मकड़ी रात में बुनती जाल, फिर घंटों करती इंतजार, एक चींटी को पकड़ने के लिए इतनी मेहनत क्यों? वजह है गजब!

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मकड़ी रात में बुनती जाल,घंटों इंतजार, चींटी को पकड़ने के लिए इतनी मेहनत क्यों?
Last Updated:June 23, 2026, 17:31 IST
ऑस्ट्रेलिया में खास तरह के मकड़ी के बारे में पता चला है जो केवल चीटियों को निशाना बनाती है. ये मकड़ी खास तरह का जाल बनाती है जिसे बनाने में काफी समय लगता है. इसके जाल की संरचना बाकी मकड़ियों से अलग है. इसे लेकर वैज्ञानिकों ने अलग-अलग दावे किये हैं. Photo Credit: Macquarie University
उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के घने वर्षावनों में वैज्ञानिकों ने मकड़ी की एक बेहद अनोखी नई प्रजाति खोजी है. सबसे हैरानी की बात यह है कि यह मकड़ी सिर्फ एक ही तरह की चींटी जिसे ग्रीन ट्री एंट कहते हैं उसी का शिकार करती है. आमतौर पर मकड़ियां कई तरह के कीड़ों को पकड़ती हैं, लेकिन यह मकड़ी केवल इसी एक प्रजाति पर निर्भर है.
क्यों खास है ये मकड़ी
रिसर्चर ने बताया है कि दिन में यह मकड़ी पत्तियों के नीचे छिपी रहती है. रात होने पर यह एक बेहद खास जाल तैयार करती है, जिसमें कई रेशमी धागे मिलकर एक कोन जैसी संरचना बनाते हैं. इस जाल को बनाने में मकड़ी को कई घंटे लग जाते हैं.
ग्रीन ट्री चींटी को बनाती है निशाना
जब कोई ग्रीन ट्री चींटी वहां पहुंचती है, तो वह जाल पर हमला कर देती है. जैसे ही चींटी जाल को काटती है, पूरा जाल स्प्रिंग की तरह उछलता है और चींटी को अंदर की ओर खींचकर फंसा देता है. इसके बाद मकड़ी आराम से उसे जाल में लपेट लेती है. यह मकड़ी ऐसा खास जाल बनाती है जो स्प्रिंग की तरह काम करता है. ये जाल पर शिकार को पकड़ता है फिर उसे हवा में उछाल देता है.
जाल ही करता है शिकार
वैज्ञानिकों ने इसका नाम बैलिस्टा स्पाइडर रखा है. यह रोमन के पुराने हथियार बैलिस्टा से लिया गया है, जो तीर और पत्थर फेंकने के लिए इस्तेमाल होता था. वैज्ञानिकों का मानना है कि मकड़ी जाल में कोई खास रसायन भी छोड़ती है, जो चींटियों को आकर्षित करता है. उन्हें हमला करने के लिए उकसाता है. इस जाल की खास बात यह है कि इसे मकड़ी नहीं, बल्कि खुद शिकार आता है.
रिसर्चर का कहना है कि यह दुनिया का शायद पहला ऐसा मकड़ी का जाल है, जो केवल एक ही शिकार को पकड़ने के लिए तैयार हुआ है. यह रिसर्च दिखाती है कि प्रकृति में जीव अपने शिकार को पकड़ने के लिए कितनी अद्भुत और अनोखी रणनीतियां विकसित कर सकते हैं.
About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor
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