3 करोड़ की सैलरी भी नाकाफी? बीसीसीआई चीफ सेलेक्टर की रेस से पार्थिव पटेल के पीछे हटने की बड़ी वजह

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3 करोड़ की सैलरी कम? पार्थिव पटेल के BCCI चीफ सेलेक्टर की रेस से हटने की वजह
Last Updated:October 18, 2026, 17:11 IST
Parthiv Patel out of chief selector race reason: बीसीसीआई चीफ सेलेक्टर पद के लिए पार्थिव पटेल के पीछे हटने के बाद चयन प्रक्रिया और सैलरी को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है. सालाना तीन करोड़ रुपये का ऑफर मिलने के बावजूद वित्तीय नुकसान और कोचिंग-कमेंट्री छोड़ने की मजबूरी के चलते पार्थिव ने इस पद से दूरी बना ली. इस बीच, रविचंद्रन अश्विन ने मांग की है कि चयनकर्ताओं की सैलरी मुख्य कोच के बराबर होनी चाहिए ताकि हितों के टकराव की पाबंदियों के बीच सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज इस जिम्मेदारी को संभाल सकें.पार्थिव पटेल की चीफ सेलेक्टर की रेस से बाहर होने की वजह आई सामने.
नई दिल्ली. बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता पद को लेकर हाल में क्रिकेट गलियारों में जो चर्चाएं चली हैं, उन्होंने एक बार फिर इस पद की गरिमा, जिम्मेदारियों और सबसे बढ़कर इससे जुड़े वित्तीय पहलुओं पर गंभीर बहस छेड़ दी है. पिछले कुछ समय से यह बात सामने आ रही थी कि पूर्व भारतीय मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर के कार्यकाल को लेकर अटकलों के बीच पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल का नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहा था. यहां तक कि यह भी माना जा रहा था कि पार्थिव के आवेदन करने पर बोर्ड की तरफ से उन्हें एकतरफा समर्थन मिल जाता.
लेकिन जब आवेदन की अंतिम तिथि आई, तो पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) ने इस पद के लिए फॉर्म नहीं भरा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्थिव ने वित्तीय कारणों का हवाला देते हुए इस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी से पीछे हटने का फैसला किया. बीसीसीआई इस पद के लिए सालाना तीन करोड़ रुपये सैलरी दे रहा था, लेकिन पार्थिव के लिए यह सौदा मुनाफे का नहीं बल्कि भारी नुकसान वाला साबित होता. मुख्य चयनकर्ता बनने के बाद उन्हें अपने अन्य पेशेवर कमिटमेंट्स छोड़ने पड़ते, जिनमें गुजरात टाइटंस के साथ उनकी कोचिंग की भूमिका और विभिन्न मंचों पर उनकी कमेंट्री शामिल है। इन सभी कार्यों से होने वाली कुल कमाई बीसीसीआई के ऑफर से कहीं अधिक थी.
प्रज्ञान ओझा संभाल रहे जिम्मेदारी, नए नामों पर चर्चापार्थिव पटेल के पीछे हटने के बाद फिलहाल दक्षिण क्षेत्र के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा ( Pragyan Ojha) इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं, जबकि पश्चिम क्षेत्र से एक अन्य चयनकर्ता के जल्द जुड़ने की उम्मीद है. इस पद के लिए वसीम जाफर और रमेश पोवार जैसे दिग्गजों के नाम भी चर्चा में बने हुए हैं. इसी बीच, भारतीय टीम के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक अहम मुद्दा उठाया है. अश्विन ने खुलकर कहा है कि चयनकर्ता के लिए तय की गई सैलरी देश के इस सबसे बड़े बोर्ड के हिसाब से पर्याप्त नहीं है, जिससे खेल जगत के बड़े नामों को इस भूमिका के लिए आकर्षित किया जा सके.
मुख्य कोच के बराबर हो सैलरी: अश्विनअश्विन का मानना है कि चयनकर्ता के पद का पारिश्रमिक पुरुष टीम के मुख्य कोच के बराबर होना चाहिए। उनका तर्क है कि जब तक इस पद को आर्थिक रूप से बेहद आकर्षक नहीं बनाया जाएगा, तब तक सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ या अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों और बड़े कद के पूर्व खिलाड़ियों का इस भूमिका के प्रति झुकाव नहीं होगा. उन्होंने इसके पीछे के व्यावहारिक कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक चयनकर्ता को हितों के टकराव यानी ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ के नियमों के तहत कई पाबंदियों से गुजरना पड़ता है.
‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ और 365 दिन की चुनौतीचयनकर्ता बनने के बाद कोई भी पूर्व खिलाड़ी मीडिया में खुलकर बयान नहीं दे सकता, खिलाड़ियों पर बात नहीं कर सकता और न ही किसी आईपीएल फ्रेंचाइजी या अन्य टीमों के साथ कोचिंग का जिम्मा संभाल सकता है.इसके अलावा, चयनकर्ता की नौकरी किसी डेस्क जॉब की तरह नहीं होती, बल्कि उन्हें देश के कोने-कोने में जाकर रणजी ट्रॉफी और घरेलू क्रिकेट के हर मुकाबले देखने होते हैं, आईपीएल पर पैनी नजर रखनी होती है और साल के 365 दिन क्रिकेट में पूरी तरह डूबे रहना पड़ता है. अश्विन ने अपनी बात खत्म करते हुए एक तीखा सवाल उठाया कि क्या बीसीसीआई वास्तव में इस स्तर के दिग्गज और उच्च कद के चयनकर्ताओं को अपनी व्यवस्था में देखना भी चाहती है या नहीं.
About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर
कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
October 18, 2026, 17:07 IST



