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हैदराबाद: चारमीनार की वास्तुकला में इब्राहिम मस्जिद का प्रभाव

Last Updated:November 17, 2025, 14:58 IST

हैदराबाद का प्रतीक चारमीनार अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, और इसी डिज़ाइन की प्रेरणा गोलकुंडा किले में स्थित प्राचीन इब्राहिम मस्जिद से मिलती है. इतिहासकारों के अनुसार, 1591 में बने चारमीनार की चार मीनारें उसी स्थापत्य शैली का विस्तार हैं, जिसे इब्राहिम कुतुब शाह द्वारा 1550–1580 के बीच निर्मित इब्राहिम मस्जिद में देखा जा सकता है. लगभग 40–50 वर्ष पुरानी यह मस्जिद आज भी कुतुब शाही विरासत का शानदार उदाहरण मानी जाती है और गोलकुंडा किले के भीतर स्थित होने के कारण पर्यटक इसे बाहर से निहार सकते हैं.

हैदराबाद. शहर की शान चारमीनार दुनियाभर में इसकी पहचान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी अनूठी वास्तुकला की प्रेरणा एक प्राचीन मस्जिद से मिली है? चारमीनार के निर्माण से पहले बनी इब्राहिम मस्जिद ही वह ऐतिहासिक धरोहर है जिसकी स्थापत्य शैली ने चारमीनार के डिज़ाइन को प्रेरित किया. हैदराबाद के गौरवशाली इतिहास की यह कड़ी शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है. चारमीनार की डिज़ाइन के पीछे एक रहस्य है. चारमीनार का निर्माण 1591 में कुतुब शाही वंश के सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने करवाया था.

आश्चर्य की बात यह है कि इस आइकॉनिक स्मारक की वास्तुकला गोलकुंडा किले में स्थित इब्राहिम मस्जिद से प्रेरित है. इतिहासकार जाहिद सरकार के अनुसार किताब मुरक्का-ए-हैदराबाद में इस तथ्य का उल्लेख मिलता है. जिस तरह इब्राहिम मस्जिद में दो मीनारें हैं, उसी शैली को आगे बढ़ाते हुए चारमीनार में चार भव्य मीनारें बनाई गई.

इब्राहिम मस्जिद का ऐतिहासिक महत्व

इब्राहिम मस्जिद का निर्माण कुतुब शाही वंश के चौथे सुल्तान इब्राहिम कुतुब शाह ने 1550–1580 के दौरान करवाया था. यह मस्जिद गोलकुंडा किले के ऊपरी भाग में स्थित है, इसी वजह से इसका नाम इब्राहिम मस्जिद पड़ा. यह चारमीनार से लगभग 40–50 वर्ष पुरानी है और कुतुब शाही वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है.

इब्राहिम मस्जिद कैसे पहुँचे

यह मस्जिद गोलकुंडा किले के परिसर में स्थित है, आम पर्यटक मस्जिद को बाहर से देख सकते हैं, लेकिन अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं होती. किला देखने के लिए सामान्य टिकट लेना पड़ता है, जो भारतीय नागरिकों के लिए लगभग 25 रुपये का है. आप बस, ऑटो या निजी वाहन से आसानी से यहां पहुंच सकते हैं, हालांकि निजी वाहन के लिए पार्किंग शुल्क देना होता है. हैदराबाद की ये ऐतिहासिक धरोहरें आज भी कुतुब शाही साम्राज्य की वैभवशाली संस्कृति की झलक पेश करती हैं. चारमीनार और इब्राहिम मस्जिद दोनों ही शहर की वास्तुकला और इतिहास के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं.

Monali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें

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Hyderabad,Telangana

First Published :

November 17, 2025, 14:58 IST

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