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Surat Bharuch Expressway | NH-48 India First Barrier-Less MLFF Tolling System | भारत का पहला बैरियर-लेस टोल; सूरत-भरूच एक्सप्रेस-वे पर खुद कटेगा पैसा

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जीरो वेटिंग, खुद कटेंगे पैसे! सूरत-भरूच एक्सप्रेस-वे पर पहला बैरियर-लेस टोल

Last Updated:May 02, 2026, 16:43 IST

Surat Bharuch NH-48 Expressway: सड़कों, हाईवे और एक्सप्रेस-वे के बिछते जाल की वजह से ना केवल एक जगह से दूसरे जगह तक पहुंचना ना केवल आसान हो रहा है बल्कि काफी किफायती भी साबित हो रहा है. सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों को टोल प्लाजा पर जाम से परेशानी का सामना करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है. अब भारत सरकार ये भी टेंशन दूर करने जा रही है. अब आपको एक्सप्रेस-वे पर टोल देने के लिए ना तो रुकना पड़ेगा और ना ही अपनी गाड़ी की रफ्तार कम करनी पड़ेगी. दरअसल, भारत सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने गुजरात के सूरत-भरूच सेक्शन (NH-48) पर स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर देश का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम शुरू कर दिया है. इससे न सिर्फ समय और ईंधन की भारी बचत होगी, बल्कि प्रदूषण भी कम होगा. (सभी फोटो एआई की मदद से बनाए गए हैं.)

भारत सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) ने देश के टोलिंग सिस्टम में एक ऐतिहासिक बदलाव कर दिया है. शुक्रवार, 1 मई को भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम चालू हुआ है. यह सिस्टम गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच सेक्शन पर स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर शुरू किया गया है. चोर्यासी टोल प्लाजा देश भर में यूजर फीस कलेक्शन के मामले में टॉप 10 प्लाजा में गिना जाता है. 8-लेन वाले इस शानदार एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा है. अब यहां बिना रुके आसानी से सफर किया जा सकेगा.

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दिल्ली-मुंबई NH-48 के सूरत-भरूच सेक्शन पर शुरू हुआ यह सिस्टम टोलिंग इकोसिस्टम को डिजिटल बनाने और राष्ट्रीय राजमार्गों के बुनियादी ढांचे को वैश्विक मानकों तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. गडकरी ने कहा कि इस सिस्टम से टोल संचालन में मानवीय दखल कम होगा, यात्रा का समय घटेगा, हाईवे पर जाम से मुक्ति मिलेगी. साथ ही ईंधन की बचत के साथ गाड़ीों से होने वाला उत्सर्जन भी कम होगा.

अब सवाल यह है कि आखिर यह नई टेक्नोलॉजी क्या है और यह बिना बैरियर के पैसे कैसे काट लेगी? दरअसल, MLFF सिस्टम में बूम बैरियर (रास्ता रोकने वाले डंडे) की आवश्यकता पूरी तरह से खत्म हो जाती है. गाड़ियों को टोल चुकाने के लिए एक सेकंड के लिए भी रुकना नहीं पड़ता है. इसके बजाय, इस प्रणाली में हाई-परफॉर्मेंस रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) रीडर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है. ये कैमरे और रीडर चलती गाड़ी के फास्टैग और गाड़ी पंजीकरण संख्या (VRN) को स्कैन कर लेते हैं.

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इस नई तकनीक को सटीक रूप से लागू करने के लिए पुराने टोल प्लाजा से कुछ मीटर की दूरी पर छह लेन वाले राजमार्ग के दोनों ओर चार बड़े गैन्ट्री या फ्रेम स्ट्रक्चर स्थापित किए गए हैं. इन स्ट्रक्चर्स पर 16 हाई-क्वालिटी वाले कैमरे लगाए गए हैं, जो तेज रफ्तार गाड़ियों को भी आसानी से ट्रैक कर सकते हैं. इंडियन हाइवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) के एक अधिकारी ने बताया कि पहले का सामान्य RFID रीडर 10-12 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर फास्टैग डिटेल पढ़ पाता था, लेकिन यह नया एडवांस रीडर बहुत तेज गति पर भी गाड़ियों की डिटेल्स आसानी से कैप्चर कर सकता है.

