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तम‍िलनाडु से बड़ा अपडेट! व‍िजय थलापत‍ि सरकार बनाने के ल‍िए लेंगे बीजेपी का सहारा? TVK के जवाब से कांग्रेस खुश होगी या दुखी…

नई द‍िल्‍ली. विजय थलापत‍ि की पार्टी TVK (तमिलग विदुथलाई काच्छि) ने सरकार बनाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं. टीवीके ने विधानसभा में 108 सीटें जीती हैं, लेकिन बहुमत से अभी पीछे है. ऐसे में अब सारा खेल समर्थन जुटाने पर टिका है. कांग्रेस ने व‍िजय थलापत‍ि को समर्थन दे द‍िया है लेकि‍न अब टीवीके ने एनडीए से समर्थन लेने या देने पर पार्टी की राय साफ कर दी है. व‍िजय की टीवीके पार्टी ने जो फैसला ल‍िया है वो कांग्रेस के ल‍िए खुश होने वाली है या दुखी करने वाली जानने के ल‍िए पढ़ें पूरी र‍िपोर्ट…

सबसे बड़ा सवाल: क्या TVK बीजेपी या एनडीए के दरवाजे पर जाएगी? टीवीके नेता सीटीआर निर्मल कुमार ने साफ कर दिया है कि पार्टी का भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए से संपर्क करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा कि हमने न तो मांगा है और न ही ऐसा करने का इरादा है यानी फिलहाल टीवीके ने बीजेपी या एनडीए से दूरी बनाए रखी है. यही बात कांग्रेस के लिए राहत भी है और चिंता भी.

कांग्रेस खुश हो या दुखी? – खुश इसलिए क्योंकि टीवीके ने साफ कर दिया कि वह एनडीए के साथ नहीं जाएगी, जो कांग्रेस की राजनीति के लिए सकारात्मक संकेत है. – लेकिन थोड़ा डर भी क्योंकि टीवीके को बहुमत के लिए अभी और समर्थन चाहिए और अगर उसे गैर-भाजपा खेमे से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला तो राजनीतिक समीकरण अचानक बदल भी सकते हैं. ऐसे में कांग्रेस चाहती है कि टीवीके का सरकार बनाना पूरी तरह बीजेपी-विरोधी खेमे के सहारे ही संभव हो.

किससे मांगा समर्थन? टीवीके ने अभी तक जिनसे खुलकर समर्थन मांगा है उनमें शामिल हैं: 1. वाम दल (CPI और अन्य वामपंथी पार्टियां) 2. वीसीके (विदुथलाई Chiruthaigal Katchi) 3. IUML (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग)

चेन्नई में टीवीके नेता सीटीआर निर्मल कुमार ने सीपीआई के राज्य सचिव एम वीरापांडियन से मुलाकात की और औपचारिक रूप से समर्थन की मांग रखी. इससे साफ है कि टीवीके अपना ताना-बाना पूरी तरह सेक्युलर और वाम-समर्थित खेमे में बुनने की कोशिश कर रही है.

कांग्रेस का क्या रोल है? कांग्रेस ने पहले ही टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है.– कांग्रेस के 5 विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने की सहमति दे दी है. – इसके बावजूद टीवीके को बहुमत के लिए अभी भी 6 और विधायकों की जरूरत है. यानी कांग्रेस टीवीके के साथ खड़ी है लेकिन उसकी संख्या इतनी नहीं कि अकेले टीवीके को सत्ता तक पहुंचा दे. इसलिए व‍िजय थलापत‍ि को अन्य दलों और निर्दलीयों की तरफ देखना ही पड़ेगा.

सरकार बनाने का गणित – टीवीके की सीटें: 108 – बहुमत के लिए जरूरी संख्या: (मानक बहुमत) – टीवीके अभी उससे कम पर है. – कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन: टीवीके के खाते में जुड़ चुका है. – कमी: अभी भी 6 विधायकों की जरूरत.

यानी टीवीके को सरकार बनाने के लिए कुछ और छोटे दलों या अन्य पार्टियों के गुटों को अपने पक्ष में लाना होगा.

AIADMK का फैक्टर: किसने समर्थन के संकेत दिए, किसने इनकार? AIADMK के 28 विधायकों को पुदुचेरी के एक रिसॉर्ट में भेजा गया है. यह कदम संकेत देता है कि पार्टी के भीतर टीवीके को समर्थन देने को लेकर चर्चा और खींचतान चल रही है.रिपोर्ट्स के मुताबिक सीवी शन्मुगम और ओएस मणियन के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके के कुछ गुट टीवीके को समर्थन देने के पक्ष में हो सकते हैं लेकिन शर्त यह है कि उन्हें सत्ता में अहम पद या भूमिका मिले. दूसरी ओर एआईएडीएमके प्रमुख एडापड्डी के.पलानीस्वामी (EPS) इस समर्थन के खिलाफ बताए जा रहे हैं.

यानी एआईएडीएमके एकजुट नहीं है और टीवीके के लिए यह मौका भी है और जोखिम भी. अगर कोई गुट अलग होकर समर्थन देता है तो सरकार बनाना टीवीके के लिए आसान हो सकता है लेकिन इससे राज्य की राजनीति और अस्थिर भी हो सकती है.

राज्यपाल Vs टीवीके और संवैधानिक बहस विजय ने बुधवार को दूसरी बार राज्यपाल से मुलाकात की जो 45 मिनट तक चली। यह मुलाकात इस बात का संकेत है कि TVK सरकार गठन को लेकर सक्रिय रूप से दावा पेश कर रही है।– DMK, कांग्रेस और वाम दलों का कहना है कि राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी TVK को बुलाना चाहिए। – वहीं, बीजेपी का कहना है कि राज्यपाल पूरी तरह संवैधानिक नियमों के तहत ही काम करेंगे।

यानी एक तरफ विपक्षी दल TVK के पक्ष में माहौल बना रहे हैं, दूसरी तरफ बीजेपी यह संदेश दे रही है कि निर्णय सिर्फ संवैधानिक मानकों के आधार पर होगा, न कि राजनीतिक दबाव पर।

– TVK का मौजूदा स्टैंड साफ है: – एनडीए/बीजेपी से कोई संपर्क नहीं, न अभी, न आगे की योजना में। – समर्थन के लिए वाम दल, VCK, IUML और कांग्रेस जैसे दलों की ओर रुख। – कांग्रेस के लिए यह स्थिति आधी जीत और आधी चिंता है: – जीत इसलिए, क्योंकि TVK ने एनडीए से दूरी रखी है। – चिंता इसलिए, क्योंकि TVK को बहुमत के लिए अभी भी 6 विधायकों की जरूरत है, और अगर गैर-भाजपा खेमे से यह संख्या पूरी न हुई, तो भविष्य में समीकरण बदलने की आशंका बनी रहेगी।

अभी के राजनीतिक गणित में सबसे बड़ा सवाल यही है: – क्या वाम दल, VCK, IUML और कुछ AIADMK गुट मिलकर TVK को बहुमत दिला पाएंगे?– या फिर तमिलनाडु की राजनीति किसी नए मोड़ पर जाएगी, जहां गठबंधन की नई तस्वीर उभरेगी?

फिलहाल इतना तय है कि विजय थलापति ने बीजेपी से दूरी बनाकर साफ संदेश दे दिया है और तमिलनाडु की सत्ता की जंग अब पूरी तरह गैर-एनडीए खेमे के अंदर ही सिमटती दिख रही है.

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