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महिला के गर्भ से जन्मे जुड़वां, लेकिन माता-पिता अलग-अलग, अनोखा मामला देख कोर्ट भी उलझा- Surrogacy Case Australia Queensland News

Last Updated:August 27, 2026, 18:25 IST

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में सरोगेसी का बेहद दुर्लभ मामला सामने आया है. एक महिला के गर्भ में IVF के जरिए दूसरे दंपति का भ्रूण डाला गया था, लेकिन इसी दौरान वह स्वाभाविक रूप से भी गर्भवती हो गई. नवंबर 2025 में उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. एक बच्ची IVF से और दूसरा बच्चा प्राकृतिक गर्भधारण से हुआ. दोनों के जैविक माता-पिता अलग हैं, जिससे सरोगेसी कानून की व्याख्या का सवाल खड़ा हुआ.महिला के गर्भ से जन्मे जुड़वां, लेकिन माता-पिता अलग-अलग, कोर्ट भी उलझाZoomऑस्ट्रेलिया में प्रेगनेंसी का अजीबोगरीब मामला आया है.

ब्रिस्बेन: ऑस्ट्रेलिया में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने डॉक्टरों के साथ-साथ कानूनी विशेषज्ञों को भी उलझा दिया. क्वींसलैंड की एक महिला ने नवंबर 2025 में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, लेकिन दोनों बच्चों के जैविक माता-पिता अलग-अलग हैं. मामला इतना असामान्य था कि क्वींसलैंड के मौजूदा सरोगेसी कानूनों में ऐसी स्थिति के लिए साफ प्रावधान ही नहीं था. दिलचस्प बात यह है कि महिला एक दंपति के लिए सरोगेट बनी थी. सरोगेसी का मतलब जब कोई महिला किसी दूसरे व्यक्ति या दंपति के लिए अपने गर्भ में बच्चा पालती है और उसे जन्म देती है. IVF के जरिए एक भ्रूण उसके गर्भ में डाला गया था. लेकिन लगभग उसी समय महिला स्वाभाविक रूप से अपने पार्टनर के जरिए भी गर्भवती हो गई. नतीजा यह हुआ कि उसके गर्भ में दो बच्चे विकसित हुए. एक IVF भ्रूण से और दूसरा प्राकृतिक गर्भधारण से.

IVF के करीब दो हफ्ते बाद सामने आया ट्विस्ट

कोर्ट के फैसले के मुताबिक, महिला और उसके पति पहले से पांच बच्चों के माता-पिता थे. उन्हें एक दूसरे दंपति से दोस्तों के जरिए संपर्क हुआ था, जो बच्चा चाहते थे. उस दंपति में महिला जन्म से ही बिना गर्भाशय के थी, इसलिए वह खुद गर्भधारण नहीं कर सकती थी. दोनों परिवारों के बीच अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी यानी बिना व्यावसायिक भुगतान वाली सरोगेसी की सहमति बनी. अप्रैल 2025 में IVF के जरिए इच्छुक दंपति का भ्रूण सरोगेट महिला के गर्भ में डाला गया.

अल्ट्रासाउंड से पता चला

करीब दो सप्ताह बाद अल्ट्रासाउंड हुआ तो डॉक्टरों ने देखा कि गर्भ में दो भ्रूण हैं. इसके बाद जांच से जो सामने आया, उसने पूरे मामले को बेहद असामान्य बना दिया. एक बच्ची IVF के जरिए डाले गए भ्रूण से पैदा हुई थी और उसका जैविक संबंध सरोगेसी चाहने वाले दंपति से था. वहीं दूसरा बच्चा, एक लड़का, उसी समय स्वाभाविक रूप से गर्भ में आया था और वह सरोगेट महिला तथा उसके पति का जैविक बच्चा था.

दोनों बच्चों का जन्म एक ही दिन

दोनों बच्चों का जन्म नवंबर 2025 में एक ही दिन सी-सेक्शन से हुआ. यानी गर्भावस्था एक थी, जन्म एक ही दिन हुआ, लेकिन दोनों की जैविक पृष्ठभूमि अलग-अलग थी.दोनों बच्चों की परवरिश भी उनके अपने-अपने जैविक माता-पिता के साथ अलग-अलग घरों में हो रही है. बच्चों की पैरेंटेज को लेकर दोनों परिवारों के बीच कोई विवाद नहीं था. फिर भी मामला अदालत तक पहुंचा, क्योंकि यहां सवाल बच्चों की पहचान से ज्यादा सरोगेसी कानून की व्याख्या का था.

कानून में फंसा पूरा मामला

क्वींसलैंड के सरोगेसी कानून में ऐसी स्थिति के लिए प्रावधान है जिसमें सरोगेसी से पैदा हुए जुड़वां बच्चों को अलग-अलग माता-पिता के पास नहीं भेजा जा सकता. कानून में ‘बर्थ सिब्लिंग्स’ यानी एक ही गर्भावस्था से पैदा हुए भाई-बहन की परिभाषा दी गई है. अगर जुड़वां बच्चे सरोगेसी वाली गर्भावस्था से पैदा हुए हों, तो पैरेंटेज ऑर्डर दोनों बच्चों के लिए और उन्हें चाहने वाले माता-पिता के पक्ष में होना चाहिए. लेकिन इस मामले में पेच यही था कि दोनों बच्चे एक ही गर्भावस्था में होने के बावजूद एक ही तरीके से गर्भ में नहीं आए थे.

About the AuthorYogendra Mishra

Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…

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August 27, 2026, 18:25 IST

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