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‘सिगरेट नहीं मिलेगी, अब क्या करोगे?’ जेल अफसरों ने तोड़ना चाहा हौसला, संजय दत्त ने दिया था करार जवाब

Last Updated:October 03, 2026, 10:54 IST

Sanjay Dutt Recalls Jail Days: संजय दत्त की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही है. शोहरत, सुपरस्टारडम, पारिवारिक मुश्किलें, नशे से जंग और फिर एक लंबे कानूनी मामले ने उनकी जिंदगी के कई साल बदल दिए. अब एक्टर ने अपने जेल के दिनों से जुड़ी कुछ ऐसी बातें साझा की हैं, जिनसे उस दौर की मुश्किलों का अंदाजा लगाया जा सकता है. संजय दत्त ने बताया कि मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने खुद को कभी इतना कमजोर महसूस नहीं किया कि इसे अपना आखिरी पड़ाव बना दिया जाए.

नई दिल्ली. संजय दत्त वो नाम, जिसके नाम से फिल्मी दुनिया में सिक्का चलता था. उसी को एक वक्त जेल की चारदीवारी के पीछे आम कैदी की जिंदगी जीनी पड़ी. हाथों में हथकड़ी लगी, पिता की आंखों में आंसू देखे और फिर भी चेहरे पर मजबूती बनाए रखी. हालात ऐसे थे कि एक-एक दिन भारी गुजरता था, लेकिन इस स्टार ने खुद को टूटने नहीं दिया. यहां तक कि जेल में जब एक पुलिसकर्मी ने उनकी सबसे छोटी जरूरत पर सवाल किया तो उनके जवाब ने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया. सालों बाद अब संजय दत्त ने अपने उसी मुश्किल दौर के कई अनसुने किस्से शेयर किए हैं. उन्होंने बताया कि उस वक्त उनके भीतर क्या चल रहा था और कैसे उन्होंने खुद को संभालकर रखा. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

शेखर सुमन के लोकप्रिय चैट शो ‘शेखर टुनाइट’ में संजय दत्त ने अपने पुराने दिनों को याद किया. बातचीत के दौरान जब उनके सामने जिंदगी की बड़ी मुश्किलों का जिक्र हुआ, तो एक्टर ने बताया कि उनके लिए सबसे भावुक पल वह था, जब पहली बार पुलिस ने उन्हें हथकड़ी लगाई थी और उनके पिता सुनील दत्त उनके सामने थे. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

बातचीत के दौरान शेखर सुमन ने संजय दत्त के संघर्ष के दिनों का जिक्र किया. संजय दत्त को जेल की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली ‘अंदा सेल’ में रखा गया था, फिर भी उन्होंने अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखा. शेखर ने जब उनसे पूछा कि क्या इतने कठिन हालात में कभी उनके मन में अपनी जिंदगी खत्म करने का विचार आया? इस पर संजय दत्त ने बिना किसी झिझक के सीधे शब्दों में कहा, ‘कभी नहीं’. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

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जब शेखर सुमन ने संजय दत्त के जीवन में आए दुखों मां नरगिस को खोना, पहली पत्नी ऋचा शर्मा का निधन, पिता सुनील दत्त का साया उठना, नशे की लत से उबारने के लिए रीहैब जाना और स्टेज-4 कैंसर को मात देना जैसी लिस्ट गिनाई और पूछा- ‘आप किस मिट्टी के बने हैं?’ तो संजय ने कहा कि पिता और परिवार को दर्द में देखकर उन्हें बुरा जरूर लगता था, लेकिन उन्होंने कभी खुद को कमजोर महसूस नहीं होने दिया. फोटो साभार-@duttsanjay/Instagram

