सोशल मीडिया के एडिक्टिव डिजाइन पर दिल्ली HC में PIL, उदयपुर की अधिवक्ता सुभिका जोशी भी याचिका में शामिल

Last Updated:September 13, 2026, 20:21 IST
Delhi High Court PIL: इसमें यूजर्स को हो चुके नुकसान के लिए उचित मुआवजे का प्रावधान करने की बात कही गई है.अब अगली सुनवाई में इस मामले पर कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण रहेगा.वहीं, उदयपुर की सुभिका जोशी के इस कानूनी प्रयास से शहर का नाम भी एक ऐसे मुद्दे से जुड़ा है, जो आज बच्चों, युवाओं और सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले लाखों लोगों से सीधे जुड़ा हुआ है.
उदयपुर की बेटी और अधिवक्ता सुभिका जोशी अब सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़े एक अहम कानूनी मामले का हिस्सा बनी हैं.दिल्ली हाईकोर्ट में कानून के प्रोफेसर डॉ. विकास कथूरिया की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एडिक्टिव डिजाइन को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. इस याचिका को अधिवक्ता कार्तिका शर्मा और उदयपुर की सुभिका जोशी ने दायर किया है.याचिका में सोशल मीडिया के ऐसे डिजाइन और फीचर्स पर सवाल उठाए गए हैं, जो लोगों को बार-बार प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं.
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल केवल उनके कंटेंट की वजह से नहीं, बल्कि उनके डिजाइन और तकनीकी आर्किटेक्चर की वजह से भी बढ़ता जा रहा है. ऐसे कई फीचर्स हैं, जिन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बना रहे और बार-बार वापस आए. याचिका में खास तौर पर बच्चों और युवाओं पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है.
इस मामले में 9 सितंबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई प्रस्तावित थी. हालांकि, पीठ के एक माननीय न्यायाधीश के मामले से अलग होने यानी recusal के बाद अब इस मामले को अगले सप्ताह दूसरी पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा। ऐसे में अब अगली सुनवाई पर कोर्ट इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाता है, इस पर नजर रहेगी.
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याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई है कि भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ऐसे एडिक्टिव डिजाइन फीचर्स को प्रतिबंधित, नियंत्रित या विनियमित करने के लिए उचित निर्देश जारी किए जाएं.याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक इस संबंध में कानून नहीं बनता, तब तक कोर्ट की ओर से उचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि यूजर्स को ऐसे डिजाइन के संभावित नुकसान से बचाया जा सके.
सोशल मीडिया के अत्यधिक और समस्याग्रस्त इस्तेमाल के कारण खासकर किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों को भी उठाया गया है.इसमें बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, कल्याण और उनके विकास को लेकर चिंता जताई गई है. साथ ही यह मुद्दा सोशल मीडिया पर मौजूद कंटेंट से अलग उसके डिजाइन और तकनीकी ढांचे से जोड़ा गया है.
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September 13, 2026, 20:21 IST



