Taigei Submarine: लिथियम बैटरी की ताकत, समंदर के नीचे स्पेस ही स्पेस, परमाणु पनडुब्बी से भी खतरनाक है जापान की ये व्हेल?

नई दिल्ली. समुद्र की अथाह गहराइयों में जब सन्नाटा भी शोर करने लगे तब समझ लीजिए कि टाइगेई सबमरीन शिकार पर निकली है. जापान की यह बड़ी व्हेल कोई साधारण पनडुब्बी नहीं बल्कि समंदर के नीचे चलता-फिरता एक ऐसा अदृश्य काल है जो बिना किसी पदचाप के दुश्मन का नामोनिशान मिटा सकता है. जहां दुनिया की शक्तिशाली नौसेनाएं भारी-भरकम परमाणु इंजनों के शोर में फंसी हैं, वहीं जापान ने लिथियम-आयन की खामोश ताकत से युद्ध का पूरा व्याकरण ही बदल दिया है. यह समंदर के सीने में छिपी वह खंजर है, जिसकी चमक तो दिखती है, पर आहट कभी नहीं आती.
मुख्य तकनीकी विशेषताएं
· लंबाई: 84 मीटर (लगभग 275 फीट)
· चौड़ाई (Beam): 9.1 मीटर
· वजन (Displacement): 3,000 टन (सतह पर)
· रफ्तार: 20 नॉट (लगभग 37 किमी/घंटा) पानी के अंदर.
· चालक दल (Crew): 70 सदस्य (इसमें महिला चालक दल के लिए अलग से विशेष व्यवस्था की गई है).
क्रांतिकारी क्षमता और लिथियम-आयन बैटरी
Taigei-class की सबसे बड़ी ताकत इसकी Lithium-ion (Li-ion) बैटरी प्रणाली है.
· फायदा: पारंपरिक लीड-एसिड बैटरी के मुकाबले ये अधिक ऊर्जा स्टोर करती हैं और तेजी से चार्ज होती हैं.
· AIP की जरूरत नहीं: यह तकनीक इतनी पावरफुल है कि इसे भारी-भरकम ‘एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन’ (AIP) सिस्टम की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे पनडुब्बी के अंदर जगह बचती है और यह पानी के अंदर अधिक समय तक और तेज गति से रह सकती है.
रेंज और पेलोड
· रेंज: इसकी सटीक रेंज गुप्त है लेकिन लिथियम-आयन बैटरी के कारण यह अपने पूर्ववर्ती (Soryu-class) से काफी अधिक दूरी तय कर सकती है. यह हफ्तों तक बिना सतह पर आए दुश्मन की निगरानी कर सकती है.
· पेलोड (हथियार):
o 6 टॉरपीडो ट्यूब (533mm): इसमें ‘HU-606’ ट्यूब लगे हैं.
o Type 18 टॉरपीडो: यह जापान का सबसे आधुनिक टॉरपीडो है जो रडार और सोनार की पकड़ में नहीं आता.
o Harpoon Anti-ship Missiles: यह पानी के अंदर से ही दुश्मन के जहाजों को नष्ट करने के लिए ‘UGM-84L Harpoon Block II’ मिसाइलें दाग सकती है.
o भविष्य की क्षमता: इसमें भविष्य में हाइपरसोनिक मिसाइलें और Type 12 एंटी-शिप मिसाइलें (लॉन्ग रेंज) लगाने की योजना है.
परमाणु सबमरीन से क्यों बेहतर है टाइगेई?
1. खामोशी का स्तर: ‘Deadly Silence’ बनाम ‘Mechanical Hum’परमाणु पनडुब्बी का सबसे बड़ा दुश्मन उसका अपना रिएक्टर है.
परमाणु पनडुब्बी: इसके परमाणु रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए ‘कूलेंट पंप’ को चौबीसों घंटे चलाना पड़ता है. ये पंप एक हल्की लेकिन निरंतर आवाज पैदा करते हैं, जिसे आधुनिक सोनार पकड़ सकते हैं.Taigei-class: इसमें कोई रिएक्टर या इंजन नहीं चलता. लिथियम-आयन बैटरी पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक है. जब यह बैटरी मोड पर होती है तो यह 100% खामोश होती है. समंदर के नीचे इसे ढूंढना अंधेरे कमरे में काली बिल्ली को ढूंढने जैसा है.2. थर्मल सिग्नेचरपरमाणु रिएक्टर बहुत अधिक गर्मी पैदा करते हैं, जिसे पानी में छोड़ना पड़ता है. इससे पनडुब्बी के आसपास के पानी का तापमान बदल जाता है, जिसे थर्मल सेंसर्स से पहचाना जा सकता है. लिथियम बैटरी वाली टाइगेई क्लास का थर्मल फुटप्रिंट लगभग शून्य होता है.3. साइज और फुर्तीपरमाणु पनडुब्बियां आकार में बहुत विशाल (7,000 से 18,000 टन) होती हैं, जिससे वे उथले समुद्र (Shallow Water) या तंग समुद्री रास्तों में आसानी से नहीं मुड़ सकतीं.Taigei (3,000 टन) अपने छोटे आकार और X-Rudder तकनीक के कारण किसी मछली की तरह फुर्तीली है. यह तटीय इलाकों में छिपकर हमला करने में परमाणु पनडुब्बी से कहीं आगे है.4. लिथियम बैटरी बनाम AIPअन्य डीजल पनडुब्बियों में AIP (Air Independent Propulsion) सिस्टम होता है जो गैसों और मशीनों का उपयोग करता है. टाइगेई ने इसे हटाकर सिर्फ लिथियम बैटरियों का इस्तेमाल किया है.
सवाल-जवाब
क्या टाइगेई परमाणु पनडुब्बी से बेहतर है?
यह ‘Endurance’ (लंबी दूरी) में परमाणु पनडुब्बी का मुकाबला नहीं कर सकती, लेकिन ‘Quietness’ (खामोशी) में यह उससे बेहतर है. परमाणु पनडुब्बी के रिएक्टर को ठंडा करने के लिए पंप हमेशा चलते रहते हैं, जबकि Taigei बैटरी पर चलते समय पूरी तरह मौन रहती है.
इसकी ‘X-shaped’ रडर (Rudder) का क्या काम है?
पिछले हिस्से में लगा ‘X’ आकार का रडर इसे समुद्र की गहराई और कम गहरे पानी (Shallow waters) दोनों में गजब की फुर्ती (Maneuverability) देता है, जिससे यह तंग समुद्री रास्तों में आसानी से मुड़ सकती है.
इसमें नया सोनार सिस्टम क्या है?
इसमें ZQQ-8 सोनार सुइट लगा है. यह ऑप्टिक-फाइबर तकनीक का उपयोग करता है, जिससे यह बहुत दूर से ही दुश्मन की पनडुब्बियों की हल्की सी आहट को भी पहचान लेती है.
क्या यह भारत के लिए काम की है?
भारत अपने Project-75I के तहत नई पनडुब्बियां खोज रहा है. जापान की यह तकनीक (बगैर AIP के लिथियम-आयन) दुनिया के लिए एक मिसाल है, हालांकि जापान फिलहाल अपनी पनडुब्बियां निर्यात करने में बहुत सख्त नियम रखता है.



