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मुर्गीपालन में गर्मी से बचाव के उपाय | Poultry Farming Summer Management Tips | How to Protect Chickens and Chicks from Diseases

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भीषण गर्मी उजाड़ देगी आपका पोल्ट्री फार्म? बचाने के लिए अपनाएं ये तरीके

Last Updated:May 02, 2026, 14:26 IST

Poultry Farming Summer Tips: बीकानेर में बढ़ती गर्मी और लू के चलते कृषि विज्ञान केंद्र ने मुर्गीपालकों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवायजरी जारी की है. विशेषज्ञों का कहना है कि मुर्गियां और चूजे बढ़ते तापमान के साथ-साथ अमोनिया जैसी जहरीली गैसों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं. इससे बचाव के लिए शेड को पूरी तरह हवादार रखना और वेंटिलेशन का सही प्रबंध करना अनिवार्य है. चूजों को हीट स्ट्रेस से बचाने के लिए शेड के बाहर गीली बोरियां लटकाकर छिड़काव करना चाहिए और बिछावन को हमेशा सूखा रखना चाहिए ताकि गैस का स्तर न बढ़े. खान-पान की बात करें तो आहार में विटामिन-सी के लिए आंवला पाउडर और पाचन के लिए एंजाइम्स का उपयोग करना चाहिए. साथ ही, मुर्गियों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ताजा पानी और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए लिवर टॉनिक देना लाभकारी है. अजोला जैसे प्राकृतिक खाद्यों को शामिल करने से मुर्गियों के उत्पादन में भी सुधार होता है. इन छोटे-छोटे वैज्ञानिक उपायों को अपनाकर पशुपालक भीषण गर्मी में अपने चूजों को सुरक्षित रख सकते हैं.

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Bikaner: राजस्थान में लगातार बढ़ते तापमान और लू के प्रकोप ने पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. बीकानेर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र एवं आईसीएआर-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (ज़ोन-2) के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मुर्गियां अत्यधिक तापमान और शेड के भीतर बनने वाली जहरीली गैसों के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं. यदि चूजों के रहने वाले शेड में हवा के आवागमन (वेंटिलेशन) की सही व्यवस्था नहीं है, तो वहां अमोनिया जैसी घातक गैसों का स्तर बढ़ जाता है. यह गैस न केवल चूजों के विकास को रोकती है, बल्कि उनकी जान के लिए भी खतरा बन जाती है.

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि गर्मी के दौरान चूजों के शेड के पर्दे दिन-रात खुले रखने चाहिए ताकि ताजी हवा आती रहे. शेड के भीतर अधिक भीड़भाड़ रखने से बचना चाहिए, क्योंकि पक्षियों की अधिक संख्या से अंदर का तापमान तेजी से बढ़ता है और उनमें ‘हीट स्ट्रेस’ पैदा होता है. तापमान को नियंत्रित करने के लिए शेड के बाहर गीली बोरियां लटकाकर सुबह-शाम पानी का छिड़काव करना एक प्रभावी तरीका है. इसके अलावा, मुर्गियों के बैठने वाली जगह (बिछावन) को हमेशा सूखा और साफ रखना चाहिए. गीला बिछावन अमोनिया गैस के उत्सर्जन को बढ़ावा देता है, इसलिए इसे समय-समय पर बदलते रहना जरूरी है.

पोषण और इम्युनिटी पर दें विशेष ध्यानभीषण गर्मी में चूजों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए चौबीसों घंटे साफ और ताजा पानी उपलब्ध होना चाहिए. विशेषज्ञों ने पोषण प्रबंधन के तहत मुर्गियों के आहार में पाचक एंजाइम और विटामिन-सी शामिल करने का सुझाव दिया है. इसके लिए किसान आहार में आंवला पाउडर मिला सकते हैं, जो प्राकृतिक रूप से गर्मी से लड़ने में मदद करता है. साथ ही, पानी में लिवर टॉनिक मिलाने से चूजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) मजबूत होती है.

अजोला और प्राकृतिक परजीवी नियंत्रणमुर्गीपालन में ‘अजोला’ के उपयोग को बेहद लाभकारी बताया गया है. अजोला प्रोटीन और खनिजों का खजाना है, जिसे आहार में शामिल करने से मुर्गियों का विकास तेजी से होता है और अंडा उत्पादन में भी सुधार आता है. इसके अलावा, देसी मुर्गियों को पशुओं के चरने के बाद खुले मैदान में छोड़ना चाहिए. इससे मुर्गियां पशुओं के शरीर पर लगने वाले बाहरी परजीवियों को खा लेती हैं, जिससे पशुओं में एनीमिया का खतरा कम होता है और मुर्गियों को प्राकृतिक आहार मिल जाता है. इन वैज्ञानिक सुझावों को अपनाकर किसान गर्मी के मौसम में होने वाले आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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