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ट्रंप बेचना चाहते थे F16 फाइटर जेट्स , सरकार ने ऐन मौके पर द‍िया झटका, गुस्‍से में ड‍िफेंस म‍िन‍िस्‍टर का इस्‍तीफा

Agency:एजेंसियां

Last Updated:April 22, 2026, 21:03 IST

पेरू के अंतरिम राष्ट्रपति जोस बाल्काजार ने लॉकहीड मार्टिन के एफ 16 जेट्स की 3.4 अरब डॉलर की डील साइनिंग से चंद घंटे पहले रद्द कर दी. इससे रक्षा मंत्री कार्लोस डियाज इतने गुस्‍से में आ गए क‍ि उन्‍होंने तुरंत इस्‍तीफा दे द‍िया. ट्रंप बेचना चाहते थे F16, सरकार ने रोका तो रक्षा मंत्री ने दे द‍िया इस्‍तीफाZoomF16 Fighter Jets की डील पेरू ने रद्द कर दी.

अमेर‍िका अपने हथ‍ियारों को बेचने के ल‍िए पूरी जान लगा देता है. हर हथकंडे अपनाता है. पेरू के साथ भी ट्रंप प्रशासन ने कुछ ऐसा ही क‍िया. सरकार पर दबाव डालकर अरबों रुपये के F-16 फाइटर जेट्स बेचने की डील करवाई. लेकिन जब साइन होने वाली थी, ऐने मौके पर वहां की सरकार को समझ आ गया क‍ि यह खेल है. सरकार अड़ गई और ऐन मौके पर पूरी की पूरी डील कैंस‍िल कर दी गई. इसके बाद तो भूचाल आ गया. पेरू के रक्षा मंत्री कार्लोस डियाज ने गुस्‍से में आकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया. यह डील अमेरिकी रक्षा कंपनियों के लिए बेहद अहम थी, लेकिन पेरू के राष्ट्रपति के एक फैसले ने सब पलट दिया.

पेरू के अंतरिम राष्ट्रपति जोस बाल्काजार इसी साल जुलाई में अपना पद छोड़ने वाले हैं. उन्होंने अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी से F-16 विमान खरीदने के फैसले को अचानक टाल दिया है. बाल्काजार का तर्क है कि इतनी बड़ी और अहम रक्षा खरीद का फैसला अब अगली सरकार के सत्ता में आने के बाद ही लिया जाना चाहिए. वह नई सरकार पर पहले से ही एक बड़ा ड‍िफेंस कमिटमेंट नहीं थोपना चाहते.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते 17 अप्रैल को लॉकहीड मार्टिन के F-16 जेट्स के अधिग्रहण के लिए एक साइनिंग सेरेमनी होने वाली थी. लेकिन राष्ट्रपति बाल्काजार ने इस समारोह के शुरू होने से महज कुछ घंटे पहले इसे रद्द कर दिया. हालांकि, सरकार ने सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की है कि कोई हस्ताक्षर समारोह तय था या नहीं.

संसद में पेशी से पहले रक्षा मंत्री का इस्तीफा

इस अचानक लिए गए फैसले से देश के रक्षा मंत्री कार्लोस डियाज काफी खफा थे. डियाज ने 17 मार्च को ही रक्षा मंत्री का पद संभाला था. डील के इस तरह सस्पेंड होने के बाद, डियाज को पेरू की संसद की रक्षा समिति के सामने पेश होकर सवालों के जवाब देने थे. लेकिन इस पेशी से पहले ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. पेरू में स्थित अमेरिकी दूतावास ने फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

क्या थी डील और अमेरिका का क्या था रोल?

अमेरिका पेरू को फाइटर जेट्स बेचने की पूरी तैयारी कर चुका था. पिछले साल सितंबर में ही अमेरिकी विदेश विभाग ने पेरू को F-16 विमानों और उससे जुड़े सपोर्ट सिस्टम की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी थी. पेंटागन के अनुसार, यह सौदा लगभग करीब 3.4 अरब डॉलर का आंका गया था. इस डील में लॉकहीड मार्टिन को प्रिंसिपल कॉन्ट्रैक्टर बनाया गया था, जबकि जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस और आरटीएक्स कॉर्प भी इसका हिस्सा थे.

पेरू की वायुसेना का खस्ताहाल बेड़ा

पेरू अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने के लिए कई सालों से अलग-अलग रक्षा कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा है. वर्तमान में पेरू की वायुसेना मिराज 2000 और मिग-29 जैसे पुराने विमानों पर निर्भर है, जिन्हें 1980 और 1990 के दशक में खरीदा गया था.

पेरू कुल 24 नए फाइटर जेट्स खरीदना चाहता है. अमेरिका के साथ हो रही यह पहली डील 12 F-16 विमानों के लिए थी. लेकिन अब डील के टलने और रक्षा मंत्री के इस्तीफे से पेरू के वायुसेना आधुनिकीकरण के प्लान पर फिलहाल के लिए ब्रेक लग गया है.

About the AuthorGyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi..com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें

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First Published :

April 22, 2026, 21:03 IST

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