Bikaner News: चाक पर घूमती उम्मीदें, चाइनीज लाइट को टक्कर दे रहे मिट्टी के दीये, कुम्हारों की चमकी किस्मत

Last Updated:October 31, 2026, 13:27 IST
Bikaner News: बीकानेर में दीपावली से पहले मिट्टी के दीपकों की मांग बढ़ने लगी है. चाइनीज लाइट को छोड़ लोग पारंपरिक दीयों की ओर लौट रहे हैं. डिजाइनर दीपकों का भी क्रेज बढ़ रहा है, बढ़ती बिक्री से कुम्हारों को इस बार अच्छी कमाई और रोशन दिवाली की उम्मीद है.मिट्टी के दीयों की मांग
बीकानेर. दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बीकानेर में कुम्हारों के घरों और दुकानों पर रौनक बढ़ने लगी है, त्योहार को रोशन करने के लिए कुम्हार इन दिनों मिट्टी के दीपक बनाने में जुटे हुए हैं. बाजार में लगातार बढ़ रही दीपकों की मांग ने कुम्हारों की उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं. उन्हें भरोसा है कि इस बार दीपावली पर अच्छी बिक्री होगी और उनके परिवारों को बेहतर आमदनी मिल सकेगी.
दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है, आधुनिकता के दौर में भले ही घरों की सजावट के लिए रंग-बिरंगी लाइट और इलेक्ट्रॉनिक झालरों का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन मिट्टी के दीपकों की अहमियत आज भी बरकरार है. दीपावली के दिन घरों के आंगन, मंदिरों, छतों और मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा को लोग आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं. यही वजह है कि त्योहार से पहले ही बाजार में मिट्टी के दीपकों की मांग बढ़ने लगी है.
चाइनीज लाइट छोड़ पारंपरिक दीपकों की ओर लौट रहे लोग
पिछले कुछ समय से लोगों में पारंपरिक दीपावली मनाने का रुझान बढ़ा है, कई लोग चाइनीज लाइट और इलेक्ट्रॉनिक सजावट के बजाय मिट्टी के दीपकों को प्राथमिकता दे रहे हैं. उनका मानना है कि दीपावली का असली उत्साह मिट्टी के दीपक जलाने से ही आता है. इसके साथ ही लोग स्थानीय कुम्हारों से दीपक खरीदकर उनके रोजगार को भी बढ़ावा देना चाहते हैं, ताकि त्योहार की खुशियां उनके परिवारों तक भी पहुंच सकें.
डिजाइनर दीपकों की भी बढ़ रही मांग
बदलते समय के साथ मिट्टी के दीपकों के डिजाइन में भी काफी बदलाव आया है, अब बाजार में पारंपरिक दीपकों के साथ अलग-अलग आकार, रंग और आकर्षक डिजाइन वाले दीपक भी उपलब्ध हैं. युवा और महिलाएं घर की सजावट के लिए इन डिजाइनर दीपकों को पसंद कर रहे हैं. ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ने के बावजूद स्थानीय बाजारों में मिट्टी के दीपकों की मांग बनी हुई है. कुम्हारों का कहना है कि दीपावली उनके लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. इस दौरान होने वाली बिक्री से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद रहती है. यही कारण है कि वे कई दिन पहले से ही दीपक बनाने की तैयारी शुरू कर देते हैं. इस बार बढ़ती मांग को देखते हुए कुम्हारों के चेहरे पर खुशी नजर आने लगी है. अब उन्हें उम्मीद है कि मिट्टी के दीपकों की रोशनी से न केवल लोगों के घर जगमग होंगे, बल्कि उनके परिवारों की दीपावली भी खुशियों से भर जाएगी.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
October 31, 2026, 13:27 IST



