6 Earthquakes History : दुनिया के इन 6 देशों में आए सबसे विनाशकारी भूकंप, एक जगह तो बिछी थीं 3 लाख लाशें

वेनेजुएला में जब धरती डोली तो अपने साथ ऐसी खौफनाक बर्बादी लेकर आई जिसने पूरी दुनिया को सुन्न कर रख दिया. महज 39 सेकंड के भीतर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो बैक-टू-बैक शक्तिशाली भूकंपों ने एक झटके में शहरों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया. अस्पतालों में मची चीख-पुकार और जमींदोज हुई इमारतों ने एक बार फिर इंसान को ये याद दिला दिया कि प्रकृति के गुस्से के सामने हमारी हैसियत कुछ भी नहीं है. वेनेजुएला के लिए ये भूकंप इतिहास का सबसे भयानक है लेकिन दुनिया में के अलग-अलग कोनों में दर्ज किए गए सबसे खूंखार भूकंपों की लिस्ट में इसका नाम दूर-दूर तक नहीं आता.
इतिहास गवाह है कि जब-जब धरती अपनी पूरी ताकत से कांपी है, तब-तब नक्शे बदल गए हैं और पलक झपकते ही लाखों हंसती-खेलती जिंदगियां हमेशा के लिए दफन हो गई हैं. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक दुनिया में 6 सबसे भयानक मैग्नीट्यूड वाले भूकंप आ चुके हैं.
ग्रेट चिली भूकंप (1960)
वेनेजुएला में सिर्फ 7.5 तीव्रता के भूकंप ने तबाही मचा दी, अब जरा सोचिए कि कहीं 9.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आ जाए तो क्या होगा. साल 1960 में चिली के बायोबियो क्षेत्र में कुदरत ने ऐसा ही एक कहर ढाया था. वैज्ञानिक इतिहास में इसे आज तक का सबसे शक्तिशाली और खतरनाक भूकंप माना जाता है, जिसे ‘ग्रेट चिली अर्थक्वेक’ के नाम से जाना जाता है.
इस भूकंप ने जमीन को तो फाड़ा ही, साथ ही प्रशांत महासागर में ऐसी उग्र लहरें पैदा कीं जिससे चिली में करीब 1,655 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. इसके बाद आई सुनामी का असर इतनी दूर था कि जापान और फिलीपींस तक में भारी नुकसान हुआ था.
अलास्का का भूकंप (1964)
साल 1964 में अमेरिका के अलास्का में आए भूकंप ने आधुनिक विज्ञान को भी हैरान कर दिया था. इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 9.2 दर्ज की गई थी. आम तौर पर भूकंप के झटके कुछ सेकंड के लिए आते हैं, लेकिन अलास्का में धरती पूरे चार मिनट तक पागलों की तरह हिलती रही.
इस अंतहीन लगने वाले झटके ने पूरे इलाके की भूगोल को बदलकर रख दिया. पहाड़ों पर भयानक हिमस्खलन हुए और समुद्र में उठी सुनामी की लहरों ने अलास्का सहित आसपास के कई तटीय इलाकों को लील लिया. इस खौफनाक आपदा में लगभग 130 लोगों की जान गई थी.
सुमात्रा, इंडोनेशिया (2004)
इंसानी इतिहास की सबसे दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली प्राकृतिक आपदा इंडोनेशिया में हुई थी. साल 2004 में इंडोनेशिया के सुमात्रा क्षेत्र में 9.1 तीव्रता का भूकंप आया था. समुद्र के सीने को चीरकर आए इस भूकंप ने मौत का ऐसा तांडव मचाया जिसकी कल्पना आज भी रोंगटे खड़े कर देती है.
इस भूकंप के बाद हिंद महासागर में जो विनाशकारी सुनामी उठी, उसने भारत, श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया सहित कई देशों के तटीय इलाकों में पल भर में सब कुछ तबाह कर दिया. आधिकारिक आंकड़ों में करीब 2.8 लाख से अधिक मौतें दर्ज की गईं, लेकिन जानकारों का मानना है कि लापता लोगों को मिलाकर ये आंकड़ा 3 लाख के पार था.
तोहोकू, जापान (2011)
जापान को भूकंपों का देश कहा जाता है और वहां की तकनीक इस आपदा से निपटने के लिए दुनिया में सबसे बेस्ट मानी जाती है. लेकिन साल 2011 में जापान के तोहोकू क्षेत्र में आए 9.1 तीव्रता के महा-भूकंप ने आधुनिक दुनिया और विज्ञान के घमंड को पल भर में चकनाचूर कर दिया. इस भूकंप के ठीक बाद समुद्र में उठी कई मंजिला ऊंची सुनामी की दीवारों ने जापान के बुलेट ट्रेन नेटवर्क और कंक्रीट के मजबूत तटबंधों को खिलौने की तरह बहा दिया. इसी आपदा की वजह से फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में भी भारी ब्लास्ट हुआ था, जिसने पूरी दुनिया को डरा दिया था. इस प्रलय में 15,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी.
कामचटका, रूस (1952 और 2025)
रूस का सुदूर कामचटका क्षेत्र जमीन के नीचे मौजूद फटी हुई दरारों का एक बहुत बड़ा गढ़ है. इस इलाके ने 100 साल के भीतर प्रकृति के दो बहुत बड़े झटके झेले हैं. 1952 में यहां 9.0 तीव्रता का एक बेहद शक्तिशाली भूकंप आया था. इस झटके से उठी सुनामी की लहरें इतनी विशाल थीं कि उन्होंने रूस के इस ठंडे इलाके में करीब 15,000 लोगों को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया.
इसके ठीक 100 से कुछ साल बाद, यानी साल 2025 में एक बार फिर इसी कामचटका क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का एक और जबर्दस्त भूकंप आया. गनीमत यह रही कि इस बार आबादी दूर होने की वजह से किसी बड़ी जनहानि या मौतों की खबर सामने नहीं आई, लेकिन धरती के नीचे की हलचल ने वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया.
गुजरात, भारत (2001)
26 जनवरी 2001 को जब पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा था, तभी सुबह-सुबह गुजरात के भुज और कच्छ इलाके में कुदरत का सबसे भयंकर कहर टूटा. रिक्टर स्केल पर 7.7 तीव्रता के इस विनाशकारी भूकंप ने पूरे गुजरात को हिलाकर रख दिया था. झटका इतना खतरनाक था कि कच्छ, भुज और अहमदाबाद की हजारों मजबूत इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं. इस भीषण त्रासदी में करीब 20,000 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और डेढ़ लाख से अधिक लोग घायल हुए थे. लाखों लोग बेघर हो गए और कई गांव तो मलबे के ढेर के नीचे ऐसे दबे कि उनका नामोनिशान तक मिट गया.



