राजस्थान में क्यों हो रही है साधु संतों की हत्याएं और संदिग्ध हालात में मौत, क्या है इस दर्द का मर्ज?

जयपुर. कोटा के चन्द्रसेल मठ के महंत देवानंद महाराज की क्रूरतापूर्वक की गई हत्या के तीन महीने के बाद अब राजस्थान में एक और संत की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है. झुंझुनूं के लोहार्गल धाम स्थित बरखंडी बाबा मंदिर के संत सूरजदास महाराज का शव पहाड़ी की खाई में झाड़ियों में फंसा मिला है. राजस्थान में इससे पहले कई साधु संतों को मंदिर की जमीन और अन्य प्रोपर्टी के विवाद में बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया. वहीं कई साधु संतों संदिग्ध हालात में हो मौत हो चुकी है. उनकी मौत के राज आज तक सामने नहीं आ पाए हैं.
हालांकि संत सूरजदास महाराज की मौत के बाद अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह हत्या है या हादसा. लेकिन सूरजदास महाराज जिस मंदिर में बीते 32 बरसों से रहकर पूजा पाठ करते थे वहां लूटपाट करने जैसे हालात मिले हैं. मंदिर के हालात और सूरजदास महाराज का शव जिन परिस्थितियों में मिला है उससे संत समाज में भारी आक्रोश है. संतों ने आज लोहार्गल बंद का आह्वान कर रखा है. हालात को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है.
लोहार्गल राजस्थान का बेहद अहम तीर्थ स्थल है
लोहार्गल राजस्थान का प्रमुख तीर्थ स्थल है. झुंझुनूं जिले में स्थित लोहार्गल में लोग अपने परिजनों की मौत के बाद अस्थि विसर्जन के लिए आते हैं. इस इलाके में प्रसिद्ध 24 कोसीय परिक्रमा होती है. यह परिक्रमा भादवा माह में होती है. यह परिक्रमा लोहार्गल से शुरू होती है. बाद में शांकभरी माता होते हुए वापस यहीं पर आकर खत्म होती है. उसके बाद अमावस्या पर यहां लोग स्नान करते हैं. इस परिक्रमा में प्रदेशभर के श्रद्धालु आते हैं. इस परिक्रमा के रास्ते में कई छोटे-बड़े मंदिर और धार्मिक आस्था वाले धाम हैं. 24 कोसीय परिक्रमा में तीन चार बड़े पड़ाव आते हैं. संत सूरजदास महाराज भी इसी इलाके में पहाड़ी पर स्थित बरखंडी बाबा मंदिर में रहते थे.
26 सितंबर को गायब हुए और दो दिन बाद मिला शववे बीते 32 साल से इस मंदिर में रहकर पूजा पाठ कर रहे थे. लेकिन वे अचानक 26 सितंबर को गायब हो गए. ग्रामीणों को जब इसका पता चला तो वे उनको ढूंढने निकले. दो दिन 28 सितंबर को महाराज की पार्थिव देह मिली. वह भी पहाड़ी की 300-400 फीट गहरी खाई में झाड़ियों में फंसी हुई. महाराज की मौत से ग्रामीणों और उनके अनुयायियों को काफी गहरा धक्का लगा. वहीं संत समाज को भी जब इसकी सूचना मिली तो वे सन्न रह गए. बाद में संतों का लोहार्गल में जमावड़ा हो गया. अब उन्होंने पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की मांग की है.
मंदिर की जमीन संतों के नाम नहीं होती है लेकिन वे उसके संरक्षक होते हैं
दरअसल राजस्थान में हजारों मंदिरों की जमीन और अन्य प्रोपर्टी पर कई लोगों की नजरें रहती है. कई मामलों की जड़ में मंदिर की संपत्ति बड़ा कारण सामने आया है. इसके चलते जब-जब ऐसी वारदातें हुई हैं पुलिस की जांच की धुरी मंदिरों की प्रोपर्टी को लेकर उस पर ही जाकर टिकी है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण इसी साल कोटा जिले में हुआ महंत देवानंद महाराज का मर्डर केस है. वहीं पहले भी कई मंदिरों की प्रोपर्टी को लेकर साधु संतों पर हमले हुए हैं. हालांकि वह जमीन या प्रोपर्टी उनके नाम नहीं होती है लेकिन वे उसके संरक्षक होते हैं.
