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Opinion: महिला क्रिकेट को भी चाहिए अब दो कप्तान, स्मृति की लीडरशिप टेस्ट करने का वक्त, ओलंपिक से पहले बदलाव जरूरी?

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महिला क्रिकेट को भी चाहिए अब दो कप्तान, स्मृति की लीडरशिप को टेस्ट करने का समय

Last Updated:September 09, 2026, 13:56 IST

smriti mandhana as captain: ओलंपिक में अब सिर्फ दो साल का समय बचा है. सवाल यह है कि क्या हरमनप्रीत टी20 फॉर्मेट में कप्तान के तौर पर भारत को ओलंपिक पदक तक पहुंचाने का भरोसा पैदा करती हैं? यही वह सवाल है जिसे पूछा जाना चाहिए. जवाब नहीं है तो स्मृति मंधाना की तरफ बतर कप्तान देखा जाने का समय आ चुका है. महिला क्रिकेट को भी चाहिए अब दो कप्तान, स्मृति की लीडरशिप को टेस्ट करने का समयZoomस्मृति मंधाना को टी2- टीम की कप्तानी देने का सही समय आ गया है

नई दिल्ली. पुरुष टीम की कप्तानी और कोच को लेकर चर्चा अभी थमी ही नहीं थी कि इंग्लैंड में हुए टी20 विश्व कप के अंत में इस बात पर काफी चर्चा हुई कि भारत को लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 को ध्यान में रखते हुए स्मृति मंधाना को कप्तान बनाने पर विचार करना चाहिए. हरमनप्रीत कौर पिछले एक दशक से यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं और टूर्नामेंट के पिछले दो संस्करणों में भारत का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. हालांकि, 2025 में हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने 50 ओवर का विश्व कप जीता था, लेकिन टी20 में टीम का प्रदर्शन उस स्तर का नहीं रहा है.

ऐसे में टीम में नए विचारों और नई सोच को शामिल करना ही आगे बढ़ने का तार्किक रास्ता नजर आता है, खासकर तब जब ओलंपिक में अब सिर्फ दो साल का समय बचा है. सवाल यह है कि क्या हरमनप्रीत टी20 फॉर्मेट में कप्तान के तौर पर भारत को ओलंपिक पदक तक पहुंचाने का भरोसा पैदा करती हैं? यही वह सवाल है जिसे पूछा जाना चाहिए.

कप्तानी में नए सोच की जरूरत 

भारत ने हरमनप्रीत की कप्तानी में लॉर्ड्स में टेस्ट मैच जीता और हमेशा की तरह यह मुद्दा भी कुछ समय के लिए चर्चा से गायब हो गया. टेस्ट मैच की जीत टी20 विश्व कप की नाकामी पर पर्दा डालने का काम करने लगी और एक बार फिर घरेलू प्रशंसकों ने अलग-अलग फॉर्मेट को आपस में मिला दिया. अब एशिया कप में भारत के अच्छे प्रदर्शन के बाद, जो अपेक्षाकृत कमजोर टीमों वाला औसत स्तर का टूर्नामेंट है, यह मान लेने का पूरा खतरा है कि हम जिसे मैं ‘आत्मसंतुष्टि के भ्रम’ की स्थिति कहता हूं, उसमें प्रवेश कर रहे हैं. अगर भारत एशिया कप नहीं जीतता है, तभी वह खबर होगी. इसके अलावा कुछ भी होना सामान्य है. प्रतियोगिता में कोई भी टीम भारत के करीब तक नहीं है और इसलिए इस टूर्नामेंट को भारत की असली क्षमता का पैमाना नहीं माना जा सकता.

स्मृति को कप्तानी देने का सही समय

कप्तान के तौर पर स्मृति ने अच्छा प्रदर्शन किया है आरसीबी के लिए वह शानदार रही हैं और उनकी कप्तानी में जीते गए खिताब इसकी कहानी खुद बयां करते हैं. भारत के लिए भी मैंने उन्हें बार-बार जिम्मेदारी उठाते और टीम के लिए आगे बढ़कर प्रदर्शन करते देखा है. उदाहरण के लिए, 50 ओवर के मुकाबलों में जब हरमनप्रीत मैदान से बाहर गई हैं, तब कई मौकों पर स्मृति ने कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली है. सच्चाई यह है कि स्मृति अब तैयार हैं और उन्हें मौका मिलना चाहिए. अगर उन्हें लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए टीम तैयार करनी है, तो उन्हें इस भूमिका में खुद को स्थापित करने और उसका अधिकतम लाभ उठाने के लिए पर्याप्त समय देना होगा. इस पूरे असमंजस के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि भारत के लिए क्या बेहतर है. एशिया कप और एशियाई खेल भारत की असली परीक्षा नहीं लेने वाले। चयनकर्ताओं को लंबे समय का फैसला करते समय इस बात को याद रखना होगा.

बतौर बल्लेबाज खेले हरमन

10 दिन बाद भारत एशियाई खेलों में उतरेगा. एक बार फिर वही टीमें जापान में भारत के सामने होंगी, जो इस समय दुबई में खेल रही हैं. एक बार फिर मुकाबले आसान होंगे और एक बार फिर असली सवालों को स्वर्ण पदक की चमक के पीछे छिपा दिए जाने का खतरा रहेगा. यही असली समस्या है क्योंकि हमें इन आसान जीतों के पीछे अपनी कमियों को नहीं छिपाना चाहिए. भारत की असली परीक्षा फिर चैंपियंस ट्रॉफी में होगी और तब वही सवाल दोबारा सामने खड़े होंगे तब तक सिर्फ बहुमूल्य समय गंवा दिया गया होगा. भारत के लिए बल्लेबाज हरमनप्रीत अभी भी बेहद महत्वपूर्ण हैं. टी20 विश्व कप में लॉर्ड्स पर खेले गए आखिरी मुकाबले में उनका प्रदर्शन इसका प्रमाण था. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी की और फिलहाल उनकी जगह लेने वाली कोई खिलाड़ी नजर नहीं आती. लेकिन कप्तान के तौर पर उनके प्रदर्शन को लेकर बहुत कुछ सकारात्मक कहने को नहीं है. सवाल यह है कि क्या चयनकर्ता लंबी अवधि का फैसला लेते समय एशिया कप और एशियाई खेलों जैसी प्रतियोगिताओं के प्रदर्शन को ध्यान में रखेंगे। क्या हमारा लक्ष्य ओलंपिक स्वर्ण पदक नहीं होना चाहिए? क्या हरमनप्रीत की कप्तानी में यह टीम इतना भरोसा पैदा करती है कि वह इस मिशन को पूरा कर सकती है?

About the AuthorRajeev MishraAssociate editor

राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …

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New Delhi,Delhi

First Published :

September 09, 2026, 13:54 IST

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