7 साल तक स्कूल नहीं देखा, मुफ्त ट्यूशन से बने टॉपर, जिस कॉलेज में पढ़े, आज वहीं प्रिंसिपल हैं रफीक

करौली. अगर आपमें कोई चीज हासिल करने की लालसा और लगन है, तो आप उसे कर ही लेंगे. रास्ते की रुकावटों से आप लड़ ही लेंगे. सफलता का यह मूल मंत्र है राजकीय महाविद्यालय करौली के प्राचार्य रफीक अहमद का. सफलता की कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो समाज के लिए मिसाल बन जाती है. करौली के जाने-माने मैथ के प्रोफेसर रफीक अहमद की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. बचपन और अपनी कॉलेज शिक्षा के समय तो उन्होंने भी ऐसा नहीं सोचा होगा कि जिस कॉलेज से पढ़ाई की है, कभी उसी कॉलेज में प्राचार्य बन जाएंगे. करौली के प्रोफेसर रफीक अहमद की कहानी इसलिए खास है कि जिस कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई की है, आज वह उसी कॉलेज में कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इससे पहले वह 19 साल इसी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर भी काम कर चुके हैं.
करौली के प्रोफेसर रफीक अहमद की कहानी का हर एक मोड़ युवाओं के लिए प्रेरणादायक है. आज भी अपने परिवार में कई पीढ़ियों के बाद खानदान के पहले सरकारी अफसर हैं. इतना ही नहीं, उनके द्वारा पढ़ाए गए छात्र बड़ी संख्या में देशभर में कई बड़े और अच्छे पदों पर सेवा दे रहे हैं. खास बात यह है कि रफीक अहमद ने 7 साल की उम्र तक स्कूल भी नहीं देखा था. बचपन में उनसे एक दिन किसी ने कहा कि मोहल्ले में एक गुरुजी हैं, जो फ्री ट्यूशन देते हैं. यहीं से रफीक अहमद की जिंदगी का एक ऐसा टर्निंग पॉइंट शुरू हुआ, जिसके बाद रफीक हर एग्जाम में टॉपर रहे और पहले ही प्रयास में नेट एग्जाम पास कर असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए. राजकीय महाविद्यालय करौली के कार्यवाहक प्राचार्य रफीक अहमद कहते हैं कि मेरी यहां तक पहुंचने की जो जर्नी है, उसमें ऐसा कुछ नहीं है कि पहले से ही सब टारगेट हो. बस मैं प्रयास करता गया और आगे बढ़ता गया. मेरी सफलता में पहले से प्री-प्लान कुछ नहीं था.
7 साल की उम्र में फ्री कोचिंग से शुरू की पढ़ाई
रफीक अहमद बताते हैं कि बचपन से ही उनके घर में पढ़ाई का माहौल नहीं था और उनके माता-पिता भी पढ़े-लिखे नहीं थे. लेकिन 7 साल की उम्र में एक दिन मोहल्ले में खेलते हुए किसी ने उनसे कहा कि मोहल्ले में राधे माड़ साहब हैं, जो फ्री कोचिंग देते हैं. ऐसा सुनकर मैं भी उस कोचिंग में चला गया. कुछ दिन कोचिंग में पढ़ने के बाद राधे माड़ साहब मुझसे प्रभावित हो गए. इसके बाद उन्होंने मेरे माता-पिता से कहा कि इस बच्चे को जरूर पढ़ाना. उनके कहने पर परिवार ने मुझे स्कूल में भर्ती कर दिया. स्कूल में भी मेरा एडमिशन सीधे चौथी कक्षा में हो गया था. इसके बाद मैं लगातार पढ़ता गया. हर कक्षा में अच्छे नंबर आते रहे और कई बार मैं टॉपर रहा, तो मोहल्ले वालों का भी दबाव परिवार के ऊपर बढ़ गया कि इस बच्चे को जरूर पढ़ाना चाहिए.
