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पीएम मोदी की गर्मजोशी और राष्‍ट्रपति पुतिन का कॉन्फिडेंस: हैदराबाद हाउस में दुनिया ने देखा दो सुपर-पावर्स का दम

नई दिल्ली. हैदराबाद हाउस का कैलाश हॉल. दोपहर के 2 बजकर 28 मिनट. दुनिया की निगाहें इस हॉल के दरवाज़े पर टिकी थीं, जहां दो ऐसे नेता कदम रखने वाले थे, जिनकी दोस्ती वैश्विक राजनीति के ध्रुवों को साधने का माद्दा रखती है. इंतजार खत्म हुआ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक साथ प्रवेश किया. लेकिन यह प्रवेश मात्र एक औपचारिक आगमन नहीं था,बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को संदेश देने वाला एक पावर मूव था.

कॉन्फिडेंस बनाम गर्मजोशी: एक परफेक्ट केमिस्ट्रीकैलाश हॉल में दाखिल होते ही पत्रकार दीर्घा से दोनों वर्ल्‍ड लीडर्स की हर एक एक्टिविटी पर सबकी नजर थी। राष्ट्रपति पुतिन, प्रधानमंत्री मोदी से कुछ इंच आगे चल रहे थे. यह कुछ इंच की बढ़त पुतिन के अदम्य कॉन्फिडेंस और इस रिश्ते में उनकी सहजता को दर्शाती थी. अपने पोडियम पर खड़े होते ही पुतिन शांत, गंभीर और पूरी तरह से कंफर्ट जोन में थे. उन्होंने बिना किसी देरी के हेडफोन लगाया, यह एक प्रोफेशनल संकेत था कि अब केवल काम की बात होगी और वह मोदी के हर शब्द को अपनी भाषा में सुनना चाहते थे.

जैसे ही दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौतों के आदान-प्रदान की घोषणा शुरू हुई, पुतिन ने गंभीरता बनाए रखी, लेकिन जैसे ही प्रक्रिया पूरी होती, उनके चेहरे पर एक चिरपरिचित मुस्कान तैर जाती और वह तालियां बजाते. पीएम मोदी भी हर समझौते पर गर्मजोशी से तालियां बजाते. यह तालमेल यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर लगे कड़े प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों की आलोचनाओं को नजरअंदाज करने का स्पष्ट संदेश था.

सामरिक से आर्थिक संबंधों की ओर नया रॉकेट लॉन्चपीएम मोदी के बयान के बाद जब राष्ट्रपति पुतिन ने रूसी भाषा में अपनी बात रखी तो उनकी बॉडी लैंग्वेज और आत्मविश्वास की मुस्कान ने एक बड़ा संकेत दिया. वह यह बताने आए थे कि अब तक जो संबंध केवल सामरिक और रक्षा तक सीमित थे, उन्हें अब इकोनॉमी, ट्रेड और पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है. उनका कॉन्फिडेंस चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा था: यूक्रेन युद्ध अपनी जगह है, लेकिन भारत के साथ रूस के ऐतिहासिक और भरोसेमंद संबंध अगले दशकों तक मजबूत होते रहेंगे और कोई भी बाहरी दबाव इन्हें रोक नहीं सकता.

ट्रंप टैरिफ को चुनौती: $100 बिलियन का ट्रस्ट फैक्टरभाषण के अंत में जो दृश्य दिखा, उसने इस रिश्ते की असली ताकत को दर्शाया. पुतिन के भाषण समाप्त होते ही, पीएम मोदी तुरंत उनकी ओर बढ़े और दोनों दोस्त मुस्कुराते हुए हाथ मिलाए. कैलाश हॉल में दोनों नेताओं के बीच की केमिस्ट्री ने दुनिया को यह अहसास करा दिया कि वे सिर्फ राजनेता नहीं बल्कि परस्पर विश्वास से बंधे रणनीतिक साझेदार हैं. सबसे बड़ा संदेश ट्रंप टैरिफ की पृष्ठभूमि में आया. दोनों नेता इस बात को लेकर पूरी तरह से विश्वस्त थे कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और प्रतिबंधों के शोर के बीच भी वे $100 बिलियन के महत्वाकांक्षी व्यापार लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं. यह अमेरिका और पश्चिमी देशों की उन नीतियों को सीधी चुनौती थी, जो इन दोनों ‘सुपर-पावर्स’ की दोस्ती को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही थीं.

अंत में, मोदी ने एक बेहतरीन मेजबान की तरह पुतिन को आगे किया और वे साथ में हॉल से बाहर निकल गए. पुतिन की बॉडी लैंग्वेज उस समय भी यही बता रही थी कि भले ही दुनिया ने उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश की हो, लेकिन भारत के साथ वे नए संबंधों की कहानी लिखने में पूरी तरह सक्षम हैं. कैलाश हॉल की यह मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय नहीं थी, यह एक वैश्विक घोषणा थी कि पुरानी और नई महाशक्तियाँ अपने एजेंडे पर एक साथ आगे बढ़ रही हैं, किसी भी बाहरी दबाव से बेपरवाह.

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