संजय दत्त ने उस दर्दनाक पल को याद किया जब पहली बार पुलिस उनके घर पहुंची थी. उनके पिता और दिग्गज एक्टर सुनील दत्त के सामने उन्हें हथकड़ियां पहनाई गई थीं. संजय ने बताया, ‘जब पहली बार पुलिस आई और मुझे हथकड़ी लगाई तो मेरे पिता सदमे में चले गए थे. उनकी आंखों में आंसू थे और उन्होंने पुलिस से कहा, ‘तुम मेरे बेटे के साथ यह क्या कर रहे हो?’ मैंने उन्हें कसकर गले लगाया और कहा- ‘पिताजी, आप इन हथकड़ियों से परेशान क्यों हो रहे हैं? यह सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया है, आप दुखी मत होइए.’ फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

संजय ने आगे बताया हालांकि, अंदर ही अंदर यह चीज मुझे मार रही थी, लेकिन मुझे उनके लिए मजबूत बनना था.’ संजय दत्त ने बताया कि यह पूरी कानूनी लड़ाई करीब 24 साल तक चली और इस दौरान भगवान शिव के जाप ‘हर हर महादेव’ से उन्हें हर परिस्थिति से लड़ने की ताकत मिली. इस बातचीत में उन्होंने जेल में पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के रवैये का जिक्र किया. फोटो साभार-@duttsanjay/Instagram

संजय दत्त ने खुलासा किया कि अधिकारियों को लगता था कि एक बड़े स्टार के ऐशो-आराम छीन लेने से वह टूट जाएगा. लेकिन मुझे कुछ नहीं हुआ. जब मैं नहीं टूटा, तो वे हैरान रह गए. वो मेरा मजाक उड़ाते थे. एक दिन एक पुलिस अफसर मेरे पास आया और ताना मारते हुए बोला-‘अब तुम्हें यहां सिगरेट नहीं मिलेगी, बताओ अब क्या करोगे?’ तो मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया-‘सर, सिगरेट न सही, यहां बीड़ी तो मिलेगी ना?’ फोटो साभार-@duttsanjay/Instagram

उन्होंने आगे कहा कि ये बेपरवाह और जमीन से जुड़े रवैये को देखकर जेल के अधिकारी तनाव में आ जाते थे कि आखिर यह इंसान इतना शांत कैसे रह सकता है. संजय ने अपनी परवरिश का जिक्र करते हुए कहा कि उनके माता-पिता और लॉरेंस स्कूल, सनावर की शिक्षा ने उन्हें जमीन से जुड़े रहना सिखाया. यही वजह थी कि फिल्म स्टार बनने के बाद भी वह सेट पर काम करने वाले लोगों के साथ बैठकर खाना खाने में कभी झिझके नहीं. उन्होंने कहा कि स्टारडम उनके लिए ऐसी चीज नहीं थी, जिसे लेकर वह खुद को बाकी लोगों से बड़ा समझें. शायद यही वजह थी कि जेल में अचानक आम कैदी की तरह जिंदगी जीने की स्थिति आने पर भी वह पूरी तरह बिखरे नहीं.  फोटो साभार-@duttsanjay/Instagram

आपको बता दें कि 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले से जुड़े हथियार मामले में उन्हें 19 अप्रैल 1993 को गिरफ्तार किया गया था. उन पर TADA और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी. वह करीब 18 महीने तक अंडरट्रायल कैदी के तौर पर जेल में रहे और अक्टूबर 1995 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली. इसके बाद भी मामला सालों तक चलता रहा. 2007 में विशेष TADA अदालत ने उन्हें आतंकवाद से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन अवैध हथियार रखने के मामले में आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया और छह साल की सजा सुनाई. 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा बरकरार रखी, हालांकि छह साल की सजा को घटाकर पांच साल कर दिया गया. संजय दत्त ने मई 2013 में आत्मसमर्पण किया. इसके बाद उन्होंने पुणे की यरवडा जेल में सजा काटी और अच्छे व्यवहार के आधार पर मिली छूट के बाद 25 फरवरी 2016 को जेल से बाहर आए. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

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October 03, 2026, 10:54 IST

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