करौली कॉलेज और राजस्थान यूनिवर्सिटी में भी रहे टॉपर
प्रोफेसर रफीक अहमद ने करौली कॉलेज से ही वर्ष 1988 में बीएससी की पढ़ाई पूरी की थी. करौली कॉलेज में भी वह बीएससी में टॉपर रहे थे और उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया था. इसके बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से मैथमेटिक्स में मास्टर डिग्री में प्रवेश लिया और वहाँ भी यूनिवर्सिटी में प्रथम स्थान पर रहे. इसके बाद नेट में एलिजिबल होने के बाद पहले ही प्रयास में उन्होंने इस मुकाम पर भी सफलता हासिल की और असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए.
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर रहने के चलते पढ़ाया ट्यूशन
नेट का एग्जाम देने के बाद फाइनल रिजल्ट आने से पहले उन्होंने बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया था, क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी. ऐसे में परिवार का गुजारा करने का भी उनके ऊपर दबाव था. इसके बाद फाइनल रिजल्ट आने के बाद वर्ष 1995 में उनका असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में पहले प्रयास में कॉलेज एजुकेशन में चयन हो गया. पहली पोस्टिंग उन्हें धौलपुर में मिली. वहाँ उन्होंने लगभग 11 साल तक अपनी सेवाएं दीं. इसके बाद अगस्त 2007 में उनका करौली ट्रांसफर हो गया. वर्तमान में वह करौली के राजकीय महाविद्यालय में कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
परिवार के पहले सरकारी कर्मचारी हैं रफीक
प्रोफेसर रफीक अहमद आज भी अपने खानदान में पहले सरकारी कर्मचारी हैं. वह बताते हैं कि उनके परिवार में उनसे पहले कोई पढ़ा-लिखा नहीं था. उनके पिताजी भी तीसरी-चौथी कक्षा तक पढ़े थे. पेशे से उनके पिताजी दर्जी थे. परिवार की आर्थिक स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं थी. लेकिन उनके माता पिता ने मोहल्ले के दबाव में रहकर रफीक को कड़ी मेहनत करके पढ़ाया था. रफीक बताते हैं कि उनसे पहले भी उनकी पीढ़ियों में दूर-दूर तक कोई पढ़ा-लिखा नहीं था. इसलिए आज भी वह ही अपने खानदान के पहले सरकारी कर्मचारी हैं. हालांकि उनकी सफलता के बाद उनके परिवार में उनके बाद के सभी भाई-बहन पढ़े-लिखे हैं.उनके बच्चे भी एमएससी, बीएड और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं, लेकिन अभी भी कोई सरकारी नौकरी में नहीं है..
प्रोफेसर के रूप में 31 साल का है अनुभव
रफीक अहमद बताते हैं कि उनका अब तक का करियर 31 साल का रहा है. करौली कॉलेज में उन्हें मैथ के प्रोफेसर के रूप में 19 साल हो गए हैं. नियमित क्लास लेने के कारण आज बड़ी संख्या में उनके स्टूडेंट देश की विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं में उच्च पदों पर आसीन हैं. सबसे खास बात यह है कि करौली के राजकीय महाविद्यालय में भी उनके द्वारा पढ़ाई गई दो छात्राएँ असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में आज उन्हीं के साथ सेवा दे रही हैं.
युवाओं को भी दिया सफलता का संदेश
प्रोफेसर रफीक अहमद ने युवाओं को भी सफलता का खास संदेश दिया है. उनका कहना है कि मेरा युवाओं से सिर्फ इतना ही कहना है कि आप चाहे जिस भी स्थिति में हैं, लेकिन याद रखें कि आगे बढ़ने का रास्ता कभी बंद नहीं होता है. अगर आपमें कुछ करने का हौसला और लगन है, तो आप उसे कर ही लेंगे. रास्ते की रुकावटों से आप लड़ ही लेंगे. लेकिन इसमें सबसे पहली चीज है कि आप कुछ करने के लिए कुछ ठान लें, क्योंकि बिना ठाने कोई भी मंजिल नहीं मिलती.



