40 रुपये तोला था सोना, तब इस हीरोइन की फीस थी 25000 रुपये, घर से भागकर की थी शादी

Last Updated:September 18, 2026, 20:35 IST
भारतीय सिनेमा में जब मर्दों का दबदबा था, तब एक हीरोइन पर फिल्ममेकर्स अपनी फिल्मों का आधा बजट लुटा देते थे. लोग उनकी निपुणता को देखते हुए उन्हें अष्टावधानी भी कहते थे. वे 1940-50 के दशक की सुपरस्टार थीं. उन्हें जिस फिल्म से भारी लोकप्रियता मिली, उसी के स्ट्रगलिंग असिस्टेंट डायरेक्टर के साथ भागकर शादी की. उन्होंने शादी के बाद अपने पति को डायरेक्टर-फिल्ममेकर के तौर पर लॉन्च भी किया. वे एकमात्र हीरोइन थीं, जो एमजीआर के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्हें ‘मिस्टर रामचंद्र’ कहकर बुलाती थीं.
नई दिल्ली: बात सिनेमा के उस दौर की है जब 1 तोला सोना 40 रुपये में मिलता था. तब एक हीरोइन 25 हजार रुपये फीस लेती थीं, जो फिल्म के बजट का लगभग आधा होता था. लोग उन्हें अष्टावधानी भी कहते थे, क्योंकि वे सिनेमा की आठ कलाओं में निपुण थीं. वे गाने, नाचने, अभिनय, निर्देशन, लेखन सहित कई विधाओं में माहिर थी. भारत के पहले उप-राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी उनके काम के मुरीद थे. (फोटो साभार: IMDb/AI)
नई पीढ़ी शायद भानुमति रामकृष्ण को न जानती हो, मगर वे 40-50 के दशक की सुपरस्टार थीं. वे तेलुगू सिनेमा की पहली फीमेल सुपस्टार भी हैं. उन्होंने 1939 की फिल्म ‘वर विक्रयम्’ से डेब्यू किया था. वे फिल्म ‘कृष्ण प्रेम’ से लोकप्रिय हुईं. फिल्म ‘स्वर्गसीमा’ ने उनके स्टारडम को और बढ़ाया. वे तमिल सिनेमा में पहली बार फिल्म ‘राजा मुक्ति’ में एमजीआर के साथ दिखी थीं. उन्होंने कुछ फिल्मों में बतौर म्यूजिक डायरेक्टर भी काम किया था. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज/Instagram@gsunnikrishnannair)
भानुमति रामकृष्ण ने पहली दफा 1953 की फिल्म ‘चांदीरानी’ डायरेक्ट की थी. कमाल की बात है कि उन्होंने इस फिल्म को प्रोड्यूस भी किया था, इसका संगीत भी बनाया था और इसके हिंदी, तेलुगू और तमिल वर्जन में डबल रोल भी निभाया था. (फोटो साभार: IMDb/AI)
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फिल्म ‘कृष्ण प्रेम’ की शूटिंग करते हुए भानुमति रामकृष्ण स्ट्रगलिंग असिस्टेंट डायरेक्टर पीसी रामाकृष्णा राव से प्यार कर बैठी थीं. पिता ने उनकी शादी का विरोध किया, क्योंकि वे एक बड़ी स्टार थीं, जबकि पीएस रामाकृष्ण राव थोड़ा बहुत ही कमाते थे. उन्होंने हिम्मत दिखाई और 1943 में भागकर शादी कर ली. (फोटो साभार: IMDb/AI)
भानुमति रामकृष्ण भारत की पहली महिला भी थीं, जिन्होंने खुद का स्टूडियो खोला था. उन्होंने इसे अपने बेटे के नाम दिया. उन्होंने फिर अपने पति को फिल्ममेकर और प्रोड्यूसर के तौर पर लॉन्च किया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उस दौर के टॉप स्टार एनटीआर और एएनआर उनके प्रोडक्शन हाउस की फिल्मों में बराबर अभिनय करते रहे. (फोटो साभार: IMDb)
भानुमति रामकृष्ण पहली साउथ इंडिया हीरोइन भी थीं, जिन्हें भारत सरकार ने पद्म अवॉर्ड से सम्मानित किया था. वे आखिरी शख्स भी हैं, जिन्हें एक्टिंग के लिए राष्ट्रपति अवॉर्ड मिला था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पहले उप-राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी उनके काम के बड़े फैन थे. (फोटो साभार: Instagram@vendithera)
सिनेमा के सुनहरे दौर में लगभग सभी हीरोइन लक्स साबुन का विज्ञापन करती थीं, मगर जब भानुमति को मोटी रकम के एवज पर लक्स का विज्ञापन करने को कहा, तो उन्होंने इसे ठुकरा दिया. एक्ट्रेस का तर्क था कि वे निजी तौर पर इस साबुन का इस्तेमाल नहीं करती हैं, इसलिए वे प्रमोशन के लिए झूठ नहीं बोलेंगी. (फोटो साभार: IMDb/AI)
भानुमति लोगों के बीच अष्टावधानी नाम से भी मशहूर थीं, जिसका मतलब है कि वे एक वक्त में आठ कलाओं में निपुण थीं. वे एक कुशल हीरोइन, गायिका, निर्देशक, संगीतकार, लेखिका, फिल्म एडिटर और स्टूडियो मालिक थीं. उन्होंने आखिरी बार 1998 की फिल्म ‘पेल्ली कनुका’ में काम किया था. (फोटो साभार: Instagram@vendithera)
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September 18, 2026, 20:35 IST



