पुरोहित जी के कटले की आग ने खोली दावों की पोल, 4 करोड़ का सिस्टम निकला ‘सफेद हाथी’, 14 साल से कागजों में दौड़ती रहीं फाइलें

Last Updated:September 18, 2026, 13:24 IST
Jaipur Fire Purohit Ji Ka Katla: जयपुर के पुरोहित जी के कटले में गुरुवार सुबह लगी भीषण आग ने 25 से अधिक दुकानों को खाक कर दिया. 13 घंटे तक चली इस आग ने स्मार्ट सिटी के दावों की सच्चाई सबके सामने ला दी है. चार साल पहले 4 करोड़ रुपये की लागत से लगा ऑटोमैटिक फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हुआ. न तो उसमें पानी का कनेक्शन था और न ही उसकी डिजाइन सही थी. हेरिटेज निगम और स्मार्ट सिटी की आपसी खींचतान, अवैध निर्माण और भारी अतिक्रमण ने दमकल के रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद मुश्किल बना दिया. गनीमत रही कि सुबह का समय होने से बड़ी जनहानि टल गई, लेकिन इस बड़े हादसे ने प्रशासन की घोर लापरवाही और सिस्टम की खामियों को पूरी तरह उजागर कर दिया है.
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Jaipur Fire: 4 करोड़ का फायर सिस्टम फिर भी नहीं बचा पाया पुरोहित जी का कटला, 25 दुकानें खाक
Jaipur: राजधानी जयपुर के हृदय स्थल, चारदीवारी स्थित पुरोहित जी के कटले में गुरुवार सुबह लगी भीषण आग ने सिर्फ 25 से अधिक दुकानों को ही राख नहीं किया, बल्कि स्मार्ट सिटी के तहत किए गए बड़े-बड़े दावों की भी पोल खोल दी है. करीब 13 घंटे तक धधकी इस आग ने व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है. इस अग्निकांड ने प्रशासन पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर व्यापारियों की सुरक्षा के लिए लगाया गया करोड़ों का सरकारी पैसा कहां पानी में बह गया.
जांच और मौके के हालात बताते हैं कि कटले की सुरक्षा के लिए करीब 4 साल पहले 4 करोड़ रुपये की भारी लागत से लगाया गया ऑटोमैटिक फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह से नकारा साबित हुआ. कागजों में स्मार्ट सिटी के अफसर भले ही पास होते रहे हों, लेकिन असल में यह सिस्टम एक सफेद हाथी ही निकला. दस्तावेजों के अनुसार, पिछले 14 सालों में यहां 6 मॉक ड्रिल कागजों में सफल बताई गईं. छोटी दमकलें और फायर टेंडर खरीदे गए, लेकिन जब असल में आग लगी, तो ये छोटी दमकलें कहीं नजर नहीं आईं. फायर स्टेशन घटनास्थल से महज 1.7 किलोमीटर दूर था, लेकिन संकरी गलियों के कारण दमकलकर्मियों के पसीने छूट गए.
बिना पानी और टेस्टिंग का सिस्टमअखबारों की रिपोर्टिंग और ग्राउंड जीरो के हालात से कई बड़ी लापरवाहियां उजागर हुई हैं. 4 करोड़ का फायर सिस्टम लगा जरूर दिया गया, लेकिन उसमें न तो पानी का कनेक्शन चालू था और न ही उसे होज पाइप से जोड़ा गया था. पिछले 3 सालों में इस सिस्टम का कोई प्रॉपर ट्रायल या टेस्टिंग नहीं की गई. पानी की लाइनें पूरी तरह से सूखी पड़ी थीं. इसके अलावा डिजाइनिंग भी बेवकूफी भरी थी. फायर सिस्टम के नोजल और पाइप 20 फीट की ऊंचाई पर लगा दिए गए, जबकि आग नीचे दुकानों में लगी थी. नीचे की तरफ कोई वॉटर नोजल ही नहीं था.
विभागों की लापरवाही और भारी अतिक्रमणस्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत यह सिस्टम लगाया गया था और बाद में इसे हेरिटेज नगर निगम को हैंडओवर किया जाना था. दोनों विभागों के बीच रखरखाव और जिम्मेदारी को लेकर लापरवाही बरती गई. जंग खा चुके इस सिस्टम की सुध किसी ने नहीं ली. कटले के अंदर सीढ़ियों और रास्तों पर व्यापारियों ने ही दुकानें और सामान रखकर भारी अतिक्रमण कर रखा था. इस वजह से न तो छोटी दमकलें अंदर जा सकीं और न ही दमकलकर्मियों को रेस्क्यू करने का रास्ता मिला. संकरी गली होने के कारण मुख्य दमकलें 300 मीटर दूर ही खड़ी रह गईं. पानी का प्रेशर भी पाइप जोड़ते-जोड़ते खत्म हो गया.
अवैध निर्माण और जनहानि का टला खतराजिस सेठी कॉम्प्लेक्स से आग भड़की, वहां बिना फायर एनओसी के नियमों को ताक पर रखकर रूफटॉप रेस्टोरेंट चलाया जा रहा था. बिल्डिंग में वेंटिलेशन बंद कर दिए गए थे और कॉमर्शियल गैस सिलेंडर अवैध रूप से रखे हुए थे. गनीमत यह रही कि आग सुबह 7 बजे लगी. स्थानीय लोगों की सूझबूझ से रेस्टोरेंट से 5 गैस सिलेंडर समय रहते बाहर निकाल लिए गए, वरना बड़े धमाके हो सकते थे और पूरा कटला स्वाहा हो सकता था. यह अग्निकांड महज एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की घोर लापरवाही का नतीजा है. समय रहते अगर फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम चालू हालत में नहीं रखे गए, तो भविष्य में जयपुर के बाजारों में बड़ा हादसा हो सकता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
September 18, 2026, 11:03 IST



