Rajasthan

कोर्ट का सख्त रुख, कलेक्टर ऑफिस की कुर्की के आदेश, लेकिन कर्मचारियों ने बना दिया मजाक!

Last Updated:May 05, 2026, 13:40 IST

Alwar News: अलवर में आयुर्वेद कंपाउंडर नियुक्ति विवाद पर कोर्ट आदेश न मानने से एएमजेएम कोर्ट ने कलेक्टर ऑफिस का फर्नीचर कुर्क कराया, सरकारी गाड़ी तक कुर्की के आदेश दिए. घटना उस समय और दिलचस्प हो गई जब कार्रवाई करने पहुंची टीम को कई तरह की अड़चनों का सामना करना पड़ा. बताया जा रहा है कि टीम के पहुंचने से पहले ही अलवर कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला सरकारी गाड़ी लेकर फील्ड में निकल गईं.अलवर में कोर्ट सख्त, कलेक्टर ऑफिस की कुर्की के आदेश! कर्मचारी ने मजाक बना दियाZoomअलवर कलेक्टर ऑफिस फर्नीचर कुर्क, कोर्ट बनाम प्रशासन टकराव

अलवर. अलवर से आई यह खबर सिस्टम के अंदर चल रही खींचतान को खुलकर सामने रख देती है. मामला एक आयुर्वेद कंपाउंडर की नियुक्ति से जुड़ा है, जहां कोर्ट के आदेश की पालना नहीं करने पर अब सीधा एक्शन देखने को मिला. अतिरिक्त मुंसिफ और न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 के आदेश पर जिला कलेक्टर ऑफिस का फर्नीचर कुर्क कर लिया गया. बात यहीं नहीं रुकी, कोर्ट ने कलेक्टर के कार्यालय भवन और सरकारी गाड़ी तक कुर्क करने के आदेश दे दिए.

घटना उस समय और दिलचस्प हो गई जब कार्रवाई करने पहुंची टीम को कई तरह की अड़चनों का सामना करना पड़ा. बताया जा रहा है कि टीम के पहुंचने से पहले ही अलवर कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला सरकारी गाड़ी लेकर फील्ड में निकल गईं. वहीं, नजारत विभाग की टीम को कलेक्टर ऑफिस में एंट्री तक नहीं दी गई. माहौल ऐसा बना जैसे आदेश को लागू करने में ही रोक लगाने की कोशिश हो रही हो.

कोर्ट के आदेश vs प्रशासन, बीच में अटकी कार्रवाईइस पूरे मामले में डिक्रीधारी परिवादी बसंत ने जानकारी दी कि कोर्ट ने साफ तौर पर आदेश दिया था, लेकिन उसकी पालना नहीं हो रही थी. जब नजारत विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो एडीएम सिटी बीना महावर और कलेक्टर के पीए बिजेंद्र सिंह राठौड़ ने कलेक्टर की अनुपस्थिति का हवाला देकर कार्रवाई रुकवा दी. यानी साफ तौर पर कहा गया कि कलेक्टर नहीं हैं, इसलिए आगे की प्रक्रिया फिलहाल नहीं हो सकती.

हालांकि मामला यहीं शांत नहीं हुआ. नजारत विभाग के कार्मिक गिरीश गुप्ता ने कोर्ट में शिकायत करने की चेतावनी दी. इसके बाद हालात थोड़ा बदले और अधिकारी सीमित कार्रवाई के लिए तैयार हुए. लेकिन जिस तरह से कार्रवाई हुई, उस पर भी सवाल उठ रहे हैं.

सीमित कुर्की, सिर्फ कुछ फर्नीचर ही बाहर आयाबताया जा रहा है कि कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से लेने के बजाय सिर्फ औपचारिकता निभाई गई. कलेक्ट्रेट कर्मचारियों ने एक बड़ी कुर्सी, एक टेबल और तीन साधारण कुर्सियां बाहर लाकर दे दीं. इन्हें मिनी सचिवालय के खाली पड़े कमरा नंबर 347 में रखकर सील कर दिया गया.

जबकि कोर्ट के आदेश काफी स्पष्ट थे. एएमजेएम कोर्ट ने मिनी सचिवालय परिसर में जिला कलेक्टर के कार्यालय भवन, वहां मौजूद सभी लोहे और लकड़ी के फर्नीचर और कलेक्टर की सरकारी गाड़ी तक कुर्क करने के निर्देश दिए थे. लेकिन मौके पर जो हुआ, वो इन आदेशों के मुकाबले बहुत सीमित नजर आया.

अब इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या कोर्ट के आदेशों को पूरी तरह लागू किया गया या सिर्फ दिखावे के लिए कुछ चीजें कुर्क कर दी गईं. फिलहाल मामला यहीं थमा नहीं है, क्योंकि नजारत विभाग की तरफ से आगे कोर्ट में शिकायत की बात कही गई है. आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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