Saint Chanchal Nath Barmer | महंत चंचल नाथ बाड़मेर | 14 दिन की तपस्या और बारिश का चमत्कार

Last Updated:April 24, 2026, 05:56 IST
Saint Chanchal Nath: बाड़मेर के प्रसिद्ध संत महंत चंचल नाथजी महाराज की 43वीं बरसी पर श्रद्धालुओं ने उन्हें नमन किया. महाराज को उनके उस चमत्कार के लिए याद किया जाता है जब उन्होंने भीषण अकाल के दौरान 14 दिन की कठोर तपस्या कर बाड़मेर में मूसलाधार बारिश करवाई थी. उनकी आस्था का केंद्र आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान तक फैला हुआ है. दुनियाभर में चंचल प्राग मठ की करीब 60 शाखाएं संचालित हैं, जो सामाजिक और धार्मिक सेवा के कार्यों में जुटी हैं. उनकी शिक्षाएं और लोक-कल्याण के किस्से आज भी रेगिस्तान की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं.
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बाड़मेर. पश्चिमी राजस्थान की रेतीली धरा, जहाँ सूरज की तपिश और अकाल का साया सदियों से रहा है, वहाँ आस्था के चमत्कार की कहानियाँ आज भी हवाओं में तैरती हैं. बाड़मेर के चंचल प्राग मठ के संस्थापक महंत चंचल नाथजी महाराज की 43वीं बरसी के अवसर पर श्रद्धालुओं का जो सैलाब उमड़ा, उसने यह साबित कर दिया कि एक संत की शक्ति समय की सीमाओं से परे होती है. उनके मुरीद केवल सरहद के इस पार नहीं, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी हजारों की संख्या में मौजूद हैं.
बाड़मेर और पश्चिमी राजस्थान का इतिहास अक्सर सूखे की मार से लिखा गया है. बुजुर्ग बताते हैं कि दशकों पहले एक ऐसा भीषण अकाल पड़ा जिसने समूचे मारवाड़ को झकझोर कर रख दिया था. खेतों में हरियाली का नामोनिशान नहीं था, पशु चारे के अभाव में दम तोड़ रहे थे और जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके थे. जब प्रशासन के सारे प्रयास विफल हो गए और चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई, तब महंत चंचल नाथजी महाराज ने एक कठोर संकल्प लिया. उन्होंने जन-कल्याण के लिए भोजन और जल का त्याग कर दिया और ईश्वर से वर्षा की गुहार लगाने हेतु तपस्या में लीन हो गए.
14 दिन की तपस्या और प्रकृति का चमत्कारमहंत चंचल नाथ की यह तपस्या लगातार 14 दिनों तक चली. रेगिस्तान की तपती रेत पर बैठा एक संत जब 14 दिनों तक बिना अन्न-जल के प्रार्थना में डूबा रहा, तो गांव-ढाणियों के लोग भी उम्मीद की डोर थामकर उनके साथ जुड़ते चले गए. श्री चंचल प्राग मठ के वर्तमान महंत अभयनाथ जी महाराज उस ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए बताते हैं कि 14वें दिन प्रकृति ने अपना फैसला सुनाया. आसमान में काली घटाएं छाईं और बाड़मेर में ऐसी मूसलाधार बारिश हुई कि सूखा रेगिस्तान जलमग्न हो गया. कहा जाता है कि महाराज तब तक अपनी समाधि से नहीं उठे, जब तक कि बारिश का पानी स्वयं मठ के भीतर तक नहीं पहुंच गया.
सरहद पार भी गूंजती है आस्थामहंत चंचल नाथजी की ख्याति केवल भारत तक सीमित नहीं रही. आज दुनियाभर में उनके करीब 60 मठ और आश्रम सेवा के केंद्र बने हुए हैं. दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के सिंध इलाके में भी श्री चंचल प्राग मठ की तीन शाखाएँ मौजूद हैं. वहाँ न केवल हिंदू समुदाय बल्कि मुस्लिम समाज के लोग भी बड़ी संख्या में श्रद्धा के साथ शीश नवाने आते हैं. यह मठ आज भी सामाजिक सद्भाव, भजन-कीर्तन और दीन-दुखियों की सेवा का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. उनकी बरसी पर उमड़ने वाला हुजूम इस बात का गवाह है कि चंचल नाथजी आज भी लोगों के दिलों में उम्मीद बनकर जीवित हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Location :
Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
April 24, 2026, 05:56 IST



