स्कूल झोपड़ी में तो आंगनबाड़ी चल रही कियोस्क में, देखें जयपुर की हैरान कर देने वाली तस्वीर

Last Updated:August 28, 2026, 11:46 IST
Jaipur Anganwadi Centers News : राजस्थान का शिक्षा विभाग का ढांचा ही नहीं बल्कि महिला एवं बाल विकास विभाग का भी बुरा हाल है. शिक्षा विभाग के स्कूलों की तरह बाल विकास विभाग के आंगनबाड़ी केन्द्र भी मुश्किल हालात में चल रहे हैं. एक तरफ पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में जहां सरकारी स्कूल झौंपड़ी में चल रहा है वहीं राजधानी जयपुर में आंगनबाड़ी छोटे से कियोस्क में चलता नजर आ रहा है. इन हालात को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों की शिक्षा और देखरेख करने वाले विभाग किस दौर से गुजर रहे हैं. न्यूज18 इंडिया राजस्थान के सरकारी स्कूलों की जर्जर हालात के बाद अब आपको दिखाने जा रहा है आंगनवाड़ी केंद्रों यानी सरकारी प्री-स्कूलों की दयनीय हालात. राजधानी जयपुर के पार्वती नगर में कियास्क में संचालित हो रहा आंगनबाड़ी केन्द्र.
जयपुर. राजस्थान में केवल शहरी और ग्रामीण इलाकों के स्कूल ही जर्जर भवनों या झोपड़ियों में नहीं चल रहे हैं बल्कि आंगनबाड़ी केन्द्र भी बदहाली से गुजर रहे हैं. इनके हालात भी हैरान कर देने वाले हैं. ये आंगनबाड़ी केन्द्र पान की दुकान वाले कियास्क तक में संचालित हो रहे हैं. जहां जरुरी समान रखने के बाद एक दो इंसान के खड़े होने की जगह होती है वहां दस-दस बच्चे बैठे हैं. यहीं नहीं उसी में में बच्चों के लिए खाना बनता है. वो भी राजधानी जयपुर जैसे शहर में. ये आंगनबाड़ी केन्द्र 3 से 6 साल के बच्चों के लिए होते हैं. इनमें बच्चों को पोषाहार के साथ मानसिक विकास के लिए गेम्स खिलाएं जाते हैं और पढ़ाया भी जाता है.
अगर आपको यकीन नहीं हो तो जयपुर शहर के बीचोंबीच पार्वती नगर में स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र पर जाकर हालात देख सकते हैं. इसे देखकर आपको यकीन करना मुश्किल हो जाएगा कि एक कियोस्क यानी छह फीट की दुकान में सरकार का आंगनबाड़ी केंद्र यानी प्री-स्कूल चल सकता है क्या? इस कियोस्क में पान की थड़ी जैसे छोटे काम हो सकते हैं. लेकिन जयपुर में उसमें आंगनबाड़ी केंद्र चल रहा है. अगर राजधानी का यह हाल है जहां सरकार बैठती है तो ग्रामीण इलाके के आंगनबाड़ी केन्द्रों के हालात अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.
सरकार से महज 750 रुपये किराया मिलता है भवन कामोहल्ले के बीच इस छोटी सी दुकान में आंगनबाड़ी केंद्र का सामान ठूंस ठूंसकर भरा है. इसी में आंगनबाड़ी की रसोई भी है और फिर करीब दस बच्चे एक दूसरे से सटकर बैठे हैं. वे खेलने की कोशिश कर रहे या पढ़ने की यह समझ से परे है. आंगनबाड़ी सहायिका के लिए अंदर खड़े होने की जगह नहीं बची तो वह बाहर गली में खड़ी रहकर बच्चों पर नजर रख रही है. आंगनबाड़ी सहायिका से जब पूछा इतनी छोटी दुकान में कैसे और क्यों चल रहा ये केंद्र तो जबाब मिला सरकार से महज 750 रुपये किराया मिलता है भवन का.
राजस्थान में 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं
व्यवस्थाओं से त्रस्त नजर आ रही इस आंगनबाड़ी सहायिका ने बताया कि जयपुर जैसे शहर में इस किराए में इतनी जगह ही मिल सकती है. बच्चों के आने से पहले इस दुकान में उनका खाना बनाती हूं. फिर इसी में बच्चों को खिलाती हूं और साथ में पढ़ाती हूं. राजस्थान में 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं. इनमें से 11,500 आंगनबाड़ी केन्द्र किराए के भवन में चल रहे हैं. 3284 आंगनबाड़ी केंद्र के भवन जर्जर हालात में है. राजस्थान सरकार शहरी क्षेत्रों में 750 और ग्रामीण क्षेत्र में इन केंद्रों को किराये के लिए महज 200 देती है.About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…
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Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 28, 2026, 11:40 IST



