Rajasthan

उदयपुर महोत्सव में गैर नृत्य की धूम

Last Updated:December 26, 2025, 09:14 IST

Udaipur Festival 2025: मारवाड़ अंचल का प्रसिद्ध ‘लाल अंगरखी की गैर’ नृत्य आज राजस्थान की वैश्विक पहचान बन चुका है. उदयपुर महोत्सव में इसकी भव्य प्रस्तुति ने देशी-विदेशी पर्यटकों का दिल जीत लिया. लाल वेशभूषा में सजे कलाकार जब ढोल की थाप पर लाठियां टकराते हुए नृत्य करते हैं. तो राजस्थान की वीरता और एकता का अद्भुत संगम दिखाई देता है. यह पारंपरिक नृत्य न केवल संस्कृति का संरक्षण कर रहा है. बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है.

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उदयपुर. राजस्थान अपनी रंग-बिरंगी लोक परंपराओं और समृद्ध संस्कृति के लिए विश्वभर में विख्यात है. यहाँ के लोक नृत्य और पारंपरिक उत्सव प्रदेश की पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करते हैं. इन्हीं अनूठी परंपराओं में से एक है ‘लाल अंगरखी की गैर’ नृत्य. जो मुख्य रूप से मारवाड़ अंचल में होली के पावन अवसर पर आयोजित किया जाता है. समय के साथ यह नृत्य केवल एक क्षेत्रीय आयोजन न रहकर राजस्थान की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुका है.

गैर नृत्य मूल रूप से पुरुषों द्वारा किया जाने वाला एक पारंपरिक लोक नृत्य है. इसमें कलाकार गहरे लाल रंग की अंगरखी. सफेद धोती और सिर पर लाल रंग की साफ़ा (पगड़ी) पहनकर सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं. जब ढोल और नगाड़ों की जोशीली थाप गूंजती है. तब कलाकार अपने हाथों में ली हुई लाठियों को एक-दूसरे से टकराते हुए गोल घेरे में घूमते हैं. यह दृश्य पूरे माहौल को असीमित ऊर्जा और रोमांच से भर देता है. यह नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन है. बल्कि इसे वीरता. एकता और सामूहिक उत्साह का प्रतीक भी माना जाता है.

उदयपुर महोत्सव में बिखरी छटाइन दिनों झीलों की नगरी उदयपुर में चल रहे सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान जब कलाकारों ने लाल अंगरखी की गैर नृत्य की प्रस्तुति दी. तो वहां मौजूद दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए. जैसे ही नगाड़ों की आवाज के साथ कलाकारों ने तालबद्ध तरीके से लाठियां भांजी. पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. देश-विदेश से आए पर्यटक इस नृत्य के अनुशासन और भव्यता को देखकर दंग रह गए. पर्यटकों का मानना है कि यह नृत्य राजस्थान की वास्तविक आत्मा को प्रदर्शित करता है.

वैश्विक पहचान और संरक्षणस्थानीय कलाकारों के अनुसार. पहले यह नृत्य केवल होली और ग्रामीण आयोजनों तक ही सीमित था. लेकिन अब इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से स्थान मिल रहा है. इससे न केवल कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है. बल्कि राजस्थान की लुप्त होती लोक कलाओं को नई संजीवनी भी मिल रही है. विदेशी पर्यटक इस नृत्य की लय और वेशभूषा की जमकर तारीफ करते हैं. उदयपुर जैसे पर्यटन केंद्रों पर ऐसी प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Udaipur,Udaipur,Rajasthan

First Published :

December 26, 2025, 09:14 IST

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‘लाल अंगरखी की गैर’ राजस्थान की सबसे जोशीली परंपरा, उदयपुर महोत्सव में दिखा…

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