शादी की खरीदारी कर लौटा था युवराज, आखिरी बार चेहरा भी न देख पाए परिजन, पुलिस पर उठे 6 बड़े सवाल

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दूल्हा बनने वाला था युवराज, पुलिस ने बिना बताए कर दिया अंतिम संस्कार, उठे 6 सव
Last Updated:September 17, 2026, 23:20 IST
शादी से ठीक एक महीने पहले लापता हुए 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है. 6 सितंबर को शादी की शेरवानी खरीदकर क्लाइंट मीटिंग के लिए निकले युवराज का शव 10 सितंबर को बरामद हुआ, लेकिन परिजनों का आरोप है कि गुरुग्राम पुलिस ने बिना सूचना दिए और नियमों की अनदेखी कर 14 सितंबर को उसका अंतिम संस्कार कर दिया. परिवार आखिरी बार बेटे का चेहरा भी नहीं देख पाया. अब बेबस परिजनों ने पुलिस की लापरवाही, जिपनेट पर देरी से एंट्री और सबूत मिटाने को लेकर 6 गंभीर सवाल उठाए हैं.युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के बाद बिना परिजनों को सूचित किए अंतिम संस्कार करने पर गुरुग्राम पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. (एआई इमेज)
नई दिल्ली. घर में जिस बेटे की शादी की शहनाइयां गूंजने वाली थीं, जिसके सिर पर सेहरा सजने की तैयारियां चल रही थीं, आज उसी घर में सिर्फ सन्नाटा, चीत्कार और बेबसी का मंजर है. लगभग 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की गोली मारकर हत्या कर दी गई. विडंबना यह कि जिस मां-बाप ने बेटे को दूल्हा बनाने का ख्वाब देखा था, वे आखिरी बार उसका चेहरा तक नहीं देख पाए. आरोप है कि गुरुग्राम पुलिस ने कानूनी प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर आनन-फानन में युवराज का अंतिम संस्कार कर दिया. इस दिल दहला देने वाले मामले ने न केवल एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि खाकी की कार्यप्रणाली और संवेदनहीनता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
शेरवानी खरीदकर लौटा था, एक महीने बाद होनी थी शादीपरिजनों की तरफ से जारी बयान में बताया गया है कि रविवार 6 सितंबर को युवराज अपनी शादी के लिए शेरवानी की खरीदारी करके घर लौटा था. घर में खुशियों का माहौल था. उसी दिन दोपहर में उसने बताया कि उसकी अनन्या उसे अपनी कार से पिक करने आ रही है और वह एक मीटिंग के सिलसिले में निकल रहा है. युवराज ने अपने ऑफिस और मंगेतर को भी आखिरी कॉल्स में यही जानकारी दी थी. शाम करीब 7:30 बजे परिजनों की उससे आखिरी बार बात हुई. इसके बाद उसका फोन बंद आने लगा. बीच-बीच में फोन कुछ समय के लिए चालू होता और परिजनों-दोस्तों को वॉट्सऐप मैसेज आते कि वह जल्द लौटेगा और कॉल करेगा. परिजनों ने सोचा कि वह काम में व्यस्त होगा, लेकिन मंगलवार 8 सितंबर के बाद फोन पूरी तरह बंद हो गया.
गुमशुदगी, मर्डर और पुलिस की लापरवाही की दास्तानजब कई दिनों तक संपर्क नहीं हुआ, तो 11 सितंबर को परिजनों ने नई दिल्ली के लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने 13 सितंबर को जांच शुरू की. 16 सितंबर को परिजनों के पैरों तले जमीन तब खिसक गई, जब उन्हें बताया गया कि युवराज की तो 6 सितंबर को ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में एक महिला और उसके पति को हिरासत में लेने की बात सामने आई है. परिवार को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब यह खुलासा हुआ कि गुरुग्राम पुलिस को युवराज का शव 10 सितंबर को ही मिल चुका था. यानी परिजनों की गुमशुदगी दर्ज कराने से भी एक दिन पहले.
