एक गांव, 350 से अधिक मंदिर और सालों पुरानी आस्था! राजस्थान की ‘देव नगरी’ नारलाई का रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान

पाली: हम सबने देवों की नगरी काशी, मथुरा और हरिद्वार के बारे में तो बहुत सुना है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे राजस्थान के मारवाड़ अंचल में भी एक ऐसा अनोखा और पावन गांव है, जिसे ‘देव नगरी’ कहा जाता है? एक ऐसा गांव जहां की गलियों में कदम रखते ही आपको किसी बड़े शहर से भी ज्यादा, यानी 350 से भी अधिक प्राचीन और भव्य मंदिर देखने को मिल जाएंगे! जी हां, हम बात कर रहे हैं अपनी ऐतिहासिक धरोहर और अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व प्रसिद्ध ‘नारलाई गांव’ की. इस गांव का इतिहास इतना पावन है कि इसका प्राचीन नाम ‘नडोलाई’ और ‘नारदपुरी’ हुआ करता था.
मान्यता है कि यह स्थान साक्षात देवर्षि नारद मुनी की तपोभूमि रहा है, जिन्होंने यहां वर्षों तक कठिन तपस्या की थी. आज यह गांव सिर्फ आस्था का ही केंद्र नहीं है, बल्कि यहां की ऐतिहासिक बावड़ियां, रोमांचक लेपर्ड सफारी, वर्ल्ड-क्लास हेरिटेज होटल्स और दूर से ही आकर्षित करने वाली विशाल हाथीनुमा पहाड़ी देश-विदेश के पर्यटकों को सम्मोहित कर रही है.
नारद मूनि की तपोभूमि यह जगह नारलाई के प्राचीन शिलालेखों और ग्रंथों के अनुसार इसका प्राचीन नाम नन्दकुलवन्ति, नारदपुरी और नाडुलाई था. नारद मुनि ने अनुपम प्राकृतिक सौन्दर्य वाली इस भूमि पर तपस्या की थी और यहीं एक नगरी बसाई थी जो आज नारलाई के नाम से प्राचीन नगरी के अवशेष के रूप मे स्थित है. कहते है प्राचीनकाल में इस नगरी का विस्तार वर्तमान नाडोल तक होने का उल्लेख मिलता है लेकिन समय के फेर से साथ इनके बीच 6 किलोमीटर की दूरी हो गई जिससे नारलाई और नाडोल ने अपना अलग अलग अस्तित्व बना लिया. नारलाई के समस्त जैन मंदिरों में श्री आदिनाथ भगवान का मंदिर सबसे प्राचीन लगता है. इसकी बनावट और शिल्पकला से अनुमान लगाया जाता है कि यह मंदिर दसवीं शताब्दी से भी प्राचीन होना चाहिये.
22 शिखरबंद मंदिर आज भी मौजूद इस भूमि की खासियत की बात करे तो यहां भ्यातिभव्य कलात्मक, नक्काशीदार, गुम्बजदार करीब 22 शिखरबंद मंदिर आज भी मौजुद है. जिनके नक्काशीदार स्तम्भों पर अतिसुन्दर प्रतिमाएं, बारीक कोरिणयां तथा तोरण देखने योज्य है. इन मंदिरों के साथ छोटे-छोटे अन्य पूर्ण अपूर्ण देव मंदिरों, देवलियों में विराजमान लोकदेवता खेतलाजी, मामाधणी, भैरूजी,ईनाजी,वीर व दास हनुमानजी, विध्रहरण, विनायक सहित अनगिनत स्थान है.
27 बावडिया भी मौजूद नारलाई गांव की प्राकृतिक गुफाओं,घाटियों,चोटियों एवं मंडपों, उपाश्रयों मठ, मढियों, पौशाले, हिवन यज्ञ शालाओं, धार्मिक शालाओं, साधु संत कुअिया छोटे मोटे आश्रम स्थलों, संत महात्माओं की धूणियों आदि की ओर दृष्टिपात करते है. तो उनकी संख्याओं की भरमार तथा उनमें स्थापित विविध प्रतिमाओं चण्डी-त्रिशुलों को देखकर ही अलग ही अनुभव होता है. इसके अलावा भी इस ऐतिहासिक नगरी में कलात्मक 27 बावडिय़ा मौजूद है. जिनकी पावड्यिों, दीवारों में पुरानी शैली की विभिन्न देवी देवताओं की आकृषित प्रतिमाएं स्थापित है.