चोर्यासी टोल प्लाजा पर इस अत्याधुनिक सिस्टम को आईसीआईसीआई बैंक द्वारा विकसित किया गया है. इसके लिए पिछले साल अगस्त में NHAI के लिए काम करने वाली एजेंसी- इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) और बैंक के बीच एक समझौता हुआ था. IHMCL के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि सरकार को इस परियोजना पर अपनी जेब से कोई खर्च नहीं करना पड़ा है. प्रोजेक्ट की पूरी लागत ‘पे-एज-यू-गो’ सिस्टम की तरह operating expenditure मॉडल के तहत बैंकों के माध्यम से पूरी की जा रही है, जिसके एवज में टोल का एक हिस्सा बैंकों को जाएगा.

इस बैरियर-लेस तकनीक को सफल बनाने के लिए NHAI ने पहले ही कई बड़े कदम उठाए थे ताकि लोग टोल टैक्स देने से बच न सकें. इनमें सबसे अहम फैसला हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट्स (HSRP) को लागू करना था, ताकि ANPR कैमरे नंबर प्लेट को ठीक से पढ़ सकें. इसके अलावा, ‘एक गाड़ी, एक फास्टैग’ नियम लागू किया गया, जिसने एक ही फास्टैग को कई गाड़ियों के लिए इस्तेमाल करने या एक गाड़ी में कई फास्टैग लगाने के झंझट पर पूरी तरह से रोक लगा दी.

नए नियमों में लागू करने के उपाय और बकाया टोल की वसूली के लिए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को राष्ट्रीय गाड़ी रजिस्ट्री (VAHAN) के साथ जोड़ने का भी प्रावधान किया गया है. NHAI ने पिछले महीने सभी फास्टैग जारी करने वाले बैंकों को निर्देश दिया था कि वे जारी किए गए फास्टैग से जुड़े VRN (लाइसेंस प्लेट नंबर) को तुरंत मान्य करें. गलत या अमान्य नंबर प्लेट से जुड़े फास्टैग को ब्लैकलिस्ट करने का भी कड़ा निर्देश दिया गया, ताकि कोई भी बिना पैसे दिए टोल न पार कर सके.

बिना टोल चुकाए गुजरने वालों पर नकेल कसने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने मार्च में नए नियम भी बनाए हैं. यदि कोई गाड़ी बिना टोल दिए गुजर जाता है, तो उसे संबंधित टोल प्लाजा पर लागू टोल राशि का दोगुना भुगतान पेनाल्टी के रूप में करना होगा. हालांकि, यदि यह भुगतान ई-नोटिस मिलने के 72 घंटों के भीतर कर दिया जाता है, तो केवल मूल टोल फीस ही लगेगी. ऐसे मामलों में गाड़ी मालिकों को ई-नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें गाड़ी का विवरण, घटना की तारीख, स्थान और देय राशि शामिल होगी.

चोर्यासी टोल प्लाजा के बाद, IHMCL ने देश के कई अन्य एक्सप्रेसवे और राजमार्गों पर इस MLFF सिस्टम को लगाने के लिए अनुबंध दिए हैं. इनमें हरियाणा में NH-44 पर घरौंडा, गुजरात में NH-48 पर बोरियाच, राजस्थान में NH-48 पर दौलतपुरा, मनोहरपुरा और शाहजहांपुर, दिल्ली में UER-II पर मुंडका, तमिलनाडु में NH-48 पर नेमिली और चेनसमुद्रम तथा NH-45 पर परनूर शामिल हैं. इसके अलावा आंध्र प्रदेश के कसेपल्ली, अमकथाडु और मरूर तथा महाराष्ट्र के कुछ टोल प्लाजा पर भी यह सिस्टम लगेगा और 108 अतिरिक्त प्लाजा के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं.

सरकार की योजना इस प्रणाली को हर साल 200 से अधिक टोल प्लाजा पर लागू करने की तैयारी में है. यानी कि सरकार 1000 से भी ज्यादा टोल प्लाजा को एआई बेस्ड करने जा रही है. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, मार्च 2029 तक देश के सभी चार लेन और उससे बड़े राष्ट्रीय राजमार्गों व एक्सप्रेसवे पर यह मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम लागू किए जाने का अनुमान है. वर्तमान में देश भर में लगभग 1,100 टोल प्लाजा हैं, जिससे पूरे भारत में बैरियर-मुक्त यातायात का यह विजन जल्द ही जमीन पर उतरेगा.

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