने वाली तथा सूखा-सहनशील किस्मों के बीजों का प्रयोग करें.
सिंचाई तकनीक: यदि पानी उपलब्ध है, तो फव्वारा या ड्रिप प्रणाली का ही प्रयोग करें ताकि पानी और नमी की बचत हो सके.



