14 सितंबर को भरेगा त्रिनेत्र गणेश का लक्खी मेला, लाखों भक्तों की उमड़ेगी भीड़, जानें मंदिर का इतिहास

सवाई माधोपुर: सवाई माधोपुर में आगामी 14 सितंबर को रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश का प्रसिद्ध लक्खी मेला भरने जा रहा है. मेले को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. यूं तो रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहता है, लेकिन गणेश मेले के दौरान यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है. इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने भी मेले की तैयारियां शुरू कर दी हैं.
रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर अरावली की पर्वत मालाओं और रणथंभौर नेशनल पार्क की हरी-भरी वादियों के बीच ऐतिहासिक रणथंभौर दुर्ग में स्थित है. जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर जन-जन की आस्था का प्रमुख केंद्र है. भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के रूप में माना जाता है. यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. मेले से पहले ही मंदिर परिसर और रणथंभौर दुर्ग की ओर श्रद्धालुओं की रेलमपेल शुरू हो गई है. त्रिनेत्र गणेश मंदिर का इतिहास बेहद अनूठा और रहस्यों से जुड़ा हुआ है. मंदिर को लेकर कई प्राचीन मान्यताएं और किंवदंतियां प्रचलित हैं। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी. वहीं एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव द्वारा गणेश जी का शीश काटे जाने के बाद उनका शीश इसी स्थान पर आकर गिरा था, जिसके बाद यहां गणेश जी के शीश की पूजा होने लगी.
लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़तासंजय दाधीच, महंत रणथंभोर त्रिनेत्र गणे सवाई माधोपुर में आगामी 14 सितंबर को रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश का प्रसिद्ध लक्खी मेला भरने जा रहा है. मेले को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. यूं तो रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहता है, लेकिन गणेश मेले के दौरान यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है. इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने भी मेले की तैयारियां शुरू कर दी हैं.
रणथंभौर दुर्ग की ओर श्रद्धालुओं की रेलमपेल शुरू हो गई रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर अरावली की पर्वत मालाओं और रणथंभौर नेशनल पार्क की हरी-भरी वादियों के बीच ऐतिहासिक रणथंभौर दुर्ग में स्थित है. जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर जन-जन की आस्था का प्रमुख केंद्र है. भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के रूप में माना जाता है. यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. मेले से पहले ही मंदिर परिसर और रणथंभौर दुर्ग की ओर श्रद्धालुओं की रेलमपेल शुरू हो गई है.
भगवान गणेश रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजमान माने जातेत्रिनेत्र गणेश मंदिर का इतिहास बेहद अनूठा और रहस्यों से जुड़ा हुआ है. मंदिर को लेकर कई प्राचीन मान्यताएं और किंवदंतियां प्रचलित हैं. कई श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी. वहीं एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव द्वारा गणेश जी का शीश काटे श मंदिर एक अन्य मान्यता भगवान कृष्ण के विवाह से जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि भगवान गणेश अपने विवाह को लेकर नाराज हो गए थे और उन्होंने अपनी मूषक सेना के माध्यम से भगवान कृष्ण की बारात के रास्ते में बाधाएं उत्पन्न कर दी थीं. इसके बाद भगवान कृष्ण ने रणथंभौर में ही भगवान गणेश का विवाह रिद्धि और सिद्धि से करवाया. इसी मान्यता के चलते यहां भगवान गणेश रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजमान माने जाते हैं.
रणथंभौर की धरती से भगवान गणेश की प्रतिमा प्रकट हुईरणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर को लेकर राजा हम्मीर से जुड़ी कथा भी बेहद प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि वर्ष 1299 में रणथंभौर दुर्ग पर राजा हम्मीर का शासन था और दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने किले पर आक्रमण कर दिया था. युद्ध लंबा खिंचने के कारण किले में खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं की कमी होने लगी. इसी दौरान मान्यता के अनुसार भगवान गणेश ने राजा हम्मीर को स्वप्न में दर्शन देकर संकट जल्द दूर होने का आश्वासन दिया. इसके बाद राजा के भंडार चमत्कारिक रूप से भरे हुए मिले.मान्यता है कि इसी दौरान रणथंभौर की धरती से भगवान गणेश की प्रतिमा प्रकट हुई. इसके बाद यहां मंदिर की स्थापना और पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हुआ. कई ऐतिहासिक मान्यताओं में मंदिर का निर्माण दसवीं सदी के आसपास माना जाता है, जबकि राजा हम्मीर से जुड़ी कथा मंदिर की आस्था को और भी विशेष बनाती है.
आस्था और भक्ति का बड़ा केंद्र बन जातारणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर की एक और खासियत यहां भगवान गणेश का अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान होना है. मान्यता के अनुसार यहां गणेश जी के साथ उनकी पत्नियां रिद्धि और सिद्धि तथा पुत्र शुभ और लाभ भी विराजमान हैं. इसी कारण देशभर में इस मंदिर की अपनी अलग पहचान है. हर वर्ष गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां लगने वाला लक्खी मेला श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का बड़ा केंद्र बन जाता है. पैदल यात्राओं के जरिए श्रद्धालु रणथंभौर पहुंचने लगे हैं और गणेश जी के दर्शन कर मनोकामनाएं मांगते हैं. जिला प्रशासन भी लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुट गया है.
फिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र 14 सितंबर को भरने वाले इस लक्खी मेले में एक बार फिर रणथंभौर की धरती पर आस्था का विशाल संगम देखने को मिलेगा. जंगल की हरियाली, ऐतिहासिक रणथंभौर दुर्ग और त्रिनेत्र गणेश के जयकारों के बीच सवाई माधोपुर एक बार फिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा.



