रामकृष्ण मिशन ट्रस्ट के नाम पर रजिस्टर्ड ऑडी कैसे चला रहा था, क्यों नहीं थी रात को बैरिकेडिंग?

Jaipur Hit and Run Case: जयपुर की सड़कों पर 9 जनवरी 2026 की रात को बड़ा हादसा हुआ. हादसा ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या आम लोगों की जिंदगी वाकई सिस्टम की प्राथमिकता है. मानसरोवर इलाके के खरबास सर्किल पर एक तेज रफ्तार ऑडी कार ने फुटपाथ पर खाना खा रहे लोगों को कुचल दिया. 16 लोग इसकी चपेट में आए, एक की मौत हो गई और चार की हालत अब भी नाजुक है. यह सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि कई स्तरों पर हुई लापरवाही की कहानी है.
इस हादसे को और भी गंभीर बना देता है यह तथ्य कि जिस लग्जरी ऑडी कार ने यह कहर बरपाया, वह दमन और दीव में रामकृष्ण मिशन ट्रस्ट के नाम पर रजिस्टर्ड थी. सवाल उठ रहे हैं कि एक धार्मिक-सामाजिक ट्रस्ट के नाम पर दर्ज कार जयपुर की सड़कों पर रेसिंग करती कैसे घूम रही थी, और रात के समय व्यस्त फुटपाथ पर सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं थे.
हादसा आखिर हुआ कैसे?
रात करीब 9:30 बजे खरबास सर्किल पर ऑडी कार पहले डिवाइडर से टकराई. इसके बाद कार सीधे फुटपाथ पर चढ़ गई, जहां ठेलों पर लोग खाना खा रहे थे. चश्मदीदों के मुताबिक कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि करीब 10 ठेले उछल गए. सड़क पर जूते-चप्पल, प्लेटें और खाने का सामान बिखर गया. CCTV फुटेज में कार की स्पीड साफ नजर आ रही है. स्पीड ने किसी को संभलने तक का मौका नहीं दिया.
इस हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए?
इस हिट एंड रन में 16 लोग कुचले गए. 1 व्यक्ति की मौके पर मौत हो गई. 4 की हालत गंभीर बनी हुई है. बाकी घायलों का इलाज चल रहा है. हैरानी की बात यह है कि कार में बैठे चारों आरोपी एयरबैग खुलने की वजह से सुरक्षित बच गए, जबकि फुटपाथ पर बैठे निर्दोष लोग इसकी कीमत चुकाते रहे.
ऑडी कार किसकी थी और किसके नाम पर रजिस्टर्ड है?
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह ऑडी कार दमन और दीव में रामकृष्ण मिशन ट्रस्ट के नाम पर रजिस्टर्ड है. मुख्य आरोपी दिनेश, जो चुरू का रहने वाला और सोलर बिजनेसमैन बताया जा रहा है, इस कार को चला रहा था. सवाल यह है कि ट्रस्ट के नाम पर रजिस्टर्ड गाड़ी का इस्तेमाल निजी लग्जरी और रेसिंग के लिए कैसे किया जा रहा था.
ट्रस्ट के नाम पर गाड़ी होना क्यों बड़ा सवाल है?
ट्रस्टों को टैक्स छूट और कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं. आम तौर पर ऐसी गाड़ियां सामाजिक या संस्थागत कामों के लिए होती हैं. लेकिन इस मामले में गाड़ी लग्जरी लाइफस्टाइल में इस्तेमाल हो रही थी. यह निजी लोगों द्वारा चलाई जा रही थी. अभी तक कोई स्पष्ट निगरानी नजर नहीं आई. यही वजह है कि अब ट्रस्ट रजिस्ट्रेशन और गाड़ियों के दुरुपयोग पर सवाल उठ रहे हैं.
कार में कौन-कौन सवार था?
कार में कुल चार लोग थे दिनेश (ड्राइवर, मुख्य आरोपी – फरार), एक पुलिसकर्मी और दो अन्य युवक. हादसे के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिनेश और एक अन्य अभी फरार हैं.
क्या आरोपी नशे में थे और रेसिंग कर रहे थे?
जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने खुद कन्फर्म किया है कि कार में शराब पीकर ओवर स्पीडिंग की जा रही थी. इतना ही नहीं, ऑडी एक दूसरी कार के साथ रेसिंग कर रही थी. यानी यह हादसा महज गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई लापरवाही का नतीजा था.
पुलिस और प्रशासन की क्या भूमिका रही?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि रात के समय व्यस्त फुटपाथ पर कोई बैरिकेडिंग क्यों नहीं थी? ठेले लगाने वालों की सुरक्षा के लिए कोई ट्रैफिक बैरियर क्यों नहीं लगाया गया? हादसे के बाद एफएसएल टीम मौके पर पहुंची, लेकिन शुरुआती घंटों में आरोपियों को पकड़ने में देरी भी सवालों के घेरे में है.
राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या रही?
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इसे दुखद घटना बताते हुए जांच की बात कही है. उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों के साथ जो हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए. हालांकि सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा साफ दिख रहा है और लोग सख्त सजा की मांग कर रहे हैं.
सड़क सुरक्षा में सबसे बड़ी कमी क्या सामने आई?
इस हादसे ने जयपुर की सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी. ओवर स्पीडिंग पर प्रभावी नियंत्रण नहीं. नशे में ड्राइविंग के खिलाफ सख्ती की कमी देखी गई. फुटपाथ और ठेलों की सुरक्षा के इंतजाम नदारद दिखा. ट्रस्ट के नाम पर रजिस्टर्ड गाड़ियों की कमजोर निगरानी भी सामने आई.
यह हादसा क्या संदेश देता है?
यह घटना सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है. ट्रस्ट के नाम पर गाड़ी का दुरुपयोग, पुलिस की लापरवाही और सड़क सुरक्षा की अनदेखी – इन सबका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा. अब देखना यह है कि क्या इस मामले में सिर्फ बयानबाजी होगी या वाकई सख्त कार्रवाई भी होगी.



