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Dragon Fruit Farming I कम पानी में नई फसल की तलाश, झुंझुनूं के किसान ने ड्रैगन फ्रूट पर लगाया दांव

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गाय, बायोगैस और ड्रैगन फ्रूट, झुंझुनूं के किसान ने खेत को बनाया कमाई का मॉडल

Last Updated:October 27, 2026, 17:42 IST

Dragon Fruit Farming: झुंझुनूं के किसान धनेश खींचड़ ने पारंपरिक खेती से हटकर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है, दो साल पहले लगाए गए 125 पौधों पर अब फल आने लगे हैं. खास बात है कि उनके खेत में डेयरी, वर्मी कंपोस्ट यूनिट और बायोगैस प्लांट भी है.

झुंझुनूं/सत्यप्रकाश सोनी. जिले में किसान अब परंपरागत फसलों के साथ खेती के नए विकल्प भी तलाशने लगे हैं, देलसर खुर्द गांव के किसान धनेश खींचड़ ने अपने खेत में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है. दो साल पहले लगाए गए 125 पौधों पर अब फल आने लगे हैं, धनेश ने बताया कि उन्हें इस खेती का विचार हरियाणा के करनाल में एक ड्रैगन फ्रूट फार्म देखने के बाद आया. वहां खेती का तरीका समझा और फिर अपने खेत में प्रयोग शुरू किया.

धनेश ने खेती में पानी की बचत के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया है, इससे पौधों तक जरूरत के मुताबिक पानी पहुंचता है. उनके खेत में एक पोल पर चार पौधे लगाए गए हैं, उनका कहना है कि इस फसल में पौधों की देखभाल और सिंचाई का खास ध्यान रखना पड़ता है. अनुकूल परिस्थितियों में फल तैयार होने में 15 से 20 दिन का समय लग सकता है.

खेती के साथ डेयरी और बायोगैस का भी इंतजाम

धनेश ने अपने खेत को केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा है, यहां देसी गायों की डेयरी, वर्मी कंपोस्ट यूनिट और बायोगैस प्लांट भी स्थापित कर रखे हैं. वर्मी कंपोस्ट से जैविक खाद मिलती है, वहीं बायोगैस का उपयोग ऊर्जा की जरूरत पूरी करने में किया जा सकता है. इस तरह वे खेती से जुड़े अलग-अलग कामों को एक ही परिसर में संचालित कर रहे हैं. ड्रैगन फ्रूट की खेती को लेकर धनेश को बाजार से भी उम्मीद है. उनके अनुसार, शेखावाटी क्षेत्र में इस फल की मांग है और इसकी कीमत 500 रुपए प्रति किलो तक बताई जा रही है. हालांकि, वास्तविक कमाई उत्पादन, गुणवत्ता, बाजार भाव और बिक्री के खर्च पर निर्भर करेगी.

धनेश का यह प्रयोग आसपास के उन किसानों के लिए भी रुचि का विषय बन रहा है, जो परंपरागत फसलों के साथ कोई दूसरा विकल्प अपनाना चाहते हैं. शुष्क क्षेत्र में नई फसल लगाने से पहले पानी की उपलब्धता, मिट्टी, पौधों की देखभाल और बाजार की जानकारी जुटाना जरूरी है. धनेश ने अपने खेत में ड्रैगन फ्रूट लगाकर इसी दिशा में कदम बढ़ाया है. धनेश खींचड़, प्रगतिशील किसान ने बताया कि हरियाणा के करनाल में ड्रैगन फ्रूट की खेती देखने के बाद उन्होंने इसे अपने खेत में लगाने का फैसला किया. अब पौधों पर फल आने लगे हैं, उनका प्रयास है कि खेती में पानी का सही उपयोग हो और डेयरी, जैविक खाद तथा बायोगैस जैसी व्यवस्थाओं से भी लाभ लिया जा सके.

About the Authorमोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Jhunjhunu,Rajasthan

First Published :

October 27, 2026, 17:42 IST

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