भरतपुर की लाइफलाइन कहे जाने वाली नहर बनी नाला! गंदगी में डूबी सुजान गंगा, खत्म होने की कगार पर पहुंची यह धरोहर

Last Updated:May 02, 2026, 12:29 IST
Sujan Ganga canal, Bharatpur : भरतपुर की पहचान और जीवनरेखा मानी जाने वाली सुजान गंगा नहर आज बदहाली की कहानी बन चुकी है. कभी शहर को पानी देने वाली यह नहर अब कचरे, प्लास्टिक और बदबूदार पानी से भर गई है. प्रशासनिक लापरवाही के चलते इसका अस्तित्व खतरे में है. स्थानीय लोग नाराज हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल्द सफाई और संरक्षण नहीं हुआ, तो यह ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए खत्म हो सकती है.
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भरतपुर : भरतपुर शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली सुजान गंगा नहर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाती नजर आ रही है. कभी यह नहर शहर के लिए पानी का प्रमुख स्रोत हुआ करती थी लेकिन अब गंदगी कचरे और दूषित पानी के कारण इसकी स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है. समय के साथ प्रशासनिक लापरवाही और रखरखाव की कमी ने इस ऐतिहासिक धरोहर को अपनी पहचान खोने पर मजबूर कर दिया है.
एक समय था जब सुजान गंगा नहर भरतपुर के लोगों की प्यास बुझाने का मुख्य जरिया थी यह नहर पेयजल के साथ-साथ सिंचाई के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी आसपास के क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के लिए यह नहर किसी वरदान से कम नहीं थी इसकी स्वच्छता और जल प्रवाह ने शहर के जीवन को सुचारू बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई थी इतना ही नहीं यह नहर भरतपुर किले की सुरक्षा व्यवस्था का भी एक मजबूत हिस्सा थी किले के चारों ओर पानी की यह धारा प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करती थी.
सुजान गंगा नहर बनी गंदगी का ढेरजिससे बाहरी हमलों से बचाव संभव हो पाता था इस दृष्टि से देखा जाए तो सुजान गंगा नहर सिर्फ पानी का स्रोत ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व की भी धरोहर रही है. स्थानीय निवासियों ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वर्तमान में इस नहर की हालत पूरी तरह बदल चुकी है. जगह-जगह कचरे के ढेर, प्लस्टिक और गंदगी ने इसके जल को दूषित कर दिया है. नहर में बहने वाला पानी अब साफ नहीं बल्कि बदबूदार और प्रदूषित हो चुका है. कई स्थानों पर पानी का प्रवाह भी बाधित हो गया है.
ऐतिहासिक नहर अब बदहाल, संकट गहरायाजिससे यह नहर अब एक गंदे नाले में तब्दील होती नजर आ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी सफाई और संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह नहर पूरी तरह खत्म हो सकती है. यह न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक होगा बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान पर भी गहरा असर डालेगा लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी भी है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है. सुजान गंगा नहर का पुनर्जीवन संभव है. लेकिन इसके लिए नियमित सफाई से ही.
सुजान गंगा बचाओ, वरना मिटेगी पहचानजल प्रवाह की बहाली और कचरा फेंकने पर सख्त रोक जरूरी है. साथ ही जन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को भी इसके संरक्षण के लिए जिम्मेदार बनाना होगा भरतपुर की यह ऐतिहासिक और जीवनदायिनी नहर आज अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां सिर्फ इसके नाम और इतिहास को ही जान पाएंगी अब जरूरत है कि प्रशासन और आमजन मिलकर इस धरोहर को बचाने के लिए गंभीर प्रयास करें
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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Location :
Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan



