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कैसे होती है वन्यजीवों की गणना? क्या है इसका वैज्ञानिक आधार, जानें पूरी प्रक्रिया

बाड़मेर. राजस्थान के बाड़मेर में वन्यजीवों की गणना इन दिनों वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है, जो सुनने में जितनी आसान लगती है, वास्तव में उतनी ही जटिल प्रक्रिया होती है. वन विभाग द्वारा सरहदी बाड़मेर जिले में पूर्णिमा की रात का विशेष चयन किया गया है, क्योंकि इस दौरान चांदनी में दृश्यता बेहतर होती है और वन्यजीव पानी पीने के लिए वॉटर हॉल पर अधिक संख्या में पहुंचते हैं. जिले में करीब 40 वॉटर हॉल चिन्हित किए गए हैं, जहां वन विभाग की टीमें 24 घंटे तैनात रहकर निगरानी कर रही हैं.

इन टीमों का काम पानी पीने आने वाले हर वन्यजीव की संख्या, उनकी गतिविधियों और समय का सटीक रिकॉर्ड तैयार करना है. इस प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों और अनुभव दोनों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रजाति की गिनती में त्रुटि न हो. रेगिस्तानी इलाके में इस तरह की गणना वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. इससे वन विभाग को यह समझने में मदद मिलती है कि किस क्षेत्र में किस प्रजाति की संख्या बढ़ रही है या घट रही है, ताकि उसी अनुसार संरक्षण की रणनीति तैयार की जा सके.

ऐसे कर रहेंं हैं वन्यजीवों की गणना

वन विभाग की टीमें आंखों से देखकर वन्यजीवों की गिनती कर रही है. इसके अलावा ऑटोमैटिक फोटो/वीडियो रिकॉर्ड, पैरों के निशान, मल आदि से अनुमान लगाकर वन्यजीवों की गणना की जा रही है. बाड़मेर जिले के 40 वॉटर हॉल पर वन विभाग के साथ साथ छात्र, वन मित्र और वन्यजीव प्रेमी भी इस बार भाग ले रहे हैं. वन सरंक्षक छोटू सिंह बताते हैं कि उपवन सरंक्षक सविता दईया के निर्देशन में वन्यजीवों के सटीक आंकड़ों की जानकारी जुटाई जा रही है. उन्होंने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा के रात्रि में प्राकृतिक रोशनी में वन्यजीवों की गणना की जाती है. इसमें मोर, चीता, हरिण, खरगोश, नीलगाय, लोमड़ी, भेड़िया, तीतर,बाज सहित अन्य वन्यजीव शामिल होते है.

इस वजह से पूर्णिमा की रात की जाती है गणना

वन विभाग की यह रणनीति जितनी पारंपरिक है, उतनी ही वैज्ञानिक भी. बैशाख पूर्णिमा की वह रात जब चंद्रमा अपनी पूरी आभा के साथ आसमान में चमकता है तो यह वनकर्मियों के लिए नेचुरल सर्चलाइट का काम करती है. बिना किसी कृत्रिम रोशनी और शोर-शराबे के चंद्रमा की दूधिया रोशनी में जलाशय पर आने वाले वन्यजीवों को मचान से स्पष्ट देखा जा सकता है. भीषण गर्मी में जब प्राकृतिक जल स्त्रोत दम तोड़ देते हैं, तब प्यास से बेहाल वन्यजीव कृत्रिम रूप से भरे गए वॉटर पॉइंट्स पर जरूर पहुंचते हैं.

इन रेंजों में चल रही वन्यजीवों की जनगणना

वन विभाग ने गणना के लिए जिले भर के प्रमुख स्थानों को चिह्नित किया है. सबसे अधिक हलचल शिव तहसील के 6 और बाड़मेर तहसील के 7 वाटर हॉल पर रहेगी. सिवाना, बालोतरा, सिणधरी और चौहटन में 4-4, जबकि बायतु, शिव और धोरीमन्ना तहसील में 5-5 वॉटर हॉल पर गणना की जा रही है. इन चिन्हित स्थानों पर विभाग की टीमें और वॉलंटियर्स तैनात है ताकि एक भी वन्यजीव गणना से छूट न पाए.

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