3 KM की दूरी और सुविधाओं का अकाल, पातरी गांव में 2 साल से नहीं आया टंकी का पानी

Karauli: राजस्थान में पंचायत चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही ग्रामीण इलाकों में सियासी सरगर्मी और नई सरकार चुनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसी बीच, ग्रामीण अंचलों की जमीनी हकीकत और बुनियादी समस्याओं को जनता के सामने बेबाकी से रखने के लिए न्यूज 18 राजस्थान का खास कार्यक्रम ‘गांव की चौपाल’ करौली पहुंचा. इस बार टीम ने करौली पंचायत समिति की हरनगर ग्राम पंचायत के पातरी गांव का दौरा किया. पातरी गांव करीब 1500 की आबादी और लगभग 850 मतदाताओं वाला इस पंचायत का सबसे बड़ा गांव है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर होने के बावजूद यह गांव आज भी सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है.
जब गांव में ‘गांव की चौपाल’ सजी, तो स्थानीय ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं और व्यवस्था पर सवाल उठाए. ग्रामीणों ने पिछली ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए और आने वाले पंचायत चुनाव में एक ऐसे सरपंच को चुनने की बात कही, जो गांव की दर्द को समझे और धरातल पर काम करे. चौपाल में नेमीचंद माली, जगमोहन पटेल, वार्ड पंच विष्णुचंद्र सैनी, सोनू सैनी, मदनमोहन माली, अर्जुन माली, अमरलाल, महेशचंद, रामस्वरूप, परसौत्तम, परशुराम गोटिया और हुकमचंद माली सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.
पातरी को राजस्व गांव बनाने की उठी मांगग्रामीणों ने सबसे प्रमुख मांग पातरी को एक स्वतंत्र राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की उठाई. उनका तर्क है कि पातरी हरनगर ग्राम पंचायत का सबसे बड़ा गांव है, जबकि मुख्य पंचायत मुख्यालय यहां से काफी दूर है. प्रशासनिक कामों के लिए ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसलिए पातरी को पंचायत मुख्यालय बनाने की मांग भी लंबे समय से की जा रही है.
शिक्षा और स्वास्थ्य का बुरा हालगांव के सरकारी स्कूल की स्थिति बेहद दयनीय है, जहां फिलहाल केवल दो ही कमरे उपलब्ध हैं. ग्रामीणों ने मांग की कि इस स्कूल को उच्च माध्यमिक स्तर तक क्रमोन्नत किया जाए, अतिरिक्त कमरों का निर्माण हो और स्कूल तक जाने वाली सड़क को दुरुस्त किया जाए. गांव में उच्च माध्यमिक शिक्षा मिलने से गरीब परिवारों और खासकर बेटियों को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा. इसके अलावा, गांव में आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई ताकि छोटी-मोटी बीमारी के लिए भी शहर न दौड़ना पड़े.
दो साल से पानी की टंकी सूखी, सड़क और नाली की समस्याजल जीवन मिशन के तहत गांव में पानी की टंकी का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी इससे घरों तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई है. कई जगहों पर डाली गई पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है. लोग आज भी कुओं, हैंडपंप और बोरवेल से पानी लाने को मजबूर हैं. इसके अलावा गांव की अधिकतर सड़कें टूटी हुई हैं और नालियों के अभाव में रास्तों पर कीचड़ फैला रहता है.
कृषि और सब्जी उत्पादन से जुड़ा है गांवपातरी मुख्य रूप से कृषि प्रधान गांव है और यहां बड़े पैमाने पर सब्जी का उत्पादन किया जाता है. लगभग 200 घरों की इस बस्ती को यदि बेहतर सड़क संपर्क मिल जाए, तो किसानों को अपनी फसल और सब्जियां बाजार तक पहुंचाने में भारी आसानी होगी. फिलहाल संसाधनों की कमी के चलते कुछ युवाओं को मजबूरी में दूसरे शहरों में मजदूरी के लिए जाना पड़ता है. अब देखना यह होगा कि पंचायत चुनाव के बाद बनने वाली नई ग्राम सरकार पातरी गांव की इन समस्याओं का कितना समाधान कर पाती है.



