Today Weather Live | Aaj Ka Mausam Live: 17 राज्यों में आंधी का तांडव, UP-बिहार ओले-बिजली का प्रहार, 75KM की आंधी-बारिश, IMD का अलर्ट

Aaj Ka Mausam Live: देश में मई के महीने में गर्मी के बजाय मौसम बदल गया है. दिन में धूप आने के बाद अचानक मौसम सुहावना हो जा रहा है. आंधी, बारिश, ओले और बिजली चारों का एक साथ हमला कई राज्यों में देखने को मिल रहा है. 5 मई के लिए मौसम विभाग (IMD) ने जो चेतावनी जारी की है. 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली आंधी न सिर्फ पेड़ों और बिजली के खंभों को गिरा सकती है, बल्कि जनजीवन को पूरी तरह ठप भी कर सकती है. सवाल यह भी है कि क्या यह सामान्य प्री-मानसून गतिविधि है या बदलते जलवायु का नया चेहरा? क्योंकि जिस तरह एक साथ 17 राज्यों में अलर्ट जारी हुआ है, वह हाल के सालों में मई के महीने में कम ही देखने को मिला है.
दिलचस्प यह है कि यह मौसम सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है. उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत तक हर जगह इसका असर दिख रहा है. पश्चिमी विक्षोभ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और स्थानीय वेदर सिस्टम का ऐसा मेल बना है कि पूरा देश एक साथ मौसम के दबाव में है. उत्तर भारत में जहां धूल भरी आंधी और ओलावृष्टि का खतरा है, वहीं पूर्वोत्तर में तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की आशंका है. दक्षिण भारत में भी राहत के साथ हल्की बेचैनी है क्योंकि बारिश के बावजूद गर्मी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि लोग न सिर्फ मौसम अपडेट पर नजर रखें, बल्कि सतर्क भी रहें.
पटना में अचानक मौसम का मिजाज बदल गया.
देश के कई हिस्सों में पिछले 48 घंटों में मौसम ने अचानक पलटी मारी है. तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने तापमान में गिरावट जरूर लाई है, लेकिन इसके साथ ही जोखिम भी बढ़ा है. कई राज्यों में ओलावृष्टि ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है, जबकि बिजली गिरने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. मौसम विभाग का कहना है कि यह स्थिति अगले 24 से 48 घंटों तक बनी रह सकती है. ऐसे में यात्रियों, किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए विशेष सावधानी जरूरी है.
मौसम विभाग के मुताबिक इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ और हवा के ऊपरी स्तर पर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन हैं. ये सिस्टम मिलकर पूरे उत्तर और मध्य भारत में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं. इसका असर यह है कि दिन में गर्मी और शाम को अचानक तेज आंधी-बारिश देखने को मिल रही है. यही वजह है कि कई शहरों में मौसम का मिजाज हर कुछ घंटों में बदल रहा है.
दिल्ली-NCR में मौसम का बदला मिजाज
दिल्ली-एनसीआर में पिछले दो दिनों के भीतर मौसम ने ऐसा पलटा मारा है कि लोगों को गर्मी से राहत के साथ-साथ एक अलग तरह की सतर्कता भी महसूस हो रही है. धूल भरी तेज आंधी, अचानक घने बादल और फिर झमाझम बारिश इन तीनों ने मिलकर पूरे इलाके का तापमान नीचे ला दिया है. कई जगहों पर पेड़ गिरने और ट्रैफिक प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं. 5 मई को भी मौसम विभाग ने बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है. हवा की रफ्तार 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है, लेकिन आंधी के समय झोंके इससे ज्यादा तेज हो सकते हैं. सबसे बड़ी राहत यह रही कि AQI में सुधार दर्ज किया गया है, जिससे हवा पहले की तुलना में साफ हुई है और लोगों को सांस लेने में राहत मिली है.
उत्तर प्रदेश में आंधी-बारिश का असर
उत्तर प्रदेश में मौसम इस समय पूरी तरह से सक्रिय मोड में है और कई जिलों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है. मेरठ, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर जैसे बड़े शहरों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है. हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, इससे बिजली के खंभे, पेड़ और कच्चे मकानों को नुकसान का खतरा बना हुआ है. पिछले 24 घंटों में कई जिलों में तापमान में 3 से 5 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है. हालांकि, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि यह राहत अस्थायी है और आंधी-तूफान के दौरान सतर्क रहना जरूरी है.
बिहार में बिजली और ओलों का खतरा
बिहार में मौसम का रुख इस समय सबसे ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि यहां बारिश के साथ-साथ बिजली गिरने और ओलावृष्टि का खतरा भी बना हुआ है. पटना, गया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में तेज बारिश के साथ वज्रपात की आशंका जताई गई है. कई इलाकों में पहले ही ओले गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इससे किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा है. मौसम विभाग ने खास तौर पर लोगों को खुले में न रहने, पेड़ों के नीचे खड़े न होने और मोबाइल फोन का सीमित इस्तेमाल करने की सलाह दी है. ग्रामीण इलाकों में बिजली गिरने की घटनाएं ज्यादा होती हैं, इसलिए वहां अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है.