कोटा के चन्द्रसेल महाराज की हत्या से हिल उठा था पूरा राजस्थानराजस्थान के कोटा शहर में स्थित 1100 साल पुराने चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की जून 2026 में मठ की प्रोपर्टी को लेकर की हत्या कर गई थी. इस मामले में पुलिस की ओर से कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में इस बात को साफ बताया गया है कि महंत की हत्या साजिशपूर्वक मठ की प्रोपर्टी हड़पने के लिए की गई थी. महंत देवानंद की हत्या के पीछे मठ की करोड़ों रुपये की जमीन और बैंक बैलेंस मुख्य कारण था.
टोंक में सियाराम बाबा की हत्या ने झकझोर दिया था
इससे पहले अगस्त 2023 में टोंक जिले के डिग्गी में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी. वहां भूरिया महादेव मंदिर आश्रम के संत सियाराम दास बाबा की बेरहमी से हत्या कर दी गई. सियाराम दाम बाबा का शव खून से लथपथ उनके आश्रम परिसर में पड़ा मिला. उसके बाद वहां भी आश्रम से जुड़े लोग और भक्त भी आक्रोशित हो गए थे. आक्रोशित लोगों ने डिग्गी कस्बे को बंद भी रखा था. बाबा सियाराम दास भी करीब 50 साल से आश्रम में अकेले ही रहते थे.
कुचामन में भी की गई थी एक संत की हत्या
टोंक की वारदात से करीब 15 दिन पहले अगस्त 2023 में ही नागौर से सटे डीडवाना कुचामन जिले के रसाल गांव में भी एक संत को क्रूरतापूर्वक मौत के घाट उतार दिया गया. वहां हत्यारों ने हरिराम बाबा की बगीची के संत (महाराज) मोहनदास की बेरहमी से हत्या कर दी थी. उनको हाथ पांव बांधकर मारा गया था. पुलिस को जब उनकी लाश मिली तो उनके हाथ पांव बंधे हुए और आंखों पर भी पट्टी बांधी हुई थी. इससे वारदात से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था.
राजसमंद पुजारी मर्डर केस से दहल गया था इलाका
राजस्थान का मेवाड़ इलाका भी इस तरह की वारदातों से अछूता नहीं रहा था. मेवाड़ इलाके के राजसमंद जिले में नवंबर 2022 में इसी तरह की दिल को दहला देने वाली वारदात सामने आई थी. वहां भी मंदिर की जमीन के विवाद में पुजारी दंपति को उसके बेटे की आंखों के सामने जिंदा जला दिया गया था. यह वारदात देवगढ़ कस्बे के समीप हीरा की बस्सी गांव में हुई थी. इस वारदात में आरोपियों ने पुजारी नवरत्न प्रजापत और उसकी पत्नी को पेट्रोल बम से जला दिया था. इससे दोनों बुरी तरह से झुलस गए. वारदात के 6 बाद पुजारी की मौत हो गई थी.
भरतपुर, धौलपुर और जालोर में भी सामने आ चुके हैं ऐसे केसेज
बीते बरसों में इन बड़े केसेज के अलावा भरतपुर जिले में जुलाई 2023 में संत विजय दास ने अवैध खनन के विरोध में आत्मदाह कर लिया था. इसी तरह की घटना इससे एक साल पहले 2022 में जालोर जिले के जसवंतपुरा में सामने आई थी. वहां सुंधामाता तलहटी के पास स्थित गौरक्ष आदेश श्री बालाजी हनुमान मंदिर आश्रम के संत रविनाथ ने आत्महत्या कर ली थी. बताया जा रहा है कि वहां भी जमीन का विवाद चल रहा था. उसके बाद पूरे इलाके में उबाल आ गया था. वहीं पूर्वी राजस्थान के भरतपुर और धौलपुर में साधुओं के कथित सुसाइड के मामले सामने आ चुके हैं.



