Glaciers catastrophe : climate awareness | दुनिया के 3,100 ‘बेकाबू’ ग्लेशियर मचा सकते हैं कत्लेआम

पूरी दुनिया में जब ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ग्लेशियर के पिघलने और सिकुड़ने की खबरें आ रही हैं, वहीं वैज्ञानिकों ने एक बिल्कुल अलग और बेहद डरावनी चेतावनी दी है. ‘यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ’ के नेतृत्व में हुए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में 3,100 ऐसे ‘सर्जिंग ग्लेशियर’ की पहचान की गई है, जो शांत रहने के बजाय अचानक ‘पागल’ हो जाते हैं. ये ग्लेशियर सालों तक बर्फ जमा करते हैं और फिर अचानक उसे तेजी से आगे की ओर धकेल देते हैं. इनकी यह रफ्तार तबाही का वो मंजर ला सकती है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है.
क्या होते हैं ये ‘सर्जिंग ग्लेशियर’?
आम ग्लेशियर बहुत धीमी गति से आगे बढ़ते हैं, लेकिन सर्जिंग ग्लेशियर का व्यवहार बहुत अलग होता है. जो ग्लेशियर सामान्य रूप से बहुत सुस्त होते हैं, वे अचानक अपनी रफ्तार कई गुना बढ़ा देते हैं.
इस दौरान भारी मात्रा में बर्फ ग्लेशियर के अगले हिस्से की ओर बढ़ती है, जिससे ग्लेशियर अचानक आगे बढ़ जाता है.ये दुनिया के कुल ग्लेशियरों का सिर्फ 1% हैं, लेकिन ये कुल ग्लेशियर क्षेत्र का लगभग पांचवां हिस्सा कवर करते हैं.
बेकाबू ग्लेशियर से पैदा होने वाले 6 बड़े खतरे
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जब ये ग्लेशियर अपनी सीमाओं को लांघते हैं, तो ये 6 तरह की तबाही ला सकते हैं.रास्ते में आने वाली हर चीज की तबाही: ये अचानक आगे बढ़कर इमारतों, सड़कों और खेतों को बर्फ के नीचे दबा सकते हैं.
नदियों का दम घोंटना: ये ग्लेशियर बढ़कर नदियों का रास्ता रोक देते हैं, जिससे अस्थायी झीलें बन जाती हैं. जब ये झीलें टूटती हैं, तो निचले इलाकों में प्रलयंकारी बाढ़ आती है.
भीषण हिमस्खलन : ग्लेशियर का अचानक टूटना या खिसकना पहाड़ों पर बर्फ और मलबे का ऐसा तूफान लाता है जो सब कुछ तबाह कर देता है.
छिपे हुए जल प्रलय : ग्लेशियर के नीचे जमा पानी का अचानक बाहर निकलना बिना किसी चेतावनी के बाढ़ ला सकता है.
खतरनाक दरारें : तेज रफ्तार की वजह से ग्लेशियर में गहरी और चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे पर्वतारोहियों और पर्यटकों के लिए वहां जाना जानलेवा हो जाता है.
समुद्र में बर्फीले पहाड़ : जब ये ग्लेशियर समुद्र में गिरते हैं, तो भारी संख्या में ‘आइसबर्ग’ बनते हैं, जो जहाजों के लिए बड़ा खतरा हैं.
क्लाइमेट चेंज ने बिगाड़ा खेल: अब भविष्यवाणी नामुमकिन
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जलवायु परिवर्तन ने इन ग्लेशियरों के व्यवहार को पूरी तरह अनिश्चित बना दिया है. भारी बारिश या बहुत ज्यादा गर्मी इन ग्लेशियरों को वक्त से पहले ‘सर्ज’ करने के लिए उकसा रही है.
वैज्ञानिकों ने 81 सबसे खतरनाक ग्लेशियरों की पहचान की है, जिनमें से अधिकतर कराकोरम पहाड़ियों में हैं. यहां इनके ठीक नीचे आबादी और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हैं. दुनिया के कुछ हिस्सों में ये सर्ज बढ़ रहे हैं, तो आइसलैंड जैसी जगहों में ये धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं.
ग्लेशियरों पर सैटेलाइट से नजर रखना जरूरी
वैज्ञानिकों का कहना है कि अब पुराने नियम काम नहीं कर रहे हैं. जिस तरह मौसम बदल रहा है, उसे देखते हुए इन 3,100 ग्लेशियरों पर सैटेलाइट और ग्राउंड लेवल से 24 घंटे नजर रखना जरूरी हो गया है.