लाजपत नगर से लापता युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में पुलिस ने अन्या वत्स और संयम सचदेवा को अरेस्ट किया है.
न जिपनेट पर फोटो, न शिनाख्त की कोशिश, किया अंतिम संस्कारअंतरराज्यीय स्तर पर अज्ञात शवों और लापता लोगों के मिलान के लिए ‘जिपनेट’ (ZIPNET) पोर्टल बनाया गया है. परिजनों का आरोप है कि गुरुग्राम पुलिस ने 10 सितंबर को शव मिलने के बाद न तो उसकी तस्वीरें जिपनेट पर अपलोड कीं और न ही परिजनों का पता लगाने की कोई कोशिश की. 14 सितंबर को पुलिस ने जल्दबाजी में शव का अंतिम संस्कार कर दिया. हैरानी की बात यह है कि जब 16 सितंबर को परिजनों ने इस पर कड़ा विरोध जताया, तब जाकर शव के मिलने के 6 दिन बाद और अंतिम संस्कार के दो दिन बाद जिपनेट पर एंट्री की गई. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है कि वे अपने बेटे की अंतिम विदाई तक में शामिल नहीं हो सके.
परिवार का एकमात्र सहारा था युवराज, थाने में 7 घंटे तक झेला अपमानयुवराज अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था. उसके पीछे लकवाग्रस्त पिता, दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही मां और दो बहनें रह गई हैं. परिजनों का आरोप है कि जब वे बादशाहपुर थाना (गुरुग्राम) पहुंचे, तो वहां के एसएचओ और आईओ ने उनके साथ बेहद असंवेदनशील और अभद्र व्यवहार किया. उन्हें बिना किसी वजह के 7 घंटे तक थाने में बैठाए रखा गया और पुलिस अधिकारियों के पास अपनी गंभीर लापरवाही का कोई जवाब नहीं था. परिवार ने अधिकारियों के कथित व्यवहार की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक करने की बात कही है.
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पुलिस और सिस्टम से पीड़ित परिवार के 6 तीखे सवाल
शव मिलने के बाद जिपनेट पर क्यों नहीं डाला?10 सितंबर को शव मिलने के तुरंत बाद गुरुग्राम पुलिस ने नियमानुसार जिपनेट पोर्टल पर उसकी जानकारी और तस्वीरें क्यों अपलोड नहीं कीं?
बिना शिनाख्त इतनी जल्दबाजी में अंतिम संस्कार क्यों?14 सितंबर को परिजनों को तलाशने या सूचना देने का कोई प्रयास किए बिना, तय कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर अंतिम संस्कार क्यों कर दिया गया?
हत्या के बाद फोन से मैसेज कौन भेज रहा था?अगर युवराज की हत्या 6 सितंबर को ही हो गई थी, तो अगले दो दिनों तक उसके फोन से परिवार और दोस्तों को मैसेज कौन भेज रहा था?
सभी आरोपियों की निष्पक्ष और समयबद्ध गिरफ्तारी कब?इस हत्याकांड में शामिल हर एक आरोपी की पहचान कर क्या पूरी जांच तय समय सीमा में निष्पक्ष रूप से पूरी होगी?
सबूत और मेडिकल दस्तावेज परिजनों को कब सौंपे जाएंगे?पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इंक्वेस्ट पेपर्स, डीएनए सैंपल, शव की तस्वीरें और युवराज का सामान कब सुरक्षित कर परिजनों के साथ साझा किया जाएगा?
लापरवाह अधिकारियों पर कानूनी जांच कब?सबूतों को नष्ट करने और नियम विरुद्ध अंतिम संस्कार करने के जिम्मेदार गुरुग्राम पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक जांच कब शुरू होगी?
हम कोई एहसान नहीं मांग रहे, हमें सिर्फ जवाब चाहिए और हमारे बेटे युवराज के लिए इंसाफ चाहिए.
– युवराज के पीड़ित परिजन
About the Authorअनूप कुमार मिश्रAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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First Published :
September 17, 2026, 23:15 IST