झारखंड में भारी बारिश की चेतावनी
झारखंड के कई जिलों में मौसम तेजी से बदल रहा है और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. रांची, बोकारो, धनबाद, देवघर, गिरिडीह और दुमका जैसे इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई गई है. हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है. कई इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां जल निकासी की समस्या पहले से बनी रहती है. मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 24 से 48 घंटे तक यह स्थिति बनी रह सकती है और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है.
राजस्थान में आंधी और बारिश से राहत
राजस्थान में जहां कुछ दिन पहले तक भीषण गर्मी और लू का प्रकोप था वहीं अब मौसम ने राहत दी है. जयपुर, सीकर, जोधपुर, उदयपुर, अलवर और भरतपुर जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है. तेज हवाओं के साथ धूल भरी आंधी भी चल सकती है, जिससे विजिबिलिटी कम हो सकती है और सड़क हादसों का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि इस बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली है. किसानों के लिए यह मिश्रित स्थिति है क्योंकि जहां बारिश फायदेमंद है, वहीं तेज हवाएं फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
राजस्थान में जहां कुछ दिन पहले तक भीषण गर्मी और लू का प्रकोप था.
मध्य प्रदेश में तेज हवाओं का अलर्ट
मध्य प्रदेश में मौसम ने करवट ली है और कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया है. भोपाल, जबलपुर, रीवा, सतना, विदिशा और ग्वालियर जैसे जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंच सकता है. पिछले कुछ दिनों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को राहत मिली है, लेकिन मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अचानक तेज आंधी-तूफान से सावधान रहना जरूरी है.
पंजाब-हरियाणा में मौसम का उतार-चढ़ाव
पंजाब और हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ का असर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है. कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और गर्मी से राहत मिली है. अमृतसर, लुधियाना, पटियाला, चंडीगढ़, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में मौसम लगातार बदल रहा है. किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि तेज हवाएं और ओलावृष्टि खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.
दूसरी ओर अगले चरण में भी मौसम का यही रुख बने रहने की संभावना है. कई जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं ओलावृष्टि तथा बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं. प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है.
उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी और बारिश
उत्तराखंड में देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी है. ऊंचाई वाले इलाकों जैसे केदारनाथ और बद्रीनाथ में बर्फबारी की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और ठंड बढ़ गई है.
हिमाचल प्रदेश में शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और सोलन जैसे जिलों में लगातार बारिश हो रही है. कई ऊंचे इलाकों में बर्फबारी भी दर्ज की गई है, जिससे पर्यटन और यातायात प्रभावित हुआ है.
जम्मू-कश्मीर में भी मौसम खराब बना हुआ है. श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी है. इससे तापमान में गिरावट आई है और लोगों को ठंड का सामना करना पड़ रहा है.
पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का खतरा
पूर्वोत्तर भारत में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदला हुआ है और यहां लगातार भारी बारिश का दौर जारी है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है. नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक स्थिति गंभीर बने रहने की चेतावनी दी है.
दक्षिण भारत में बारिश का असर
दक्षिण भारत के राज्यों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है. केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से बारिश हो रही है. हालांकि कुछ इलाकों में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है, लेकिन बारिश के कारण तापमान में हल्की गिरावट आई है. तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है. आने वाले दिनों में भी बारिश का यह सिलसिला जारी रहने की संभावना है, जिससे मौसम सुहावना तो रहेगा लेकिन सतर्कता जरूरी होगी.
क्या यह मौसम असामान्य है?
यह प्री-मानसून का हिस्सा जरूर है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर एक साथ कई सिस्टम सक्रिय होना थोड़ा असामान्य माना जा सकता है. जलवायु परिवर्तन भी इसमें भूमिका निभा सकता है.
किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
किसान, यात्री, निर्माण कार्य में लगे लोग और खुले में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं. तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा इनके लिए ज्यादा है.
क्या तापमान में गिरावट लंबे समय तक रहेगी?
नहीं, यह गिरावट अस्थायी है. जैसे ही मौसम सिस्टम कमजोर होंगे, तापमान फिर से बढ़ सकता है.
क्या फसलों को नुकसान हो सकता है?
हां, ओलावृष्टि और तेज हवाओं से गेहूं, फल और सब्जियों को नुकसान हो सकता है. किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है.
इस मौसम में क्या सावधानियां जरूरी हैं?
खुले में न रहें, पेड़ों के नीचे खड़े न हों, बिजली गिरने के दौरान सुरक्षित जगह पर जाएं और मौसम अपडेट लगातार देखते रहें.



